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सैकड़ों दीपों से रोशन हुआ जैन मंदिर, भक्तिमय माहौल में संपन्न हुई महाआरती

खतौली (मुजफ्फरनगर) : कस्बे के स्टेशन रोड स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन नया मंदिर में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत शनिवार सायंकाल भक्ति और आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। जिनशासन प्रभावना संघ के तत्वावधान में आयोजित भव्य महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दीपों की रोशनी, ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि और सामूहिक मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
महाआरती के दौरान सैकड़ों दीपों की जगमगाती रोशनी ने मंदिर परिसर को अलौकिक स्वरूप प्रदान किया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भगवान की आराधना की। इस दौरान "जैनं जयतु शासनम्" और "णमो अरिहंताणं" के जयघोषों से वातावरण गूंज उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी श्रद्धालु धार्मिक उत्साह में डूबे नजर आए।
भक्ति और संस्कारों के संवर्धन का लिया संकल्प
महाआरती के बाद आयोजित धार्मिक सभा में वक्ताओं ने भगवान महावीर के सिद्धांतों और उनके बताए मार्ग पर प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं ने सत्य, अहिंसा, क्षमा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। साथ ही समाज में जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार, आपसी सद्भाव और धार्मिक संस्कारों को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। सिद्धचक्र महामंडल विधान जैसे आयोजन लोगों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं और धर्म के प्रति आस्था को मजबूत बनाते हैं।
मंदिर परिसर में रही विशेष सजावट
महाआरती को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी और धार्मिक सजावट ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ भगवान की आराधना की और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
जिनशासन प्रभावना संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारियों, जैन समाज के गणमान्य लोगों और श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। सभी ने आयोजन की सफलता के लिए एकजुट होकर कार्य किया।
महाआरती के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में प्रेम, शांति एवं सद्भाव का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। धार्मिक उल्लास और भक्ति से सराबोर यह आयोजन देर शाम तक श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।





