उत्तर प्रदेश

Twin भाइयों के लिए IIT कानपुर बना पहली पसंद

Ratna Netam
22 July 2026 2:43 PM IST
Twin  भाइयों के लिए IIT कानपुर बना पहली पसंद
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश : जेईई एडवांस्ड में शानदार प्रदर्शन करने वाले सोशल मीडिया पर चर्चित जुड़वा भाइयों महरुफ अहमद खान और मसरुर अहमद खान ने अपनी पसंद से सभी को चौंका दिया है। जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 32वीं रैंक हासिल करने वाले महरुफ ने आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विकल्प को छोड़कर अपने जुड़वा भाई के साथ पढ़ाई करने के लिए आईआईटी कानपुर को चुना है। दोनों भाइयों ने आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग ब्रांच में दाखिला लिया है।

महरुफ के जुड़वा भाई मसरुर ने भी जेईई एडवांस्ड में शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने ऑल इंडिया 169वीं रैंक प्राप्त की है। दोनों भाइयों की इच्छा थी कि वे आगे की पढ़ाई भी साथ-साथ करें। इसी वजह से महरुफ ने बेहतर रैंक होने के बावजूद अपने भाई के साथ रहने और पढ़ने को प्राथमिकता दी।

जुड़वा भाइयों के इस फैसले से आईआईटी कानपुर में भी खास उत्साह है। संस्थान के अनुसार, पिछले छह वर्षों में पहली बार टॉप-100 रैंक हासिल करने वाले किसी छात्र ने आईआईटी कानपुर में प्रवेश लिया है। वहीं, पिछले दस वर्षों में यह पहला मौका है जब 32वीं रैंक वाले किसी छात्र ने आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में दाखिला लिया है। साल 2015 के बाद पहली बार इतनी ऊंची रैंक वाला छात्र इस संस्थान का हिस्सा बना है।

भुवनेश्वर के रहने वाले महरुफ और मसरुर की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान है। दोनों भाइयों के पिता डॉ. मंसूर अहमद खान पेशे से चिकित्सक हैं और आईआईटी भुवनेश्वर की डिस्पेंसरी में प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, उनकी मां डॉ. जीनत बेगम स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। बेटों की तैयारी को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और करीब तीन साल तक कोटा में रहकर दोनों की पढ़ाई और तैयारी में सहयोग किया।

दोनों भाइयों ने जेईई मेन में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। उन्होंने जेईई मेन में 99.99 परसेंटाइल हासिल किए थे। इसके बाद जेईई एडवांस्ड में महरुफ ने 32वीं और मसरुर ने 169वीं रैंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा साबित की। खास बात यह है कि दोनों भाइयों के स्कूल समय के रिकॉर्ड भी काफी समान रहे हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में भी दोनों के अंक लगभग बराबर रहे।

महरुफ और मसरुर बचपन से ही साथ पढ़ते आए हैं। प्राथमिक शिक्षा से लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी तक दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया। आईआईटी में प्रवेश के समय भी दोनों की यही इच्छा थी कि वे एक ही संस्थान में पढ़ाई करें। इसी वजह से महरुफ ने आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थान के विकल्प को छोड़कर आईआईटी कानपुर का चयन किया।

मसरुर ने अपने भाई के फैसले पर खुशी जाहिर की। उनके लिए यह भावुक पल था कि दोनों भाई अब देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान में साथ पढ़ाई करेंगे।

आईआईटी कानपुर के डीन स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. प्रतीक सेन ने कहा कि संस्थान के लिए यह गर्व की बात है कि जेईई एडवांस्ड में टॉप 32वीं रैंक हासिल करने वाले छात्र ने आईआईटी कानपुर को चुना है। उन्होंने बताया कि महरुफ और मसरुर दोनों की सीट अलॉट हो चुकी है और वे साथ में संस्थान में प्रवेश लेंगे।

इस साल आईआईटी कानपुर में टॉप रैंक वाले छात्र के प्रवेश के साथ संस्थान ने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है। हालांकि, संस्थान की ओर से टॉप-100 रैंकर्स को दी जाने वाली ब्राइट माइंड्स स्कॉलरशिप को इस वर्ष बंद कर दिया गया है। इस योजना के तहत चयनित छात्रों को हर साल तीन लाख रुपये की स्कॉलरशिप दी जाती थी।

प्रो. प्रतीक सेन ने बताया कि पिछले पांच वर्षों तक संस्थान टॉप रैंकर्स के आने का इंतजार करता रहा, लेकिन कोई छात्र प्रवेश नहीं लेने के कारण इस स्कॉलरशिप को बंद करने का फैसला लिया गया। अब महरुफ और मसरुर जैसे प्रतिभाशाली छात्रों के प्रवेश से आईआईटी कानपुर में नई उम्मीद जगी है। दोनों भाइयों की कहानी मेहनत, परिवार के सहयोग और साथ निभाने की मिसाल बन गई है।

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