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Jhansi: पूर्ति विभाग कराता है एफआईआर, फिर फाइल रहस्यम हाल में गायब

झाँसी: टैंकरों से डीजल-पेट्रोल की चोरी पकड़ी जाती है, तेल बरामद होता है और केस भी दर्ज हो जाता है और यहीं से शुरू हो जाता है तेल का एक और खेल. इस खेल में तेल की धार कहां जाती है, किसी को खबर नहीं हो पाती. विवेचना कर आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही फाइल रहस्यम हाल में गायब हो जाती है.
दरअसल, आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने की शक्ति प्रशासन की होती है. इसका उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है. ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी छापा मारकर अवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी पकड़ते हैं. जांच के बाद आपूर्ति विभाग के सप्लाई इंस्पेक्टर संबंधित इलाके के थानों में वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज कराते हैं और पुलिस को इसकी विवेचना की जिम्मेदारी मिलती है, बस यहीं से ‘तेल का खेल’ शुरू होता है. विवेचना अधिकारी पुलिस इंस्पेक्टर सप्लाई इंस्पेक्टर से चोरी की बाबत की गई जांच की फाइलें मांगते रह जाते हैं और ये फाइलें गायब हो चुकी होती हैं. अब सवाल उठ रहे हैं कि वस्तु अधिनियम के तहत इन केसों की विवेचना किस तरह की जाए क्योंकि चोरी पकड़ी आपूर्ति विभाग ने और केस दर्ज हुआ पुलिस विभाग में. ऐसे में विवेचना किस तरह होगी. शायद यही वजह है कि तेल चोरी करने के खेल में लिप्त लोग अभी भी बचे हुए हैं.
खेल को ऐसे समझें: चौरीचौरा इलाके से अक्सर टैंकरों से डीजल-पेट्रोल की चोरी पकड़ी जाती है. कहीं-कहीं अवैध तरीके से डीजल-पेट्रोल बिकते हुए भी पाए जाते हैं. कार्रवाई की जिम्मेदारी सप्लाई विभाग की है. लेकिन कई बार प्रशासनिक अधिकारी पकड़ते हैं और पूर्ति निरीक्षक को थानों में केस दर्ज कराना पड़ता है.
केस दर्ज होने के बाद दारोगा को विवेचना की जिम्मेदारी मिलती है. विवेचना के लिए सबूत चाहिए होते हैं, तो वह पूर्ति निरीक्षकों से उसे तलब करता है. यहीं से आनाकानी शुरू हो जाती है, क्योंकि तेल में खेल हो चुका होता है. चौरीचौरा के दो केस 2022 और 2023 तो लम्बित हैं तो वहीं पीपीगंज का एक केस पिछले नौ साल से लम्बित पड़ा है.





