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हापुड़ में अवैध प्लाटिंग पर HPDA का बड़ा एक्शन, 50 हजार वर्गमीटर जमीन पर चला बुलडोजर

हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने शहर और आसपास के सात प्रमुख स्थानों पर अभियान चलाकर करीब 50 हजार वर्गमीटर जमीन पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कॉलोनियों के लिए बनाई गई सड़कों, प्लॉट की नींव और अन्य अनधिकृत निर्माण को हटाया गया। एक ही दिन में इतने बड़े क्षेत्र में हुई कार्रवाई से अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों में खलबली मच गई। प्राधिकरण ने स्वर्ग आश्रम रोड पर फायर स्टेशन के सामने करीब 15 हजार वर्गमीटर में की जा रही अवैध प्लाटिंग पर भी बुलडोजर चलाया। इस प्लाटिंग से कपिल त्यागी, अरविंद सिंह और सूरज सिंह के नाम जुड़े बताए गए हैं।
सात स्थानों पर चला ध्वस्तीकरण अभियान
हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण ने अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ एक साथ सात स्थानों पर कार्रवाई की।
प्रवर्तन टीम ने संबंधित स्थानों पर पहुंचकर निर्माण और प्लाटिंग की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद बुलडोजर की मदद से अवैध विकास कार्यों को ध्वस्त किया गया।
कार्रवाई के दौरान प्लॉट तैयार करने के लिए बनाई गई नींव, आंतरिक सड़कें और अन्य निर्माण हटाए गए।
प्राधिकरण का उद्देश्य बिना अनुमति विकसित की जा रही आवासीय कॉलोनियों पर रोक लगाना है।
इस अभियान में लगभग 50 हजार वर्गमीटर क्षेत्र की अवैध प्लाटिंग को कार्रवाई के दायरे में लिया गया।
स्वर्ग आश्रम रोड पर सबसे बड़ी कार्रवाई
अभियान के दौरान स्वर्ग आश्रम रोड स्थित फायर स्टेशन के सामने बड़ी कार्रवाई की गई।
प्राधिकरण के अनुसार, यहां कपिल त्यागी, अरविंद सिंह और सूरज सिंह द्वारा करीब 15 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की जा रही थी।
प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर विकसित की जा रही कॉलोनी के निर्माण को ध्वस्त किया।
यह क्षेत्र अभियान में शामिल प्रमुख स्थानों में से एक रहा।
कार्रवाई के तहत प्लॉट की नींव और सड़क संबंधी निर्माण हटाए गए।
हालांकि, इस स्थान पर कुल कितने भूखंड विकसित किए जा रहे थे और उनमें से कितने की बिक्री हो चुकी थी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों में खलबली
एक ही दिन में सात स्थानों पर हुई कार्रवाई से अवैध प्लाटिंग का कारोबार करने वालों के बीच हलचल बढ़ गई।
प्राधिकरण की टीम ने बड़े क्षेत्र में फैले अनधिकृत निर्माण को हटाकर नियमों के उल्लंघन पर सख्ती दिखाई।
अवैध प्लाटिंग में जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर कॉलोनी विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
लेकिन किसी भूमि का स्वामित्व होना उस पर आवासीय कॉलोनी विकसित करने की स्वीकृति होने के बराबर नहीं है।
कॉलोनी विकसित करने के लिए संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना जरूरी होता है।
अवैध प्लाटिंग में सड़क और नींव भी ध्वस्त
प्राधिकरण की कार्रवाई में केवल जमीन पर की गई निशानदेही नहीं हटाई गई, बल्कि कॉलोनी विकसित करने के लिए किए गए निर्माण कार्यों को भी ध्वस्त किया गया।
इसमें प्लॉटों की नींव, सड़क और अन्य अनधिकृत निर्माण शामिल रहे।
कॉलोनाइजर अक्सर जमीन को छोटे भूखंडों में बांटकर वहां सड़क और अन्य सुविधाओं का निर्माण शुरू कर देते हैं।
इन सुविधाओं को देखकर खरीदार यह मान सकते हैं कि कॉलोनी विकसित करने के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं।
लेकिन प्राधिकरण से स्वीकृति प्राप्त किए बिना किए गए ऐसे निर्माण नियमों के उल्लंघन के दायरे में आ सकते हैं।
भूखंड खरीदने वालों को भी सावधान रहने की जरूरत
हापुड़ में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ हुई कार्रवाई ने जमीन खरीदने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
