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गेल की गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान टूटी जल निगम की मुख्य लाइन

महेशपुर। क्षेत्र में गेल द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान कथित लापरवाही का खामियाजा अब करीब चार हजार परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के दौरान जल निगम की मुख्य पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। घटना को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो लीकेज का सही स्थान पता चल सका है और न ही पेयजल आपूर्ति बहाल हो पाई है। लगातार तीन दिनों से पानी की सप्लाई बंद होने के कारण स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जलापूर्ति बाधित होने से घरों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। लोगों को पीने और घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है जिनके पास पानी का कोई दूसरा स्रोत उपलब्ध नहीं है।
गैस पाइपलाइन की खुदाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुई लाइन
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गेल की ओर से क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसी दौरान खुदाई करते समय जल निगम की मुख्य पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई।
मुख्य लाइन के क्षतिग्रस्त होने के बाद क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई। पाइपलाइन में लीकेज की जानकारी मिलने के बाद सड़क पर खुदाई कर मरम्मत की कोशिश शुरू की गई, लेकिन तीन दिन गुजरने के बाद भी समस्या का वास्तविक स्थान सामने नहीं आ सका है।
इस वजह से मरम्मत का काम भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है और हजारों घरों में पानी की आपूर्ति बंद पड़ी है।
बिना समन्वय के काम शुरू करने का आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि गैस पाइपलाइन बिछाने से पहले संबंधित विभागों के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं किया गया। उनका कहना है कि काम शुरू करने से पहले जल निगम को जानकारी दी जाती तो उसकी मुख्य पाइपलाइन की स्थिति और मार्ग का पता लगाया जा सकता था।
लोगों का यह भी आरोप है कि क्षेत्रवासियों को खुदाई शुरू करने से पहले कोई सूचना नहीं दी गई। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सड़क और आसपास के हिस्सों में खुदाई का काम शुरू कर दिया गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पाइपलाइन टूटने के बाद भी तत्काल वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते लोगों को पिछले तीन दिनों से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सड़क पर खोदा गया गड्ढा, फिर भी नहीं मिला लीकेज
जल निगम की मुख्य लाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद मरम्मत के लिए सड़क पर गड्ढा खोदा गया। उम्मीद थी कि पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचकर उसे जल्द ठीक कर दिया जाएगा।
हालांकि, समस्या यह है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पाइपलाइन वास्तव में किस स्थान पर टूटी है। पानी के रिसाव और पाइपलाइन की स्थिति का सही पता नहीं चल पाने के कारण मरम्मत का काम अधर में लटका हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर गड्ढा होने के कारण आवाजाही में भी परेशानी हो रही है। इसके बावजूद मुख्य समस्या पानी की आपूर्ति बहाल न होने की है।
चार हजार घरों में पानी का संकट
पेयजल आपूर्ति बंद होने का सीधा असर करीब चार हजार घरों पर पड़ा है। तीन दिनों से पानी नहीं आने के कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
घरों में खाना बनाने, पीने, सफाई और अन्य जरूरी कामों के लिए पानी की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक सप्लाई बंद रहने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलापूर्ति जल्द बहाल नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने संबंधित विभागों से तत्काल समस्या का समाधान कराने और वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
विभागीय समन्वय पर उठे सवाल
घटना ने सरकारी और संबंधित एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी क्षेत्र में गैस, बिजली, सीवर या अन्य भूमिगत पाइपलाइन से जुड़ा काम शुरू करने से पहले वहां मौजूद पुरानी सुविधाओं की जानकारी होना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि गैस पाइपलाइन बिछाने से पहले जल निगम की मुख्य लाइन के बारे में जानकारी ली गई होती तो संभव है कि यह नुकसान टाला जा सकता था।
अब पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय लोगों का ध्यान इस बात पर है कि पानी की आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
तीन दिनों से पानी बंद होने के कारण स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जल निगम से वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक मुख्य लाइन की मरम्मत नहीं होती, तब तक टैंकरों या अन्य माध्यमों से पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
लोगों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा को लंबे समय तक बाधित नहीं रखा जा सकता। खासकर गर्मी और उमस के मौसम में पानी की जरूरत और बढ़ जाती है।
जल्द समाधान की उम्मीद
फिलहाल मुख्य चुनौती क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के वास्तविक स्थान का पता लगाकर उसकी मरम्मत करना है। जब तक लीकेज का सही स्थान नहीं मिलता, तब तक जलापूर्ति बहाल करना मुश्किल बना हुआ है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर समस्या का समाधान निकालेंगे। साथ ही भविष्य में इस तरह के काम से पहले जल निगम समेत अन्य संबंधित विभागों से समन्वय किया जाएगा, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
कुल मिलाकर, महेशपुर क्षेत्र में गेल की गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान जल निगम की मुख्य पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से करीब चार हजार घरों में तीन दिनों से पानी की सप्लाई बंद है। मरम्मत के लिए सड़क पर खुदाई तो की गई है, लेकिन पाइपलाइन टूटने का वास्तविक स्थान अब तक पता नहीं चल सका है। स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार विभागों से तत्काल लीकेज का पता लगाकर आपूर्ति बहाल करने और तब तक वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।





