उत्तर प्रदेश

बुजुर्गों-दिव्यांगों के लिए विकास भवन के दफ्तरों में जाना दुश्वार

Admin Delhi 1
8 Jun 2023 6:04 AM GMT
बुजुर्गों-दिव्यांगों के लिए विकास भवन के दफ्तरों में जाना दुश्वार
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इलाहाबाद न्यूज़: दिव्यांगों और बुजुर्गजनों की सरकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने वाले जिले के विकास भवन में ही उनकी सहूलियत का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. सरकारी इमदाद की आस लिए बीते 32 सालों से रोजाना यहां सैकड़ों दिव्यांग और बुजुर्ग आते तो हैं, लेकिन विकास भवन की 75 सीढ़ियां चढ़कर दफ्तर तक जाना उनके लिए मुसीबत बन जाता है. आमतौर पर छोटे से छोटे स्थान पर जहां बुजुर्गों और दिव्यांगों का आना होता है, वहां या तो लिफ्ट का प्रबंध होता है या फिर रैंप का. लेकिन जिले की विकास योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले इस कार्यालय में आज भी यह सुविधा मयस्सर नहीं है.

विकास भवन में कुल चार मंजिल हैं. तीन तलों पर कार्यालय संचालित होते हैं. भूतल से तीसरे तल तक जाने के लिए 75 सीढ़ियों को पार करना पड़ता है. वैसे इस पूरे भवन में कुल 26 कार्यालय हैं, लेकिन बुजुर्गों के लिए महत्वपूर्ण समाज कल्याण विभाग और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय तीसरे तल पर है. वृद्धा जन पेंशन और किसानों की योजनाओं को जानने के लिए बुजुर्ग किसानों को रोजाना यहां आना पड़ता है. सीढ़ियां चढ़कर दफ्तर में पहुंचना पड़ता है. दूसरे तल पर लघु सिंचाई, कृषि विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी जैसे कार्यालय हैं, यहां तक का सफर 50 सीढ़ियों का है. यहां पर भी दिव्यांगों का आए दिन आना होता है. पहले तल पर जिला पंचायती राज विभाग कार्यालय, नगरीय निकाय चुनाव कार्यालय है. यहां भी आए दिन 70 सीढ़ियां पारकर के लोगों का आना जाना होता है.

छड़ी के सहारे चलने वाले बुजुर्ग श्याम लाल यहां आए. उन्हें समाज कल्याण विभाग जाना था. तीसरी मंजिल स्थित इस कार्यालय पर पहुंचने के लिए बुजुर्ग पांच बार रुके. गनीमत रही कि उनका बेटा साथ था, कदम दर कदम पिता को सहारा दे रहा था. उन्होंने बताया कि निजी काम से आए थे. सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते दम फूल जाता है. इस विभाग में लिफ्ट तो होनी ही चाहिए. वहीं बुजुर्ग मो. अनीस भी सीढ़ियां चढ़ते वक्त रेलिंग का सहारा लेते दिखे. उन्होंने बताया कि यहां अकसर आना होता है, लेकिन इस समस्या से हर बार जूझना पड़ता है.

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