किसी कॉलोनी में भूखंड खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति जानना जरूरी है।
खरीदारों को संबंधित जमीन का भू-उपयोग, स्वीकृत लेआउट और आवश्यक निर्माण अनुमतियों की जांच करनी चाहिए।
बिना स्वीकृति वाली कॉलोनी में भूखंड खरीदने से भविष्य में मकान का नक्शा पास कराने और बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।
एचपीडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर अनधिकृत कॉलोनियों और निर्माण से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
नियोजित विकास के लिए जरूरी है स्वीकृति
हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी अपने अधिसूचित क्षेत्र में नियोजित विकास सुनिश्चित करना है।
इसके अंतर्गत आवासीय, व्यावसायिक और अन्य निर्माण गतिविधियों को निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित किया जाता है।
कॉलोनी विकसित करने के लिए भूमि के निर्धारित उपयोग और लेआउट संबंधी नियमों का पालन आवश्यक है।
बिना स्वीकृति प्लाटिंग होने से भविष्य में सड़क, जलनिकासी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण विकास प्राधिकरण अनधिकृत कॉलोनियों और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करता है।
पहले भी चल चुका है बुलडोजर
हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण इससे पहले भी अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान चला चुका है।
सितंबर 2026 में प्राधिकरण ने पिलखुवा विकास क्षेत्र के पांच स्थानों पर लगभग 35,800 वर्गमीटर जमीन पर अवैध प्लाटिंग ध्वस्त की थी।
उस कार्रवाई में पुलिस बल का भी सहयोग लिया गया था।
इसके अलावा अगस्त 2026 में तीन स्थानों पर 28 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग हटाने की कार्रवाई हुई थी।
इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि प्राधिकरण विभिन्न क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अभियान चला रहा है।
सात स्थानों पर कार्रवाई से बड़ा संदेश
इस बार करीब 50 हजार वर्गमीटर जमीन पर हुई कार्रवाई को बड़े पैमाने पर चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
एक ही दिन में सात स्थानों पर कार्रवाई किए जाने से प्राधिकरण ने अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध सख्ती दिखाई है।
हालांकि, सातों स्थानों के अलग-अलग क्षेत्रफल और विकासकर्ताओं के नामों का पूरा आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
स्वर्ग आश्रम रोड पर 15 हजार वर्गमीटर की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है, जबकि शेष छह स्थानों के संबंध में विस्तृत विवरण की पुष्टि होना बाकी है।
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ आगे भी कार्रवाई संभव
हापुड़ और पिलखुवा क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री तथा आवासीय विकास से संबंधित गतिविधियों के बीच अनधिकृत कॉलोनियों को रोकना प्राधिकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
बिना स्वीकृति प्लाटिंग विकसित करने से न केवल नियोजन संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं, बल्कि भूखंड खरीदने वाले नागरिकों को भी आर्थिक जोखिम उठाना पड़ सकता है।
ऐसे मामलों में प्राधिकरण की कार्रवाई के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
खरीदारों को जमीन में निवेश करने से पहले संबंधित दस्तावेजों और स्वीकृतियों का सत्यापन करना चाहिए।
हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण की इस कार्रवाई में करीब 50 हजार वर्गमीटर जमीन पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। सात स्थानों पर चले अभियान में सड़क, प्लॉट की नींव और अन्य निर्माण हटाए गए। स्वर्ग आश्रम रोड पर करीब 15 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में हुई कार्रवाई इस अभियान का प्रमुख हिस्सा रही।





