उत्तर प्रदेश

दूध असली है या मिलावटी डिटर्जेंट की मिलावट ऐसे करें चेक

Ratna Netam
8 Aug 2026 2:41 PM IST
दूध असली है या मिलावटी डिटर्जेंट की मिलावट ऐसे करें चेक
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कानपुर : क्या दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है? हल्दी और लाल मिर्च में कृत्रिम रंग तो नहीं मिलाया गया? काली मिर्च में पपीते के बीज या चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट तो नहीं है? अब इन सवालों के जवाब जानने के लिए हर बार प्रयोगशाला जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कानपुर में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की मोबाइल प्रयोगशाला ने लोगों को खाद्य पदार्थों में मिलावट की प्रारंभिक पहचान करने के आसान तरीके बताए हैं।
शुक्रवार को कानपुर के मोतीझील क्षेत्र में विभाग की **फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स मोबाइल प्रयोगशाला** पहुंची। यहां लाइव प्रदर्शन के जरिए आम लोगों को रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के सरल तरीके बताए गए। अधिकारियों ने विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूनों पर मौके पर परीक्षण करके समझाया कि कुछ सामान्य मिलावट की पहचान घर पर भी प्रारंभिक स्तर पर कैसे की जा सकती है।
मोबाइल प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली का कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर किए जा रहे अलग-अलग परीक्षणों को देखा और अधिकारियों से खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के बारे में जानकारी ली। इस दौरान सहायक आयुक्त खाद्य संजय प्रताप सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र द्विवेदी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार, नरेंद्र शर्मा, बृजमोहन गुप्ता, उपासना शाह और मोबाइल प्रयोगशाला में तैनात विश्लेषक मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि मिलावट के खिलाफ जागरूक उपभोक्ता सबसे प्रभावी हथियार हैं। उन्होंने कहा कि फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के जरिए लोगों को ऐसे सरल परीक्षणों की जानकारी दी जा रही है, जिनसे वे खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक गुणवत्ता को लेकर सतर्क हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि खाद्य सामग्री हमेशा स्वच्छ और विश्वसनीय प्रतिष्ठानों से ही खरीदें। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो संबंधित विभाग को इसकी सूचना दें।
प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि दूध, पनीर, खोया और छेना में स्टार्च की मिलावट की प्रारंभिक पहचान आयोडीन की मदद से की जा सकती है। इसके लिए खाद्य पदार्थ के नमूने में टिंचर ऑफ आयोडीन की दो से तीन बूंदें डाली जाती हैं। यदि नमूने का रंग नीला दिखाई देने लगे तो उसमें स्टार्च की मिलावट होने की आशंका हो सकती है।
दूध में डिटर्जेंट की मिलावट की पहचान के लिए बराबर मात्रा में पानी मिलाकर मिश्रण को अच्छी तरह हिलाने का तरीका बताया गया। यदि इसमें असामान्य रूप से ज्यादा झाग बनता है तो डिटर्जेंट की मिलावट की आशंका हो सकती है। इसी तरह घी और मक्खन में स्टार्च की जांच के लिए भी आयोडीन की कुछ बूंदों का इस्तेमाल किया जा सकता है। नमूने का रंग नीला होने पर मिलावट की संभावना जताई गई।
मसालों में मिलावट की पहचान के भी कई तरीके बताए गए। लौंग की गुणवत्ता जांचने के लिए उसे पानी में डालने का तरीका बताया गया। अच्छी गुणवत्ता वाली लौंग पानी में नीचे बैठ जाती है, जबकि इस्तेमाल की जा चुकी या खराब गुणवत्ता वाली लौंग पानी की सतह पर तैर सकती है।
काली मिर्च में पपीते के बीज की मिलावट की प्रारंभिक पहचान के लिए भी पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार शुद्ध काली मिर्च पानी में नीचे बैठ जाती है, जबकि पपीते के बीज अपेक्षाकृत हल्के होने के कारण ऊपर तैर सकते हैं।
लाल मिर्च पाउडर में कृत्रिम रंग की पहचान के लिए उसे पानी में डालकर देखने की जानकारी दी गई। यदि लाल मिर्च पाउडर से पानी में रंग की स्पष्ट धारियां उतरने लगें तो उसमें कृत्रिम रंग मिलाए जाने की आशंका हो सकती है। इसी तरह हल्दी की जांच के लिए एक गिलास पानी में करीब एक चम्मच हल्दी डालने का तरीका बताया गया। यदि हल्दी पानी को बहुत गहरा पीला रंग देने लगे तो उसमें कृत्रिम रंग की मिलावट की संभावना हो सकती है।
चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट की प्रारंभिक पहचान के लिए वर्क को उंगलियों से मसलकर देखने और आग के संपर्क में उसके व्यवहार में अंतर देखने का तरीका भी बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि इन घरेलू या मौके पर किए जाने वाले परीक्षणों को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि मोबाइल प्रयोगशाला में बताए गए सभी परीक्षण केवल **प्रारंभिक पहचान** के लिए हैं। किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की अंतिम पुष्टि विभागीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जा सकती है। इसलिए किसी प्रारंभिक परीक्षण में संदिग्ध परिणाम मिलने पर उपभोक्ताओं को संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना देनी चाहिए।
अधिकारियों ने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के लिए उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान भी सावधानी बरतनी चाहिए। पैकेटबंद सामग्री खरीदते समय लेबल, पैकिंग, निर्माण और समाप्ति तिथि की जांच करनी चाहिए। वहीं खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। कानपुर में मोबाइल प्रयोगशाला के इस अभियान का उद्देश्य लोगों को मिलावट के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित खाद्य सामग्री के इस्तेमाल के लिए सजग बनाना है।
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