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यूपी में सुरक्षा का हाईटेक पहरा, ऑपरेशन त्रिनेत्र से लगे 12.85 लाख से अधिक CCTV कैमरे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पुलिसिंग व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दे रही है। राज्य में अपराधों की रोकथाम, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और घटनाओं के बाद त्वरित कार्रवाई के लिए सीसीटीवी कैमरों, डिजिटल तकनीक और जनसहभागिता का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत प्रदेश में 12.85 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क, महिला बीट पुलिसिंग और एंटी रोमियो अभियान जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया गया है। सरकार का दावा है कि इन पहलों से पुलिस की निगरानी क्षमता और अपराधों की जांच में मदद मिल रही है।
ऑपरेशन त्रिनेत्र से मजबूत हुई निगरानी व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराध नियंत्रण के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्र को महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया है।
इस अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख चौराहों, बाजारों, सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रदेश में 12.85 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं।
वहीं, अगस्त 2025 के एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज में ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत 13,32,720 कैमरे स्थापित किए जाने का आंकड़ा दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग अवधियों और रिपोर्टों में कैमरों की संख्या अलग बताई गई है।
इन कैमरों का उद्देश्य अपराध की घटनाओं से जुड़े साक्ष्य जुटाना और पुलिस जांच को प्रभावी बनाना है।
अपराधियों की पहचान में मिल रही मदद
ऑपरेशन त्रिनेत्र के अंतर्गत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल आपराधिक घटनाओं की जांच में किया जा रहा है।
कैमरों की फुटेज से संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों, वाहनों की आवाजाही और घटनाओं के समय की परिस्थितियों का पता लगाने में सहायता मिल सकती है।
राज्य सरकार के अगस्त 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत प्राप्त तकनीकी सहायता से हत्या, डकैती, अपहरण, चेन स्नैचिंग और अन्य श्रेणियों से जुड़े 7,894 मामलों का खुलासा करने में मदद मिली थी।
हालांकि, किसी मामले में सीसीटीवी फुटेज मिलने का अर्थ अपने आप अपराध सिद्ध होना नहीं है। पुलिस को अन्य साक्ष्यों के साथ उसकी जांच करनी होती है।
जनसहभागिता से बढ़ाया जा रहा कैमरों का नेटवर्क
ऑपरेशन त्रिनेत्र की महत्वपूर्ण विशेषता इसमें आम नागरिकों और स्थानीय संस्थानों की भागीदारी है।
पुलिस लोगों, व्यापारियों, प्रतिष्ठान संचालकों और सामाजिक संगठनों को अपने परिसरों के बाहर उपयुक्त स्थानों पर कैमरे लगाने के लिए प्रोत्साहित करती रही है।
इसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्रों में निगरानी का दायरा बढ़ाना है।
अयोध्या में जनवरी 2026 तक जनसहयोग से लगभग 12,500 सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि, कई स्थानों पर कैमरों के रखरखाव और खराब उपकरणों की मरम्मत जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं।
प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था
महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रदेश के पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।
इनका उद्देश्य महिलाओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए सुलभ और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना है।
महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य समस्याओं से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं को संबंधित सहायता सेवाओं और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।
राज्य सरकार ने मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत महिला सहायता व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया है।
8,694 महिला बीटों से सुरक्षा पर जोर
महिला सुरक्षा के लिए राज्य में महिला बीट पुलिसिंग को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रदेश में 8,694 महिला बीटों के संचालन का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, अगस्त 2025 के आधिकारिक सरकारी दस्तावेज में 9,172 महिला बीटों के आवंटन का आंकड़ा दर्ज है।
महिला बीट पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी अपने निर्धारित क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं से संवाद स्थापित करना तथा उनकी समस्याओं की जानकारी प्राप्त करना है।
इस व्यवस्था से गांवों, कस्बों और शहरी वार्डों में महिलाओं तक पुलिस की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
एंटी रोमियो अभियान के तहत कार्रवाई
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड भी सक्रिय है।
इन टीमों को स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी की जिम्मेदारी दी जाती है।
सरकार की ओर से मार्च 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 1,694 एंटी रोमियो स्क्वाड सक्रिय थे।
मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत से मार्च 2026 तक इन टीमों द्वारा 24,871 मामले दर्ज किए गए और 33 हजार से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी।
पुलिस कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन और नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण भी आवश्यक है।
मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति अभियान चला रही है।
इसके अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रमों, पुलिस संवाद, शिकायत निवारण और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर जोर दिया जाता है।
अक्टूबर 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, महिला बीट पुलिस ने प्रदेश के 99 हजार से अधिक गांवों तक संपर्क और जागरूकता गतिविधियां पहुंचाई थीं।
इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा जांच और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त की व्यवस्था भी की गई।
डिजिटल तकनीक से पुलिसिंग को नई दिशा
प्रदेश में पुलिसिंग व्यवस्था को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
पुलिस विभाग विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी उपकरणों की सहायता से शिकायत प्रबंधन, अपराध संबंधी सूचना और जांच प्रक्रिया को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल रिकॉर्ड और आधुनिक संचार व्यवस्था से पुलिस को घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, तकनीक का प्रभाव तभी बेहतर होगा, जब उपकरण सही ढंग से काम करें और पुलिसकर्मियों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिले।
महिला सुरक्षा में हेल्पलाइन की महत्वपूर्ण भूमिका
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सहायता के लिए 1090 वीमेन पावर लाइन और आपातकालीन सहायता के लिए यूपी-112 जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
इन सेवाओं का उद्देश्य शिकायत या आपात स्थिति में संबंधित सहायता एजेंसियों तक सूचना पहुंचाना है।
मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से भी महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने, परामर्श और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 1,663 थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए जा चुके थे।
कैमरों के रखरखाव और निगरानी की भी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ उनका नियमित रखरखाव भी आवश्यक है।
कैमरों की गुणवत्ता, बिजली आपूर्ति, रिकॉर्डिंग व्यवस्था और डेटा की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
इसके साथ ही निगरानी प्रणाली में नागरिकों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी के संरक्षण से संबंधित नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण है।
केवल कैमरों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनके प्रभावी इस्तेमाल, फुटेज की उपलब्धता और पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन करना भी आवश्यक है।
तकनीक और जनसहभागिता से सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश
उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिसिंग रणनीति में तकनीकी निगरानी, महिला सुरक्षा, जनसहभागिता और त्वरित कार्रवाई को प्रमुखता दी जा रही है।
ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, महिला हेल्प डेस्क, महिला बीट पुलिसिंग और एंटी रोमियो स्क्वाड इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
सरकार का दावा है कि इन व्यवस्थाओं से अपराधों की जांच और महिलाओं की सुरक्षा में सुधार हुआ है।
हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन अपराध के विश्वसनीय आंकड़ों, शिकायतों के समाधान, पुलिस की प्रतिक्रिया और नागरिकों के अनुभवों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
फिलहाल राज्य सरकार तकनीक और पुलिसिंग के समन्वय से कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।





