उत्तर प्रदेश

STF के जांबाजों को सम्मान, इंस्पेक्टर सुनील कुमार और दारोगा मुन्नेश सिंह की बहादुरी को मिला सम्मान

Kavita2
2 Oct 2026 4:27 PM IST
STF के जांबाजों को सम्मान, इंस्पेक्टर सुनील कुमार और दारोगा मुन्नेश सिंह की बहादुरी को मिला सम्मान
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लखनऊ। कर्तव्य के दौरान अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय देने वाले एसटीएफ के इंस्पेक्टर सुनील कुमार और दारोगा मुन्नेश सिंह को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। दोनों पुलिसकर्मियों ने मुठभेड़ के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभालते हुए साहस का परिचय दिया था। दारोगा मुन्नेश सिंह को राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया, जबकि बलिदानी इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने उनके परिजनों को स्मृति चिन्ह और 51 हजार रुपये का चेक प्रदान किया।

सम्मान समारोह के दौरान पुलिसकर्मियों की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को याद किया गया। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस बल के जवान विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार कार्य करते हैं। सुनील कुमार और मुन्नेश सिंह की वीरता इसी कर्तव्य भावना का उदाहरण है।

तीन गोलियां लगने के बावजूद नहीं छोड़ा मोर्चा

20 जनवरी 2025 को हुई मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ की टीम का सामना मुकीम काला गैंग से जुड़े बदमाशों से हुआ था। मुठभेड़ में इंस्पेक्टर सुनील कुमार को शरीर में तीन गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और टीम का नेतृत्व करते रहे।

घायल अवस्था में भी सुनील कुमार के नेतृत्व में एसटीएफ की कार्रवाई जारी रही। पुलिस टीम ने मुठभेड़ में मुकीम काला गैंग के एक लाख रुपये के इनामी बदमाश अरशद समेत चार बदमाशों को मार गिराया। इस कार्रवाई में टीम के सामने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां थीं, लेकिन सुनील कुमार ने अपनी स्थिति की परवाह किए बिना साथियों का नेतृत्व किया।

मुठभेड़ के दौरान उनका साहस और नेतृत्व टीम के लिए महत्वपूर्ण रहा। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी मोर्चे पर डटे रहना उनके कर्तव्य के प्रति समर्पण को दर्शाता है। इसी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

बलिदानी इंस्पेक्टर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र

इंस्पेक्टर सुनील कुमार के बलिदान को देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कारों में शामिल कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उनके परिजनों को स्मृति चिन्ह और 51 हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया।

समारोह में सुनील कुमार की वीरता को याद करते हुए उनके कर्तव्य के प्रति समर्पण को नमन किया गया। परिवार के लिए यह सम्मान जहां गौरव का विषय है, वहीं अपने प्रियजन को खोने का दर्द भी इससे जुड़ा हुआ है। पुलिस विभाग की ओर से भी उनके बलिदान को याद करते हुए कहा गया कि देश और समाज की सुरक्षा के लिए दिया गया उनका योगदान हमेशा स्मरण किया जाएगा।

दारोगा मुन्नेश सिंह को राष्ट्रपति वीरता पदक

इसी कार्रवाई में साहस और बहादुरी का परिचय देने वाले दारोगा मुन्नेश सिंह को राष्ट्रपति वीरता पदक प्रदान किया गया। उन्होंने भी मुठभेड़ के दौरान अपनी जिम्मेदारी को पूरी दृढ़ता के साथ निभाया। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।

मुन्नेश सिंह और सुनील कुमार की भूमिका उस कार्रवाई में महत्वपूर्ण रही, जिसमें पुलिस टीम ने इनामी बदमाशों के खिलाफ अभियान चलाया था। मुठभेड़ के दौरान पुलिसकर्मियों को अपनी जान का खतरा होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाले रखा और अभियान को अंजाम तक पहुंचाया।

पुलिस बल के लिए प्रेरणा

एसटीएफ के दोनों पुलिसकर्मियों को मिले वीरता सम्मान को पुलिस बल के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। पुलिस की नौकरी में कई बार जवानों और अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहां कुछ ही क्षणों में निर्णय लेना पड़ता है। ऐसे समय में साहस, नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सुनील कुमार और मुन्नेश सिंह की बहादुरी ने यह साबित किया कि विपरीत परिस्थितियों में भी पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते। तीन गोलियां लगने के बाद भी सुनील कुमार का मोर्चे पर डटे रहना और टीम का नेतृत्व करना उनकी असाधारण बहादुरी का उदाहरण बना।

परिवार और विभाग के लिए गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री द्वारा दोनों पुलिसकर्मियों को सम्मानित किए जाने के दौरान उनके परिवारों और विभागीय अधिकारियों के लिए यह भावनात्मक और गौरवपूर्ण अवसर रहा। बलिदानी इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र मिलना उनके बलिदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है। वहीं दारोगा मुन्नेश सिंह को राष्ट्रपति वीरता पदक मिलना उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान है।

20 जनवरी 2025 की मुठभेड़ में एक लाख रुपये के इनामी अरशद समेत चार बदमाशों के मारे जाने के बाद यह कार्रवाई पुलिस और एसटीएफ के लिए महत्वपूर्ण मानी गई थी। कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों ने जिस साहस का परिचय दिया, उसी के लिए अब उन्हें वीरता सम्मान से नवाजा गया है।

सम्मान समारोह में इन जांबाज पुलिसकर्मियों की वीरता को याद करते हुए यह संदेश भी सामने आया कि वर्दी पहनने वाले जवानों का कर्तव्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में समाज की सुरक्षा के लिए आगे खड़ा होना भी है। इंस्पेक्टर सुनील कुमार का बलिदान और दारोगा मुन्नेश सिंह का साहस पुलिस बल के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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