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उत्तर प्रदेश
पति के किन्नर से रिश्ते का खुलासा पत्नी ने सुनाई धोखे की कहानी
Ratna Netam
11 Sept 2026 5:35 PM IST

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मुजफ्फरनगर : तीन बच्चों के पिता का एक किन्नर के साथ कथित प्रेम संबंध सामने आने के बाद पारिवारिक विवाद का मामला चर्चा में आ गया है। पत्नी का आरोप है कि पति ने उससे अपने रिश्ते की बात छिपाई और आखिरकार पत्नी तथा बच्चों को छोड़कर चला गया। पति के अचानक चले जाने से महिला के सामने तीन बच्चों की देखभाल और घर चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मामला सामने आने के बाद परिवार में भी हड़कंप मचा हुआ है।**
महिला का आरोप है कि शादी के बाद लंबे समय तक सब कुछ सामान्य चलता रहा। दोनों के तीन बच्चे हुए और परिवार अपनी जिंदगी में व्यस्त था। बाद में पति के व्यवहार में बदलाव आने लगा। वह परिवार को पहले की तरह समय नहीं देता था और अक्सर घर से बाहर रहने लगा।
शुरुआत में पत्नी को इसकी वजह समझ नहीं आई। लेकिन धीरे-धीरे शक गहराने लगा और फिर पति के एक किन्नर के साथ कथित संबंध की जानकारी सामने आई। पत्नी का दावा है कि इस बारे में सवाल करने पर पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा।
हालांकि मामले में पति और संबंधित किन्नर का पक्ष सामने आए बिना महिला के आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
तीन बच्चों के बाद रिश्ते में आया मोड़
महिला के मुताबिक शादी के बाद उनका पारिवारिक जीवन सामान्य था। पति घर की जिम्मेदारियां संभालता था और बच्चों की देखभाल में भी साथ देता था।
समय बीतने के साथ तीन बच्चे हुए। परिवार बढ़ने के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ीं।
लेकिन इसी दौरान पति के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। महिला का दावा है कि पति उससे दूरी बनाने लगा और घर से बाहर ज्यादा समय बिताने लगा।
फोन पर बातचीत और घर से लगातार बाहर रहने जैसी बातों के कारण पत्नी को संदेह हुआ।
महिला का कहना है कि जब उसने पति से इसका कारण जानने की कोशिश की तो उसे स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
किन्नर से रिश्ते का पता चला तो मचा हड़कंप
पत्नी के अनुसार बाद में उसे जानकारी मिली कि पति कथित तौर पर एक किन्नर के संपर्क में है।
शुरुआत में उसने इसे सामान्य जान-पहचान माना, लेकिन बाद में उसे दोनों के बीच नजदीकी होने का संदेह हुआ।
इसके बाद पति-पत्नी के बीच तनाव और बढ़ गया।
महिला का आरोप है कि पति ने लंबे समय तक उससे सच्चाई छिपाई। जब उसने सीधे सवाल पूछे तो घर में विवाद होने लगा।
पत्नी का कहना है कि उसने पति को परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों का हवाला देकर समझाने की कोशिश भी की, लेकिन परिस्थितियां नहीं बदलीं।
पत्नी का आरोप- हमें छोड़कर चला गया
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि व्यक्ति पत्नी और तीन बच्चों को छोड़कर घर से चला गया।
महिला के मुताबिक पति के चले जाने के बाद उसे बच्चों की पूरी जिम्मेदारी अकेले संभालनी पड़ रही है।
बच्चों की पढ़ाई, भोजन, कपड़े और रोजमर्रा के खर्च को लेकर महिला चिंतित है।
