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वारंटी में खराब मोबाइल ठीक नहीं हुआ तो कंपनी देगी नया फोन

उत्तरप्रदेश : वारंटी अवधि के दौरान मोबाइल फोन खराब होने और बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या दूर नहीं होने पर उपभोक्ता को राहत मिल सकती है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऐसे ही एक मामले में मोबाइल कंपनी को ग्राहक को नया मोबाइल फोन देने या पुराने मोबाइल की कीमत ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है। इसके अलावा कंपनी को उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति और मुकदमे में हुए खर्च के लिए दो हजार रुपये देने होंगे।
यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहिम और सदस्य प्रकाश चन्द्र त्रिपाठी की पीठ ने पारित किया। आयोग के फैसले से यह स्पष्ट होता है कि वारंटी के दौरान उत्पाद में खराबी आने और उसे ठीक कराने के लिए बार-बार प्रयास करने के बावजूद समस्या दूर नहीं होने पर उपभोक्ता कानूनी राहत मांग सकता है।
वारंटी में खराबी दूर नहीं होने पर आयोग पहुंचा मामला
मोबाइल फोन आज दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बातचीत करने से लेकर ऑनलाइन भुगतान, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के लिए लोग मोबाइल फोन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में वारंटी अवधि के दौरान फोन खराब हो जाना और सर्विस सेंटर में बार-बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होना उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
इसी तरह के एक मामले में मोबाइल फोन की खराबी को लेकर शिकायत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग तक पहुंची। शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर आयोग ने मामले पर विचार किया और मोबाइल कंपनी की जिम्मेदारी तय करते हुए ग्राहक के पक्ष में आदेश पारित किया।
आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह उपभोक्ता को नया मोबाइल फोन उपलब्ध कराए या पुराने मोबाइल की कीमत ब्याज सहित वापस करे। इसके साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमे के खर्च का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया।
नया मोबाइल देने या कीमत लौटाने का विकल्प
आयोग के आदेश के मुताबिक, मोबाइल कंपनी को उपभोक्ता को राहत देने के लिए दो विकल्पों में से एक पर अमल करना होगा। कंपनी ग्राहक को नया मोबाइल फोन दे सकती है। दूसरा विकल्प यह है कि वह पुराने मोबाइल की कीमत ब्याज सहित वापस करे।
इस व्यवस्था के तहत उपभोक्ता को खराब मोबाइल के कारण हुई परेशानी के लिए राहत देने का निर्देश दिया गया है। वारंटी के दौरान खराबी सामने आने और सर्विस सेंटर के बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी समस्या दूर नहीं होना मामले का अहम पहलू रहा।
आयोग के इस आदेश से संबंधित उपभोक्ता को मोबाइल फोन की खराबी के मामले में राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मोबाइल का ब्रांड, मॉडल, खरीद की तारीख, फोन की मूल कीमत और ब्याज की दर का विस्तृत उल्लेख नहीं है।
मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार रुपये
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मोबाइल कंपनी पर केवल नया फोन देने या कीमत लौटाने की जिम्मेदारी ही नहीं डाली, बल्कि उपभोक्ता को मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है।
मोबाइल खराब होने के बाद उसकी मरम्मत के लिए बार-बार सर्विस सेंटर जाना और इसके बावजूद समस्या दूर नहीं होना ग्राहक के लिए असुविधाजनक स्थिति पैदा कर सकता है। आयोग ने इस मामले में मानसिक क्षतिपूर्ति की रकम भी निर्धारित की है।
इसके अलावा कंपनी को मुकदमे के खर्च के रूप में दो हजार रुपये देने होंगे। इस प्रकार मोबाइल की कीमत या नया फोन देने के साथ कंपनी पर कुल सात हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान की जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये मुकदमे का खर्च शामिल है।
आयोग की पीठ ने सुनाया फैसला
इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहिम और सदस्य प्रकाश चन्द्र त्रिपाठी की पीठ ने आदेश पारित किया। आयोग ने मोबाइल कंपनी को उपभोक्ता को राहत देने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
फैसले के अनुसार, कंपनी को नया मोबाइल फोन देना होगा या पुराने फोन की कीमत ब्याज सहित लौटानी होगी। इसके साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमे के खर्च का भुगतान भी करना होगा।
इस आदेश से उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश निकलता है, जिनके मोबाइल फोन वारंटी अवधि में खराब हो जाते हैं और सर्विस सेंटर में शिकायत करने के बावजूद समस्या दूर नहीं होती। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता अपनी शिकायत के समाधान के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकते हैं।
उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए उठा सकते हैं कदम
मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदने के बाद वारंटी अवधि में खराबी सामने आने पर उपभोक्ताओं को सबसे पहले संबंधित कंपनी या अधिकृत सर्विस सेंटर में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शिकायत से जुड़े बिल, वारंटी कार्ड, सर्विस रिकॉर्ड और मरम्मत से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना भी उपयोगी होता है।
यदि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर उपभोक्ता कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकता है। प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों, साक्ष्यों और लागू कानून के अनुसार होता है।
फिलहाल, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मोबाइल खराबी के इस मामले में कंपनी को नया फोन देने या पुरानी कीमत ब्याज सहित लौटाने के साथ पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है। यह फैसला वारंटी के दौरान खराब उत्पाद को लेकर शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है।





