उत्तर प्रदेश

158 Farmers, की जमीन अधिग्रहण सूची में, बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग

Ratna Netam
13 July 2026 5:55 PM IST
158 Farmers, की जमीन अधिग्रहण सूची में, बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग
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Muzaffarnagar मुजफ्फरनगर : शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम रोहाना कलां के किसानों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजे की प्रस्तावित दरों पर असंतोष जताते हुए प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने सक्षम प्राधिकारी/अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर भूमि का उचित मूल्यांकन कर बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिए जाने की मांग की।

किसानों का कहना है कि प्रस्तावित दरों पर यदि उनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की अधिकांश भूमि बेहद उपजाऊ है और वर्षों से यही जमीन उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार बनी हुई है। ऐसे में जमीन जाने के बाद उचित मुआवजा नहीं मिलने पर किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

158 किसानों की जमीन अधिग्रहण सूची में शामिल होने का दावा

ज्ञापन देने वाले किसानों राजबीर सिंह, योगेश कुमार, संजय त्यागी, इंद्रबोस, सुंदर त्यागी और राजेश्वर त्यागी ने बताया कि शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित मार्ग ग्राम रोहाना कलां से होकर गुजर रहा है। इसके लिए गांव के करीब 158 किसानों की भूमि अधिग्रहण सूची में शामिल की गई है।

किसानों ने बताया कि गांव की लगभग 90 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य और अत्यधिक उपजाऊ है। इस जमीन पर खेती कर बड़ी संख्या में परिवार अपना जीवन यापन करते हैं। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से पहले उनकी समस्याओं और भविष्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

सर्किल रेट नहीं, वास्तविक बाजार मूल्य पर मुआवजे की मांग

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मुआवजे का निर्धारण केवल सरकारी सर्किल रेट के आधार पर न किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान सर्किल रेट और जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य में काफी अंतर है। इसलिए भूमि की गुणवत्ता, स्थान और वर्तमान बाजार कीमत को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा तय किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान नहीं किया गया तो किसानों को अपनी मेहनत से तैयार की गई जमीन के बदले उचित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाएगा।

एनएचएआई की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल

किसानों ने एनएचएआई द्वारा की जा रही भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण से पहले निष्पक्ष सर्वे कराया जाना चाहिए और किसानों की आपत्तियों को शामिल करते हुए पारदर्शी तरीके से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, ताकि किसी भी किसान के साथ अन्याय न हो।

प्रशासन से न्याय की उम्मीद

किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास परियोजनाओं के लिए किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेती की जमीन उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा का आधार है, इसलिए सरकार को किसानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने प्रशासन से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उचित कार्रवाई करने की अपील की है। किसानों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को समझते हुए न्यायपूर्ण फैसला करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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