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उत्तर प्रदेश
स्कूल में मासूम को थप्पड़ मारकर बालों से घसीटा, टीचर-प्रिंसिपल पर मुकदमा
Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 6:09 PM IST

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक प्ले-वे स्कूल में तीन साल के मासूम बच्चे के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल की शिक्षिका ने बच्चे को थप्पड़ मारे, उसके बाल पकड़कर घसीटा और सिर पर नाखूनों से नोचा। घटना की जानकारी मिलने पर बच्चे के पिता ने शाहपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद शनिवार रात शिक्षिका और प्रधानाध्यापक के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया है। इस घटना ने छोटे बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खाना नहीं खाने पर बच्चे के साथ मारपीट का आरोप
मामला गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित गोविंदपुरी कॉलोनी का है। यहां रहने वाले अतुल सिंह ने अपने तीन वर्षीय बेटे का दाखिला घर के पास स्थित यूरो किड्स प्ले-वे स्कूल में कराया था। परिवार का आरोप है कि 13 अक्टूबर को स्कूल की ओर से वीडियो कॉल किया गया, जिसमें बच्चा कांपते हुए रो रहा था।बताया गया कि बच्चा खाना नहीं खा रहा था। इसी दौरान आरोप है कि उसके मुंह में जबरन रोटी ठूंस दी गई। यह स्थिति देखकर परिजन स्कूल पहुंचे और बच्चे को अपने साथ घर ले आए।
घर पहुंचने के बाद बच्चे ने परिजनों को बताया कि स्कूल में उसके साथ मारपीट की गई थी। मां सालवी सिंह के अनुसार, बच्चे के सिर पर नाखूनों से नोचने के निशान भी दिखाई दिए। इसके बाद परिवार को स्कूल में उसके साथ हुए व्यवहार पर संदेह हुआ।
स्कूल का नाम सुनते ही रोने लगता था मासूम
परिजनों का कहना है कि घटना के बाद बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह स्कूल जाने की बात सुनते ही रोने और चीखने लगता था।माता-पिता के मुताबिक, बच्चा पहले सामान्य रूप से स्कूल जाता था, लेकिन घटना के बाद वह डरा हुआ रहने लगा। परिवार को आशंका हुई कि स्कूल में उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे उसके मन में डर बैठ गया।मामले की गंभीरता को देखते हुए पिता ने स्कूल जाकर सीसीटीवी फुटेज देखने का निर्णय लिया। उनका दावा है कि फुटेज में शिक्षिका बच्चे को थप्पड़ मारती और उसके बाल पकड़कर खींचती दिखाई दीं।
CCTV फुटेज की जांच के बाद पुलिस की कार्रवाई
बच्चे के पिता अतुल सिंह ने शाहपुर थाने में शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की भी अपील की थी, ताकि घटना से जुड़े साक्ष्य नष्ट न हों।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच की और सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण कराया। पुलिस के मुताबिक, फुटेज की जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद शनिवार रात शिक्षिका और प्रधानाध्यापक के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया।यह कार्रवाई मामले में सामने आए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। आगे की जांच में पुलिस अन्य संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल कर सकती है।
प्रधानाध्यापक पर भी दर्ज हुआ मुकदमा
परिवार की शिकायत केवल शिक्षिका तक सीमित नहीं थी। बच्चे के पिता ने स्कूल प्रबंधन से भी जवाब मांगा था।परिजनों के अनुसार, जब उन्होंने प्रधानाध्यापक से स्कूल का लगभग एक महीने का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने को कहा, तो उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। परिवार ने आशंका जताई थी कि देरी होने पर महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ हो सकती है।इसी प्रकरण में पुलिस ने शिक्षिका के साथ प्रधानाध्यापक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि, प्रधानाध्यापक की कथित भूमिका और उन पर लगाए गए आरोपों की विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूसरे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
पीड़ित बच्चे के परिजनों ने आशंका जताई है कि संबंधित शिक्षिका दूसरे बच्चों के साथ भी अनुचित व्यवहार करती रही होंगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।परिवार का कहना है कि मामला केवल उनके बेटे तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले अन्य छोटे बच्चों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।प्ले-वे स्कूलों में कम उम्र के बच्चे पढ़ने और शुरुआती गतिविधियां सीखने जाते हैं। ऐसे में उनकी देखभाल करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।बच्चों को डराने, मारने या जबरन खिलाने के बजाय धैर्य और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना जरूरी है।
छोटे बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर उठे सवाल
तीन साल की उम्र में बच्चे अपनी परेशानी को स्पष्ट शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में माता-पिता को उनके व्यवहार, डर और अचानक आए बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।यदि बच्चा अचानक स्कूल जाने से डरने लगे, किसी विशेष व्यक्ति के पास जाने से बचे या उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दें, तो इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।स्कूल प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है कि वह बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से सुने।सीसीटीवी व्यवस्था, कर्मचारियों की निगरानी और शिकायतों के समाधान की स्पष्ट प्रक्रिया बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाने में मदद कर सकती है।
पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी
गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में पुलिस ने शिक्षिका और प्रधानाध्यापक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।सीसीटीवी फुटेज की जांच के आधार पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
फिलहाल बच्चे के परिवार ने स्कूल में अन्य बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। इस मामले ने अभिभावकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटे बच्चों को स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा की निगरानी किस तरह सुनिश्चित की जाए।
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