उत्तर प्रदेश

युवकों को जाल में फंसाकर करते थे वसूली, मेरठ में हनीट्रैप गैंग का खुलासा

Ratna Netam
2 Aug 2026 4:40 PM IST
युवकों को जाल में फंसाकर करते थे वसूली, मेरठ में हनीट्रैप गैंग का खुलासा
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मेरठ : पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सोशल मीडिया के जरिए युवकों को अपने जाल में फंसाकर उनसे अवैध वसूली करता था। थाना ब्रह्मपुरी पुलिस ने हनीट्रैप गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी पुलिस कार्यालय में बुलाते थे और फिर मुकदमा दर्ज करने, जेल भेजने और एनकाउंटर करने की धमकी देकर मोटी रकम ऐंठते थे। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह ने बाकायदा पुलिस चौकी जैसा सेटअप तैयार कर रखा था, जहां फर्जी दस्तावेज और पुलिस से जुड़े सामान रखे जाते थे।

मामले का खुलासा तब हुआ जब रिठानी निवासी नीरज पाल ने ब्रह्मपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि शशांक शर्मा, राहुल, आकाश और उनके दो अन्य साथियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उससे दो लाख रुपये की मांग की। आरोपियों ने डर और दबाव बनाकर उससे 10 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर भी करा लिए थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और जल्द ही गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राहुल पाल (25) निवासी रिठानी और आकाश (20) निवासी पुट्ठा, थाना टीपीनगर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी गिरोह के सक्रिय सदस्य थे और फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाने का काम करते थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से कई ऐसे सामान मिले हैं, जिनसे यह साफ होता है कि उन्होंने फर्जी पुलिस कार्यालय तैयार किया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बिना नंबर प्लेट की कार, अतिरिक्त नंबर प्लेट, मोबाइल फोन, टेलीफोन, लैपटॉप, टैबलेट, कैलकुलेटर, फोन-पे रिसीवर बॉक्स, वॉकी-टॉकी सेट, पुलिस अधिकारियों के नाम की मोहरें और नेम प्लेट बरामद की हैं। इसके अलावा कई फर्जी प्रार्थना पत्र, फाइलें, क्राइम रजिस्टर, एफआईआर रजिस्टर और अन्य दस्तावेज भी मिले हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देता था। गिरोह के सदस्य इंस्टाग्राम समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी आईडी बनाते थे। कई बार वे खुद लड़की बनकर युवकों से दोस्ती करते थे। बातचीत बढ़ने के बाद युवकों को अश्लील चैट या वीडियो कॉल के जरिए फंसाया जाता था। इसके बाद उन्हें मिलने के बहाने मोहकमपुर स्थित फर्जी पुलिस कार्यालय में बुलाया जाता था।

फर्जी कार्यालय में आरोपी खुद को सीओ, दरोगा और सिपाही बताकर युवकों पर दबाव बनाते थे। वहां मौजूद क्राइम रजिस्टर, एफआईआर रजिस्टर और पुलिस अधिकारियों के नाम वाली नेम प्लेट देखकर पीड़ितों को लगता था कि वे किसी असली पुलिस कार्रवाई में फंस गए हैं। इसके बाद आरोपी गंभीर मुकदमे में फंसाने, जेल भेजने और एनकाउंटर करने की धमकी देकर उनसे पैसे वसूलते थे।

पुलिस का कहना है कि इस गिरोह की कई और वारदातों में संलिप्तता की जांच की जा रही है। अधिकारियों को शक है कि गिरोह ने सोशल मीडिया के जरिए कई युवकों को अपना शिकार बनाया हो सकता है। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

एसपी सिटी विनायक भोसले ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया कि यह मामला किसी वास्तविक पुलिस चौकी का नहीं बल्कि हनीट्रैप और फर्जीवाड़े से जुड़ा संगठित अपराध है।

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