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उत्तर प्रदेश
मधुबनी से सहारनपुर तक नकली सिक्कों के नेटवर्क की तलाश, आरोपी रिमांड पर
nidhi
25 Oct 2026 9:58 AM IST

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नकली सिक्का गिरोह का एक और आरोपी गिरफ्तार
सहारनपुर: नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने के मामले में सहारनपुर पुलिस की जांच बिहार तक पहुंच गई है। कोतवाली नगर पुलिस ने मधुबनी जिले से मिथिलेश चौरसिया नाम के एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। स्थानीय पुलिस के सहयोग से हुई इस कार्रवाई के बाद प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या छह हो गई है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर कथित गिरोह के अन्य सदस्यों, सिक्कों की सप्लाई और आर्थिक लेनदेन के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
मधुबनी के राजनगर थाना क्षेत्र के लड्डूगांव में आरोपी की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची थी। उप निरीक्षक इकबाल सिंह तोमर के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, आरोपी का ट्रांजिट रिमांड लिया गया है। अब उससे पूछताछ में बाजार तक नकली सिक्के पहुंचाने वालों और सप्लाई के ठिकानों की जानकारी जुटाई जाएगी। फिलहाल रिमांड की अवधि और पूछताछ से किसी नए खुलासे का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई 12 सितंबर को हुई थी। पुलिस ने कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह के साथ हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया और अनुराग पाल उर्फ लंकेश को गिरफ्तार किया था। मिथिलेश का नाम भी इसी मामले में सामने आया था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। नई गिरफ्तारी को सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल से जोड़कर देखा जा रहा है।
सितंबर की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 20 रुपये मूल्य वाले 6,400 कथित नकली सिक्के बरामद किए थे। इनका अंकित मूल्य 1.28 लाख रुपये था। इसके अतिरिक्त अधबने सिक्के, सिक्के तैयार करने वाली छह मशीनें, डाई, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, धातु की शीट और दो कार मिलने की जानकारी दी गई थी। पुलिस ने इन बरामद वस्तुओं को कथित निर्माण और आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ा है। बरामदगी की यह जानकारी पहले पकड़े गए आरोपियों से संबंधित है; इसे मधुबनी की नई कार्रवाई की बरामदगी नहीं बताया गया है।
पुलिस का दावा है कि गिरोह लंबे समय से नकली सिक्के बनाकर अपने नेटवर्क के जरिए विभिन्न स्थानों पर पहुंचाता था। शुरुआती पूछताछ में लगभग 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाने की बात सामने आने का दावा किया गया था। हालांकि, यह रकम मौके से बरामद सिक्कों का मूल्य नहीं है। कथित कारोबार का कुल आकार और वास्तव में बाजार तक पहुंचे सिक्कों की मात्रा जांच का विषय है। इस दावे को बरामदगी के आंकड़े से अलग समझना आवश्यक है।
नेटवर्क की आर्थिक कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस बरामद सात हिसाब रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन की जानकारी खंगाल रही है। सितंबर में सामने आई जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, रजिस्टरों में दर्ज भुगतान और मोबाइल संपर्कों का मिलान किया जा रहा था। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि कथित कारोबार से हुई कमाई किसके पास पहुंची और एजेंटों को किस तरह भुगतान हुआ। एसएसपी अभिनंदन सिंह ने भी लेनदेन तथा संपर्कों की पड़ताल की बात कही थी। कमीशन के आधार पर सिक्के बाजार में पहुंचाने का आरोप भी जांच में शामिल है। पहले सामने आई जानकारी में अलग-अलग स्तर पर लगभग 10 से 30 प्रतिशत तक हिस्सेदारी देने की बात कही गई थी। पुलिस बिहार, दिल्ली और पंजाब सहित अन्य स्थानों से जुड़े संपर्कों की भूमिका देख रही है। किसी व्यक्ति का फोन नंबर मिलना या संपर्क सूची में नाम होना अपने आप में अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। उसकी वास्तविक भूमिका संबंधित लेनदेन और अन्य साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह सहारनपुर में नया ठिकाना तैयार करने की कोशिश कर रहा था। मधुबनी से जुड़ी रिपोर्ट में हरियाणा के सोनीपत में कथित नकली सिक्का निर्माण गतिविधियों का उल्लेख भी किया गया है। इस पृष्ठभूमि में जांच केवल एक स्थान से मिले सिक्कों तक सीमित नहीं है। निर्माण से लेकर वितरण तक अलग-अलग लोगों की भूमिका सामने लाना जरूरी होगा। आरोपी से मिलने वाली जानकारी को पुराने रिकॉर्ड और बरामद सामग्री से मिलाने पर ही नेटवर्क की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पहले की कार्रवाई के बाद पुलिस ने व्यापारियों और वित्तीय संस्थानों से संदिग्ध सिक्के मिलने पर सूचना देने की अपील की थी। साथ ही आरोपियों के पुराने संपर्कों और कथित अवैध संपत्तियों की जानकारी जुटाने की बात कही गई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उस समय इस गिरोह का दूसरे चर्चित बैंक करेंसी मामले से कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ था। इसलिए अलग-अलग नकली मुद्रा प्रकरणों को बिना साक्ष्य एक ही नेटवर्क का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल नई गिरफ्तारी के बाद पुलिस का ध्यान कथित सप्लाई नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की पहचान पर है। पूछताछ से बड़े खुलासे होने की संभावना जताई गई है, लेकिन कोई नया निष्कर्ष अभी घोषित नहीं हुआ है। आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका और उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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