उसका कहना है कि वैवाहिक विवाद पति-पत्नी के बीच हो सकता है, लेकिन बच्चों की जिम्मेदारी से कोई माता-पिता केवल घर छोड़कर मुक्त नहीं हो सकता।
इसी कारण महिला अब अपने और बच्चों के अधिकारों को लेकर मदद मांग रही है।
बच्चों की जिंदगी पर सबसे बड़ा असर
पति-पत्नी के बीच विवाद का सबसे ज्यादा असर अक्सर बच्चों पर पड़ता है।
इस मामले में भी तीन बच्चे अचानक बदली पारिवारिक परिस्थितियों के बीच आ गए हैं।
अगर पिता लंबे समय तक परिवार से अलग रहता है और आर्थिक मदद भी नहीं करता तो बच्चों की शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा माता-पिता के बीच लगातार विवाद बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में परिवार के वयस्क सदस्यों की जिम्मेदारी होती है कि बच्चों को विवाद का हिस्सा न बनाया जाए और उनकी सुरक्षा तथा जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।
रिश्ते से ज्यादा जिम्मेदारी का सवाल
इस मामले में किसी व्यक्ति का किन्नर के साथ सहमति से संबंध होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी वयस्क व्यक्ति की लैंगिक पहचान या किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ संबंध को अपराध या अपमानजनक बात के रूप में पेश करना भी उचित नहीं है।
मामले का महत्वपूर्ण पहलू पति-पत्नी के बीच कथित धोखा, वैवाहिक जिम्मेदारियां और बच्चों के भरण-पोषण का है।
अगर कोई विवाहित व्यक्ति विवाह से बाहर संबंध बनाता है तो उससे वैवाहिक विवाद पैदा हो सकता है और परिस्थितियों के आधार पर यह तलाक जैसे सिविल मामलों में प्रासंगिक हो सकता है।
भारत में सहमति से बने विवाहेतर यौन संबंध को केवल इसी आधार पर आपराधिक अपराध नहीं माना जाता, लेकिन विवाह टूटने की स्थिति में इसके कानूनी परिणाम अलग हो सकते हैं।
क्या बच्चों की जिम्मेदारी से बच सकता है पिता?
केवल पत्नी से अलग रहने या वैवाहिक रिश्ता खराब होने से बच्चों के प्रति माता-पिता की जिम्मेदारियां अपने आप समाप्त नहीं हो जातीं।
अगर बच्चे आर्थिक रूप से निर्भर हैं तो उनकी देखभाल और भरण-पोषण से जुड़े अधिकार बने रह सकते हैं।
पत्नी परिस्थितियों के अनुसार अपने और बच्चों के लिए भरण-पोषण की मांग करने के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकती है।
किस कानून के तहत और कितनी सहायता मिल सकती है, यह विवाह की प्रकृति, आय, बच्चों की उम्र और मामले की दूसरी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
इसलिए ऐसे मामले में स्थानीय वकील या विधिक सेवा प्राधिकरण से कानूनी सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
पत्नी के पास क्या विकल्प?
अगर महिला का आरोप है कि पति उसे और बच्चों को छोड़कर चला गया है और आर्थिक मदद नहीं दे रहा, तो वह कानूनी सहायता ले सकती है।
महिला अपने जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से भी संपर्क कर सकती है, जहां पात्र लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
अगर घरेलू हिंसा, धमकी, आर्थिक उत्पीड़न या किसी अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप है तो परिस्थितियों के अनुसार अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
वहीं केवल पति के किसी अन्य वयस्क के साथ संबंध होने के आधार पर पुलिस कार्रवाई की मांग और बच्चों के भरण-पोषण का मामला दो अलग कानूनी विषय हैं।
परिवार ने समझाने की कोशिश की?
