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कानपुर: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का काफिला सीएसजेएमयू से सीएसए पहुंचने में देरी होने पर उन्होंने यातायात व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। राज्यपाल ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब दोनों संस्थानों के बीच की दूरी कुछ ही मिनटों की है तो वहां पहुंचने में इतना समय क्यों लग गया। उन्होंने इस मामले में यातायात अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा।
जानकारी के अनुसार, एचबीटीयू में आयोजित दीक्षा समारोह के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को लंच के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ले जाया गया था। लंच कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) जाना था। सीएसजेएमयू से सीएसए पहुंचने के दौरान रास्ते में देरी हुई, जिसके बाद राज्यपाल नाराज हो गईं।
राज्यपाल जब सीएसए के मुख्य द्वार पर पहुंचीं तो उन्होंने अधिकारियों से देरी का कारण पूछा। उन्होंने कहा कि यदि यह रास्ता सामान्य तौर पर पांच मिनट में तय हो जाता है तो फिर 25 मिनट क्यों लगे। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या रूट बदला गया था या किसी अधिकारी ने नया रास्ता तय किया था।
राज्यपाल की नाराजगी के बाद डीसीपी यातायात रवींद्र कुमार और एसीपी स्वरूप नगर ज्योति श्री को बुलाया गया। अधिकारियों ने राज्यपाल को पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि काफिले का रूट बदला नहीं गया था। सड़क पर जलभराव होने के कारण वाहन की गति धीमी करनी पड़ी, जिससे सफर में अधिक समय लग गया।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि दूसरे वैकल्पिक मार्ग पर मेट्रो का काम चल रहा है, इसलिए उस रास्ते से काफिला नहीं ले जाया गया। जलभराव वाले हिस्से से गुजरते समय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों को धीमी गति से चलाया गया था।
बताया गया कि सीएसजेएमयू से सीएसए तक पहुंचने के लिए निर्धारित मार्ग पहले से तय था। हालांकि बारिश के बाद सड़क पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि रूट डायवर्जन जैसी कोई स्थिति नहीं थी और देरी का मुख्य कारण सड़क की स्थिति थी।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सक्रिय रहती हैं और कार्यक्रमों के दौरान समय प्रबंधन को लेकर विशेष ध्यान देती हैं। इस घटना के बाद यातायात विभाग के अधिकारियों ने भी मौके की स्थिति और व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
कानपुर में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई है। ऐसे में वीआईपी मूवमेंट के दौरान मार्गों की स्थिति और वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। राज्यपाल की नाराजगी के बाद अधिकारियों ने यातायात प्रबंधन को और बेहतर करने पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।





