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उत्तर प्रदेश
बड़ागांव में ऐतिहासिक भरत मिलाप मेला, रातभर चला आयोजन
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 8:06 PM IST

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के बड़ागांव में बुधवार की रात परंपरागत और अति प्राचीन भरत मिलाप एवं मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन की झलक पाने के लिए पूरी रात हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। मेले में आकर्षक झांकियां, लाग-विमान और धार्मिक प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। गुरुवार की भोर करीब चार बजे जब मध्य बाजार में चारों भाइयों का मिलन हुआ, तो इस भावुक दृश्य को देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
भरत मिलाप के आयोजन ने बड़ागांव को पूरी रात भक्तिमय माहौल में डुबोए रखा। श्रद्धालु देर रात तक भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। आयोजन के दौरान रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब श्रीराम और भरत के मिलन का दृश्य सामने आया।
पूरी रात श्रद्धालुओं से गुलजार रहा बड़ागांव
बड़ागांव का प्राचीन भरत मिलाप मेला स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोजन के दौरान आसपास के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे।रात बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। मुख्य बाजार और आयोजन स्थल पर चारों ओर भक्तों का जमावड़ा दिखाई दिया।लोग अपने परिवार के सदस्यों और बच्चों के साथ मेले का आनंद लेते नजर आए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भरत मिलाप के प्रमुख दृश्य को देखने के लिए देर रात तक इंतजार करते रहे।आयोजन स्थल पर धार्मिक जयकारों और भक्ति के वातावरण ने लोगों का उत्साह बढ़ा दिया।
प्रयागराज से आईं आकर्षक झांकियां
इस वर्ष भरत मिलाप मेले में प्रयागराज से आईं आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।इन झांकियों में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रसंगों को कलात्मक रूप से प्रदर्शित किया गया।मेले में एक से बढ़कर एक लाग-विमान भी देखने को मिले। इन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।सजावटी आकृतियों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने लोगों को प्रभावित किया।विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में झांकियों को लेकर उत्साह दिखाई दिया। श्रद्धालु अलग-अलग झांकियों को देखते हुए धार्मिक परंपराओं से जुड़ते नजर आए।
भोर चार बजे हुआ चारों भाइयों का मिलन
मेले का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित क्षण गुरुवार की भोर लगभग चार बजे आया।बड़ागांव के मध्य बाजार में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन का पारंपरिक मंचन किया गया।जैसे ही चारों भाइयों के मिलन का दृश्य शुरू हुआ, उपस्थित श्रद्धालुओं की भावनाएं उमड़ पड़ीं।भगवान श्रीराम और भरत के प्रेम तथा समर्पण को दर्शाने वाला यह दृश्य बेहद मार्मिक रहा।मिलन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। कई लोगों की आंखों से खुशी और भक्ति के आंसू छलक पड़े।इस दृश्य को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु रातभर जागकर प्रतीक्षा करते रहे थे।
राम और भरत के प्रेम का प्रतीक है भरत मिलाप
भरत मिलाप रामायण का अत्यंत भावुक प्रसंग है। यह भाईचारे, त्याग, निष्ठा और पारिवारिक प्रेम का संदेश देता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने अयोध्या के राजसिंहासन पर बैठने के बजाय श्रीराम की चरण पादुकाएं रखकर राज्य की जिम्मेदारी निभाई थी।वनवास समाप्त होने के बाद जब श्रीराम अयोध्या लौटे, तो भरत और उनके बीच हुआ मिलन प्रेम तथा समर्पण का प्रतीक बन गया।इसी प्रसंग को भरत मिलाप के आयोजन में जीवंत रूप दिया जाता है।
धार्मिक परंपरा के साथ सांस्कृतिक उत्सव
बड़ागांव में भरत मिलाप का आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और सामाजिक एकता से जुड़ा उत्सव भी है।इस आयोजन में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं। वर्षों से चली आ रही परंपरा को देखने के लिए बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी पहुंचते हैं।धार्मिक झांकियों और पारंपरिक लाग-विमानों के माध्यम से नई पीढ़ी को रामायण के आदर्शों तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।वाराणसी में भरत मिलाप की समृद्ध परंपरावाराणसी में भरत मिलाप की कई प्रसिद्ध परंपराएं प्रचलित हैं। इनमें नाटी इमली और राजघाट के आयोजन विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।22 अक्टूबर 2026 को नाटी इमली में भी ऐतिहासिक भरत मिलाप का आयोजन हुआ, जहां एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी की खबर सामने आई। वहीं, राजघाट की भरत मिलाप लीला में भी हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।हालांकि, ये आयोजन बड़ागांव के भरत मिलाप से अलग हैं। बड़ागांव में बुधवार रात शुरू हुए आयोजन का मुख्य मिलन गुरुवार की भोर में हुआ।
पूरी रात भक्तिमय रहा वातावरण
बड़ागांव के मेले में श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रस्तुतियों के साथ पारंपरिक उत्सव का आनंद लिया।आकर्षक झांकियों और लाग-विमानों के दर्शन के बाद सभी की निगाहें भरत मिलाप के मुख्य मंचन पर टिकी थीं।जैसे ही चारों भाइयों का मिलन हुआ, श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर भगवान श्रीराम का स्मरण किया।इस दौरान भक्ति, प्रेम और समर्पण का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
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