उत्तर प्रदेश

70 year पुरानी मस्जिद मामले में इमरान मसूद की एंट्री, कानूनी लड़ाई का ऐलान

Ratna Netam
17 July 2026 4:53 PM IST
70 year  पुरानी मस्जिद मामले में इमरान मसूद की एंट्री, कानूनी लड़ाई का ऐलान
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Saharanpur सहारनपुर : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 70 साल पुरानी मस्जिद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए इसे 30 दिन के भीतर हटाने का आदेश दिया है। साथ ही 6 करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है।

नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत सुनवाई पूरी करने के बाद यह आदेश जारी किया। अदालत के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर की खसरा संख्या 539 सरकारी अभिलेखों में कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज है। इसी भूमि के करीब 315 वर्ग मीटर हिस्से पर मस्जिद का निर्माण किया गया है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर इसे सरकारी भूमि पर अवैध अधिभोग माना। आदेश में कहा गया कि संबंधित पक्ष को निर्धारित समय सीमा के भीतर परिसर खाली करना होगा। यदि 30 दिनों के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन नियमानुसार बलपूर्वक कार्रवाई कर सकता है।

इसके अलावा न्यायालय ने 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जुर्माने की वसूली भी नियमों के अनुसार की जाएगी। अदालत के आदेश के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

इस पूरे विवाद के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पहुंचे। उन्होंने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

मस्जिद को लेकर विवाद उस समय सामने आया था जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने इसकी शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी भूमि पर बनी इस मस्जिद में धार्मिक गतिविधियों के अलावा अन्य गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मस्जिद परिसर में डाकघर भी चल रहा है और कुछ कमरों को किराये पर देकर आय अर्जित की जा रही है। शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और संबंधित पक्षों से दस्तावेज मांगे गए।

नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाया गया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, मस्जिद पक्ष से जुड़े लोगों का कहना है कि इस मामले में आगे कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उनका दावा है कि मस्जिद से जुड़े पुराने दस्तावेज और अन्य तथ्य अदालत के सामने रखे जाएंगे।

फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट की इस पुरानी मस्जिद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रशासन के आदेश के बाद अब सभी की नजरें आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। 30 दिन की समय सीमा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है।

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