ऐसे मामलों में अक्सर दोनों पक्षों के परिवार भी विवाद सुलझाने के लिए सामने आते हैं।
अगर दोनों पति-पत्नी बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं तो पारिवारिक मध्यस्थता का रास्ता अपनाया जा सकता है।
मध्यस्थता में यह तय करने की कोशिश की जा सकती है कि दोनों साथ रहना चाहते हैं या अलग होना चाहते हैं और बच्चों की देखभाल किस तरह होगी।
लेकिन किसी व्यक्ति को जबरन किसी रिश्ते में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अगर विवाह जारी रखना संभव नहीं है तो भी बच्चों की आर्थिक और भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर किन्नर समुदाय को निशाना बनाना गलत
इस तरह के मामले सोशल मीडिया पर आने के बाद अक्सर संबंधित किन्नर या पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां शुरू हो जाती हैं।
यह सही नहीं है।
अगर किसी विवाहित व्यक्ति ने अपने जीवनसाथी से कोई बात छिपाई या परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभाई तो जवाबदेही उस व्यक्ति के व्यवहार के आधार पर तय होनी चाहिए।
किसी तीसरे व्यक्ति की लैंगिक पहचान को विवाद का कारण मानना या पूरे समुदाय को दोषी ठहराना अनुचित है।
मामले में अगर कोई धोखा या अन्य गलत व्यवहार हुआ है तो उसकी जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
पति का पक्ष भी महत्वपूर्ण
अभी कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पत्नी ने जो आरोप लगाए हैं, उन पर पति का क्या कहना है? क्या वह वास्तव में परिवार छोड़कर गया है? क्या वह बच्चों के खर्च के लिए पैसे दे रहा है? संबंधित किन्नर के साथ उसके संबंध की वास्तविक प्रकृति क्या है?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
एक पक्ष के आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं है।
अगर मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचता है तो दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
आर्थिक संकट महिला के लिए बड़ी चुनौती
तीन बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उठाना आसान नहीं है।
अगर महिला की अपनी नियमित आय नहीं है तो पति के घर छोड़ने के बाद परिवार गंभीर आर्थिक परेशानी में पड़ सकता है।
स्कूल फीस से लेकर राशन, किराया, इलाज और दूसरे रोजमर्रा के खर्च लगातार चलते रहते हैं।
इसी वजह से भारतीय कानून में आश्रित बच्चों के भरण-पोषण को महत्वपूर्ण माना गया है।
अगर पिता पर्याप्त आय होने के बावजूद बच्चों की जिम्मेदारी से पीछे हटता है तो महिला अदालत के जरिए उचित राहत मांग सकती है।
रिश्ते टूटें लेकिन बच्चों के अधिकार नहीं
पति-पत्नी के बीच संबंध चाहे जिस वजह से खराब हुए हों, बच्चों को उसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
माता-पिता अलग होने का फैसला कर सकते हैं, लेकिन इससे बच्चों की जरूरतें खत्म नहीं होतीं।
अगर दोनों पक्ष अलग रहने का फैसला करते हैं तो बच्चों की कस्टडी, मुलाकात, शिक्षा और आर्थिक सहायता जैसे विषयों पर स्पष्ट व्यवस्था बनाना जरूरी होता है।
विवाद जितना लंबा चलता है, बच्चों पर उसका प्रभाव उतना बढ़ सकता है।
इसलिए कानूनी प्रक्रिया के साथ संभव होने पर शांतिपूर्ण मध्यस्थता भी उपयोगी रास्ता हो सकती है।
अब मामले में आगे क्या?
महिला की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित रहता है या कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता है।
अगर महिला भरण-पोषण या अन्य वैवाहिक राहत के लिए अदालत जाती है तो पति को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
वहीं अगर किसी तरह की हिंसा, धमकी या दूसरे अपराध का आरोप लगाया जाता है तो उसकी अलग जांच हो सकती है।
फिलहाल इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू तीन बच्चों का भविष्य है।
पति-पत्नी के बीच संबंधों में चाहे जितना विवाद हो, बच्चों की देखभाल और आर्थिक सुरक्षा दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
इस पूरे घटनाक्रम को किसी किन्नर व्यक्ति की पहचान के कारण सनसनीखेज बनाने के बजाय **कथित वैवाहिक धोखे, परिवार छोड़ने और तीन बच्चों की जिम्मेदारी** के नजरिए से देखना ज्यादा उचित होगा।
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