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उत्तर प्रदेश
साइबर फ्रॉड के मामले में पकड़ा गया शातिर फिर कैसे छूटा
Ratna Netam
18 Sept 2026 2:31 PM IST

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कानपुर : देश के बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल 5600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के बीच एक आरोपी के महज छह घंटे में बाहर आने की खबर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद पकड़े गए इस आरोपी को लेकर अब यह भी सामने आ रहा है कि वह पहले भी कई मामलों में जांच के दायरे में आ चुका था, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से बच निकलने में कामयाब रहा।साइबर अपराध के इस बड़े नेटवर्क की जांच में एजेंसियां लगातार संदिग्धों की भूमिका खंगाल रही हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी की गतिविधियां लंबे समय से संदिग्ध थीं और उसके संपर्क कई लोगों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जांच टीम अब उसके पुराने रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है।
5600 करोड़ के नेटवर्क की जांच में आया नाम
जांच एजेंसियों को इस मामले में बड़ी रकम के लेनदेन और ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़े कई सुराग मिले हैं। साइबर अपराधियों द्वारा अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाने, फर्जी खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिए रकम के ट्रांसफर की जांच की जा रही है।ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर कई स्तरों पर नेटवर्क बनाकर काम करते हैं। इसमें फर्जी पहचान, बैंक खातों का इस्तेमाल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल वॉलेट जैसी सुविधाओं का दुरुपयोग किया जाता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी की भूमिका केवल लेनदेन तक सीमित थी या वह पूरे नेटवर्क का हिस्सा था।
गिरफ्तारी के बाद छह घंटे में रिहाई
मामले में आरोपी को हिरासत में लिए जाने के बाद उम्मीद थी कि उससे पूछताछ के जरिए कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसके बाहर आने से जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।हालांकि किसी भी आरोपी की रिहाई कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होती है। जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई के लिए नए सबूत जुटाने में लगी हुई हैं।
पहले भी जांच के घेरे में आ चुका था आरोपी
जांच से जुड़े लोगों के मुताबिक, आरोपी पहले भी कुछ मामलों में सामने आ चुका था। इसके बावजूद वह लंबे समय तक कार्रवाई से बचता रहा। अब एजेंसियां उसके पुराने मामलों, संपर्कों और गतिविधियों को दोबारा खंगाल रही हैं।जांच टीम यह पता कर रही है कि क्या आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर या अलग-अलग तरीकों से जांच से बचने की कोशिश की थी। इसके अलावा उसके बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
साइबर अपराध का बढ़ता खतरा
पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ठग नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। फर्जी निवेश योजनाएं, डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन लोन फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे मामलों में बड़ी रकम की ठगी सामने आई है।5600 करोड़ रुपये जैसे बड़े मामले यह दिखाते हैं कि साइबर अपराध अब छोटे स्तर की ठगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठित नेटवर्क के रूप में भी सामने आ रहा है।
जांच एजेंसियां जुटा रहीं डिजिटल सबूत
इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल सबूतों को जुटाना और उनका विश्लेषण करना है। मोबाइल रिकॉर्ड, ईमेल, बैंक ट्रांजेक्शन, आईपी एड्रेस और ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और रकम किन-किन रास्तों से आगे भेजी गई। इसके लिए संदिग्ध खातों और लेनदेन की जांच की जा रही है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल 5600 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में जांच जारी है। आरोपी के छह घंटे में बाहर आने के बाद अब एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस पूरे नेटवर्क में आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी और उसके खिलाफ आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।साइबर अपराध से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने की चुनौती को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।
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