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आपत्तिजनक मैसेज पर हाईकोर्ट सख्त, आरोपी की मानसिक स्थिति जांचेगा मेडिकल बोर्ड

Prayagraj प्रयागराज : अश्लील तस्वीरों के जरिए युवती को कथित रूप से ब्लैकमेल करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसकी मानसिक स्थिति की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आरोपी की ओर से भेजे गए आपत्तिजनक संदेशों और सोशल मीडिया पोस्ट को देखने के बाद प्रथम दृष्टया कहा कि वह स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति प्रतीत नहीं होता।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशांबी को आरोपी की मानसिक जांच कराने और उसकी रिपोर्ट संबंधित जिला अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपी के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों को देखते हुए उसकी मानसिक स्थिति की जांच जरूरी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा भेजे गए मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट का अवलोकन करने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि वह सामान्य मानसिक स्थिति में नहीं है। इसलिए उसकी मानसिक जांच कराकर रिपोर्ट को न्यायालय के रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।
जमानत याचिका हुई खारिज
मामले में आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1), 74, 351(2), 352 और 333 के अलावा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट की धारा 3 और 4 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 ई के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मोबाइल हैक कर तस्वीरें हासिल करने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने किसी तरह उसका मोबाइल हैक कर उसकी निजी और अश्लील तस्वीरें हासिल कर ली थीं। इसके बाद वह उन तस्वीरों का इस्तेमाल कर उसे लगातार ब्लैकमेल करने लगा।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी सोशल मीडिया और निजी संदेशों के माध्यम से उसे धमकाता था। उसने कथित तौर पर तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे पांच लाख रुपये की मांग भी की थी।
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि पहले दोनों के बीच संबंध थे, लेकिन बाद में आरोपी ने उसकी निजी तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संदेश भेजकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
जमानत के बाद फिर धमकाने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, आरोपी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि जमानत पर बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर दोबारा पीड़िता को धमकाना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपी के व्यवहार को देखते हुए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशांबी की ओर से आरोपी की मानसिक जांच कर रिपोर्ट संबंधित अदालत में पेश की जाएगी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।





