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नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में पेड़ों की अवैध कटाई, डायरेक्टर समेत पांच के खिलाफ FIR दर्ज

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: गुरुवार को पुलिस ने नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (NSI) के कैंपस में 600 से अधिक पेड़ों की कथित गैर-कानूनी कटाई और उन्हें उखाड़ने के आरोप में FIR दर्ज की। इस मामले में NSI के डायरेक्टर सीमा परोहा, प्राइवेट सिक्योरिटी कमांडर उदय प्रताप सिंह राठौर, एस्टेट ऑफिसर विनय कुमार, फार्म मैनेजर अशोक कुमार और अनवरगंज के मेसर्स तिवारी वुड मर्चेंट के अलावा कुछ अनजान लोगों के नाम शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, FIR रीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर राकेश पांडे की शिकायत पर दर्ज की गई। पांडे ने आरोप लगाया कि इंस्टीट्यूट कैंपस के गेट नंबर 5 के पास बिना ज़रूरी इजाज़त के बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई थी। शिकायत में कहा गया कि यह कटाई पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
पुलिस ने बताया कि FIR में आरोपियों के खिलाफ संबंधित भारतीय वन अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि पेड़ों की कटाई के लिए कोई वैध अनुमति ली गई थी या नहीं।
NSI डायरेक्टर सीमा परोहा पर आरोप है कि उन्होंने कैंपस में फॉरेस्ट ऑफिस से अनुमति लिए बिना कटाई की प्रक्रिया को अंजाम दिया। इसके अलावा, प्राइवेट सिक्योरिटी कमांडर और अन्य स्टाफ को कैंपस में पेड़ों की कटाई में सहयोग करने और अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि तिवारी वुड मर्चेंट का नाम इसलिए FIR में शामिल किया गया है क्योंकि उनके द्वारा कैंपस से कटे पेड़ों को ले जाने और बिक्री में मदद की गई। अभी तक पुलिस ने कुछ गवाहों और कैंपस के कर्मचारियों से पूछताछ भी शुरू कर दी है।
NSI कैंपस में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय निवासी और एनजीओ इस मामले की गहन जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से कैंपस के इकोसिस्टम पर गंभीर असर पड़ सकता है और आसपास के इलाके में ध्वनि और वायु प्रदूषण में वृद्धि हो सकती है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में जल्द ही तकनीकी टीम भेजी जाएगी, जो कैंपस में कटाई की वास्तविक स्थिति का मुआयना करेगी और पेड़ों के नुकसान की पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट आने के बाद, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस केस ने NSI के प्रशासन और उसकी पर्यावरण नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संस्थानों को अपने कैंपस में पेड़ों और हरित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कड़े उपाय करने चाहिए और किसी भी प्रकार की कटाई के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य है।
अभी तक NSI की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि कटाई किस उद्देश्य से की गई और क्या इसके पीछे किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक लाभ की आशंका थी।





