उत्तर प्रदेश

महंगाई की मार: अरहर, उड़द और राजमा 10 रुपये तक महंगे, बिगड़ा रसोई का बजट

Kavita2
14 Sept 2026 12:35 PM IST
महंगाई की मार: अरहर, उड़द और राजमा 10 रुपये तक महंगे, बिगड़ा रसोई का बजट
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बरेली। महंगाई के दबाव से जूझ रहे परिवारों को अब दालों की बढ़ती कीमतों ने भी परेशान करना शुरू कर दिया है। बीते तीन महीनों के दौरान अरहर, मसूर, उड़द, राजमा और चना दाल के खुदरा भाव में पांच से दस रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों के दाम में आई इस तेजी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक राशन और रसोई के बजट पर पड़ रहा है। हालांकि किराना कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में हुई बढ़ोतरी बहुत अधिक नहीं है और इसके पीछे मुख्य कारण बाजार में मांग तथा आपूर्ति के बीच पैदा हुआ अंतर है।

स्थानीय बाजार में तीन महीने पहले अरहर दाल 110 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही थी। अब इसका खुदरा भाव बढ़कर 120 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इस प्रकार अरहर दाल की कीमत में तीन महीनों के भीतर लगभग 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। भारतीय परिवारों में अरहर दाल की खपत बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में इसके दाम बढ़ने से सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

मसूर दाल के भाव में भी तेजी दर्ज की गई है। तीन महीने पहले बाजार में मसूर दाल की कीमत लगभग 120 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 125 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। मसूर की कीमत में पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। खुदरा व्यापारियों के अनुसार मसूर दाल की मांग लगातार बनी हुई है। इसकी तुलना में बाजार में आवक में होने वाले बदलाव का असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

उड़द दाल की कीमत भी तीन महीने में 10 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गई है। पहले उड़द 110 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, जबकि अब इसकी कीमत 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। उड़द का इस्तेमाल दाल के साथ-साथ पापड़, बड़ियां, दही-बड़े और दक्षिण भारतीय व्यंजनों में भी बड़ी मात्रा में किया जाता है। इसलिए उड़द के दाम में वृद्धि का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। छोटे होटल, ढाबे, नाश्ते की दुकान चलाने वाले और खाद्य सामग्री तैयार करने वाले कारोबारियों की लागत भी इससे बढ़ सकती है।

राजमा की कीमत में भी 10 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई है। तीन माह पहले 120 रुपये प्रति किलो बिकने वाला राजमा अब 130 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। वहीं चना दाल के भाव में पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। चना दाल पहले 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रही थी, लेकिन अब इसका मूल्य बढ़कर 85 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है।

दालों के भाव में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब परिवार पहले से ही खाद्य तेल, सब्जियों, दूध, मसालों और दैनिक जरूरत की दूसरी वस्तुओं पर अधिक खर्च कर रहे हैं। दाल भारतीय भोजन में प्रोटीन का एक प्रमुख और अपेक्षाकृत सुलभ स्रोत मानी जाती है। विशेष रूप से शाकाहारी परिवारों में दालों का नियमित इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमतें बढ़ने से उपभोक्ताओं के पास या तो अतिरिक्त खर्च करने या खपत में कटौती करने का विकल्प रह जाता है।

छोटे परिवारों पर पांच या दस रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि का प्रभाव सीमित दिखाई दे सकता है, लेकिन महीनेभर में अलग-अलग प्रकार की दाल खरीदने वाले बड़े और संयुक्त परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। सीमित आय वाले परिवार अपनी जरूरत के अनुसार दालों की मात्रा कम करने या अपेक्षाकृत सस्ती दालों को प्राथमिकता देने लगे हैं। कुछ उपभोक्ता थोक में दाल खरीदकर खर्च नियंत्रित करने की कोशिश भी कर रहे हैं।

मारवाड़ीगंज के दाल व्यापारी कैलाश मित्तल ने बताया कि दालों की कीमतों में बहुत अधिक तेजी नहीं आई है। बाजार में मांग और आवक के बीच अंतर होने के कारण कुछ दालों के भाव में मामूली बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक दालों की मांग पर्याप्त बनी हुई है। मंडियों में आवक कम या अनियमित होने पर थोक भाव बढ़ते हैं, जिसका असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार की कीमतों पर दिखाई देता है।

कारोबारियों का कहना है कि विभिन्न मंडियों से होने वाली आपूर्ति, परिवहन खर्च, उपलब्ध भंडार और उपभोक्ताओं की मांग के आधार पर दालों की कीमतें तय होती हैं। यदि आने वाले दिनों में मंडियों से आवक बढ़ती है और आपूर्ति सामान्य रहती है तो भाव स्थिर हो सकते हैं। इसके उलट मांग के मुकाबले आवक कम रहने पर कुछ किस्मों की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

दालों की कीमतों की तुलना करें तो अरहर, उड़द और राजमा में सबसे अधिक 10-10 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है। मसूर और चना दाल के भाव पांच-पांच रुपये प्रति किलो बढ़े हैं। व्यापारियों ने फिलहाल किसी बड़ी या असामान्य तेजी की आशंका नहीं जताई है, लेकिन बाजार की स्थिति को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

उपभोक्ताओं की नजर अब आगामी दिनों में मंडियों की आवक और खुदरा कीमतों पर रहेगी। त्योहारों और मांग बढ़ने की अवधि में आपूर्ति प्रभावित होने पर भाव में बदलाव संभव है। फिलहाल दालों की बढ़ी कीमतों ने महंगाई से परेशान परिवारों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। बाजार में यदि आपूर्ति नियमित नहीं हुई तो रसोई के बजट पर दालों का बोझ कुछ समय तक बना रह सकता है।

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