उत्तर प्रदेश

Bulandshahr में वैद्य विमर्श, आयुर्वेदिक उपचार पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

Ratna Netam
19 July 2026 5:53 PM IST
Bulandshahr  में वैद्य विमर्श, आयुर्वेदिक उपचार पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
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Bulandshahr बुलंदशहर : जेपी सिद्धार्थ होटल में शनिवार को आयुर्वेद वैद्यों के लिए एक दिवसीय वैद्य विमर्श सीएमई (कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले और आसपास के क्षेत्रों से आए आयुर्वेद विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान मेटाबोलिक रोगों, उनके कारणों और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से उनके प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में नगर के प्रसिद्ध क्षारसूत्र एवं पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ तथा अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के केंद्रीय संगठन मंत्री वैद्य हितेश कौशिक ने मेटाबोलिक डिसऑर्डर्स विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर शरीर में होने वाले विभिन्न विकारों और उनके उपचार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

वैद्य हितेश कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद में मेटाबोलिक डिसऑर्डर्स की तुलना शरीर की अग्नि से संबंधित विकारों से की जाती है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में कुल 13 प्रकार की अग्नियां होती हैं, जिनमें सात धात्वाग्नि, पांच भूताग्नि और एक जठराग्नि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शरीर में इन अग्नियों का संतुलन स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि जठराग्नि की विकृति होने पर पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वहीं, धात्वाग्नि के असंतुलन के कारण थायराइड, डायबिटीज और अन्य हार्मोन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा भूताग्नि की खराबी से शरीर में गंभीर रोगों की संभावना भी बढ़ जाती है।

वैद्य कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली मेटाबोलिक रोगों का बड़ा कारण बन रही है। गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, ऋतुचर्या का पालन न करना, प्राकृतिक वेगों को रोकना और शारीरिक गतिविधियों की कमी से शरीर का संतुलन बिगड़ता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में स्वस्थ रहने के लिए आहार, विहार और दिनचर्या को विशेष महत्व दिया गया है।

उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा के महत्व पर भी चर्चा की। वैद्य कौशिक ने कहा कि समय-समय पर पंचकर्म चिकित्सा नहीं कराने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर नहीं निकालने के कारण कई जटिल बीमारियां जन्म ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में रोगों के मूल कारणों को समझकर उपचार करने पर जोर दिया जाता है।

सीएमई कार्यक्रम के दौरान वैद्य हितेश कौशिक ने हाइपोथायरायडिज्म, एक्यूट रीनल फेल्योर, डायबिटीज, हृदय रोग और कोलीलिथियासिस जैसे गंभीर विषयों पर भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने इन रोगों के आयुर्वेदिक दृष्टिकोण, उपचार पद्धतियों और रोग प्रबंधन की संभावनाओं के बारे में विशेषज्ञों को जानकारी दी।

कार्यक्रम में मौजूद वैद्यों ने आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति और आधुनिक रोगों के उपचार में उसकी उपयोगिता पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों को देखते हुए आयुर्वेदिक सिद्धांतों और आधुनिक चिकित्सा के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

इस वैद्य विमर्श सीएमई के आयोजन में श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में कंपनी के एनएसएम कुलमीत सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान और नई जानकारियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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