उत्तर प्रदेश

चुनाव में देरी का असर, निवर्तमान प्रधानों को नहीं मिल रहा मानदेय

Ratna Netam
27 July 2026 8:09 PM IST
चुनाव में देरी का असर, निवर्तमान प्रधानों को नहीं मिल रहा मानदेय
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उत्तर प्रदेश : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के कारण निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन प्रशासक के रूप में काम कर रहे इन ग्राम प्रधानों को अब तक मिलने वाली कई सुविधाएं बंद हो गई हैं। प्रदेश के करीब 57,694 ग्राम प्रधानों का पांच हजार रुपये प्रतिमाह मिलने वाला मानदेय बंद हो गया है। इसके अलावा ग्राम प्रधानों की आसमयिक मृत्यु होने पर उनके परिवार को मिलने वाली 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की सुविधा भी फिलहाल रुक गई है। इसको लेकर ग्राम प्रधानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने इस मामले को लेकर पंचायती राज विभाग को पत्र भेजकर सुविधाएं बहाल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने में निवर्तमान ग्राम प्रधानों की कोई भूमिका नहीं है। ऐसे में जब उन्हें प्रशासक के तौर पर गांवों के विकास कार्यों और पंचायत की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए नियुक्त किया गया है तो उन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी जारी रहनी चाहिए।

राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि तय समय पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं हो सके, जिसके बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया। उन्होंने बताया कि 27 मई से प्रदेश के सभी निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के पद पर काम कर रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक पंचायती राज विभाग की ओर से मानदेय और कल्याण कोष से संबंधित कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है।

ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि प्रशासक के रूप में ग्राम प्रधान लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। गांवों में विकास कार्यों की निगरानी, पंचायत से जुड़े प्रशासनिक काम और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान पहले की तरह ही किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें मिलने वाला मासिक मानदेय बंद करना उचित नहीं है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने बताया कि इस संबंध में पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह को पत्र भेजकर मांग की गई है कि जब तक नए पंचायत चुनाव नहीं हो जाते, तब तक निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में मिलने वाली सुविधाएं जारी रखी जाएं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने चुनाव में देरी के कारण उन्हें प्रशासक बनाया है तो उन्हें काम के बदले मानदेय भी मिलना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम प्रधानों के लिए लागू कल्याण कोष की योजना भी जारी रहनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार यदि किसी ग्राम प्रधान की आसमयिक मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। लेकिन प्रशासक बनने के बाद इस सुविधा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। संगठन का कहना है कि इससे ग्राम प्रधानों के परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह का कहना है कि शासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई अलग दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। विभाग का कहना है कि शासन के निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्राम प्रधान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेशभर के ग्राम प्रधान आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

ग्राम प्रधानों का कहना है कि वे प्रशासक के रूप में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं, इसलिए उनके अधिकार और सुविधाएं भी सुरक्षित रहनी चाहिए। अब सभी की नजर शासन के अगले फैसले पर टिकी है कि क्या निवर्तमान ग्राम प्रधानों को दोबारा मानदेय और कल्याण कोष की सुविधा मिल पाएगी या नहीं। पंचायत चुनाव होने तक यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना रहेगा।

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