उत्तर प्रदेश

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले में जांच को 15 दिन का विस्तार, SIT करेगी गहन पड़ताल

Kavita2
1 July 2026 3:56 PM IST
अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले में जांच को 15 दिन का विस्तार, SIT करेगी गहन पड़ताल
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के गबन के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के कार्यकाल को 15 दिन के लिए बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह निर्णय जांच को और गहराई से आगे बढ़ाने तथा मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के लिए लिया गया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, SIT को अब अतिरिक्त समय दिया गया है ताकि वह न केवल मौजूदा साक्ष्यों की जांच कर सके, बल्कि जरूरत पड़ने पर नए तथ्यों और संदिग्ध लेन-देन की भी पड़ताल कर सके। जांच एजेंसी का मानना है कि मामले में कई स्तरों पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते विस्तृत जांच आवश्यक हो गई है।

यह मामला राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े दान संग्रह व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों से संबंधित है। आरोप है कि दान की राशि के उपयोग और रिकॉर्डिंग में अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी जांच के लिए सरकार ने SIT का गठन किया था। टीम को प्रारंभिक तौर पर सीमित समय दिया गया था, लेकिन जांच की जटिलता और दस्तावेजों की संख्या को देखते हुए अब समय सीमा बढ़ा दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि SIT ने अब तक कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की है और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की गई है। हालांकि, कुछ वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं मिल पाई है, जिसके चलते जांच जारी रखने की आवश्यकता महसूस हुई है।

सरकार के इस फैसले को जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस अतिरिक्त समय में SIT को अधिक सटीक निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिलेगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके लिए जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

SIT को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दे और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाए। टीम को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या जल्दबाजी न हो।

यह मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि अयोध्या का राम मंदिर देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र है और इससे जुड़ी किसी भी वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से देखा जाता है। इसी कारण सरकार इस जांच को बेहद सावधानीपूर्वक आगे बढ़ा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान दान संग्रह प्रणाली, बैंकिंग रिकॉर्ड, रसीदों और खर्च के विवरण की गहन समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि दान की राशि का उपयोग किन-किन परियोजनाओं और गतिविधियों में किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि SIT का फोकस केवल आरोपों की पुष्टि या खंडन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता की संभावना न रहे। इसके लिए सिस्टम में सुधार के सुझाव भी तैयार किए जा सकते हैं।

इस बीच, सरकार का यह भी कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना पर्याप्त साक्ष्य के दोषी नहीं ठहराया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन और मंदिर से जुड़े प्रबंधन तंत्र से भी SIT लगातार जानकारी जुटा रही है। कई स्तरों पर रिकॉर्ड मिलान और वित्तीय ऑडिट की प्रक्रिया भी जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जांच का विस्तार करना आवश्यक होता है, ताकि हर पहलू को सही तरीके से समझा जा सके और किसी भी प्रकार की त्रुटि या अधूरी जांच की संभावना न रहे।

फिलहाल, SIT को दिए गए 15 दिन के अतिरिक्त समय को जांच प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विस्तारित अवधि में जांच टीम क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या नए तथ्य सामने आते हैं।

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