उत्तर प्रदेश

चांदी के सिक्कों की बढ़ी मांग, धनतेरस पर सराफा बाजार में उत्साह

nidhi
3 Nov 2026 10:09 AM IST
चांदी के सिक्कों की बढ़ी मांग, धनतेरस पर सराफा बाजार में उत्साह
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पीलीभीत: धनतेरस पर पीलीभीत के सराफा बाजार में खरीदारी की रौनक दिखाई दे रही है। चांदी के दाम घटने से चांदी के सिक्कों और भगवान गणेश व माता लक्ष्मी की मूर्तियों की बिक्री तेज हुई है। त्योहार पर शुभ खरीदारी की परंपरा निभाने के लिए लोग इन वस्तुओं को पसंद कर रहे हैं।
धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा है। अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार लोग अलग-अलग वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। चांदी की कीमतों में कमी ऐसे खरीदारों के लिए आकर्षण बनी है, जो त्योहार पर कीमती धातु की कोई वस्तु घर लाना चाहते हैं। सिक्के और छोटी मूर्तियां इस खरीदारी का प्रमुख हिस्सा हैं। चांदी के सिक्कों का इस्तेमाल पूजा के साथ उपहार देने के लिए भी किया जाता है। लक्ष्मी-गणेश की आकृति वाले सिक्के धनतेरस और दीपावली की खरीदारी से विशेष रूप से जुड़े हैं। वहीं, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की चांदी की मूर्तियां खरीदने में भी लोग रुचि दिखा रहे हैं। दीपावली पर इनकी पूजा की परंपरा के कारण त्योहार के दौरान इनकी मांग रहती है।
कीमतों में गिरावट का असर खरीदार के बजट पर भी पड़ता है। हालांकि, किसी सिक्के या मूर्ति की अंतिम कीमत केवल चांदी के बाजार भाव से तय नहीं होती। उसके वजन, शुद्धता, बनावट और निर्माण शुल्क के आधार पर भुगतान की राशि अलग हो सकती है। इसलिए समान वजन की दो वस्तुओं के दाम में भी अंतर संभव है।
धनतेरस की खरीदारी के दौरान वस्तु की शुद्धता और वजन की जानकारी लेना उपयोगी है। खरीदारों को यह भी स्पष्ट कर लेना चाहिए कि बताई गई कीमत में निर्माण शुल्क और कर शामिल हैं या उनका भुगतान अलग से करना होगा। खरीद का बिल लेने से वस्तु, वजन और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। चांदी के सिक्के खरीदते समय उनकी बनावट के साथ शुद्धता पर ध्यान देना भी जरूरी है। इसी तरह मूर्तियों की खरीदारी में आकार देखकर वजन का अनुमान लगाने के बजाय वास्तविक वजन की जानकारी लेनी चाहिए। ठोस चांदी और केवल चांदी की परत चढ़ी वस्तु के बीच अंतर समझकर खरीदारी करना बेहतर है।
पीलीभीत में चांदी के दाम घटने और धनतेरस की खरीदारी एक साथ होने से बाजार में उत्साह का माहौल है। सिक्कों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की तेज बिक्री त्योहार पर पारंपरिक खरीदारी के प्रति लोगों के रुझान को दर्शाती है।
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