उत्तर प्रदेश

फरार आरोपी पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध हिरासत का दावा मानने से किया इनकार

Ratna Netam
21 July 2026 9:37 PM IST
फरार आरोपी पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध हिरासत का दावा मानने से किया इनकार
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Prayagraj प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक मामले में फरार चल रहे व्यक्ति को अवैध हिरासत में नहीं माना जा सकता। यदि किसी आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है और वह कानून से बचने के लिए फरार है तो उसके परिजन हैबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से राहत नहीं मांग सकते।

न्यायमूर्ति संदीप जैन ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एक मां की ओर से दाखिल हैबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में मां ने अपने बेटे को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाया था और उसे अदालत के सामने पेश करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य सामने आया कि संबंधित व्यक्ति एक आपराधिक मामले में आरोपी है और पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा है। उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अवैध हिरासत में रखा हुआ नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हैबियस कॉर्पस याचिका का उद्देश्य किसी व्यक्ति को गैरकानूनी हिरासत से मुक्त कराना है। लेकिन जब कोई व्यक्ति स्वयं कानून से बचने के लिए फरार है और उसके खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी की कार्रवाई चल रही है तो इस संवैधानिक उपाय का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्ति के पास कानून के तहत अन्य वैधानिक उपाय उपलब्ध हैं। वह संबंधित अदालत में पेश होकर जमानत या अन्य कानूनी राहत के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन गिरफ्तारी से बचने के दौरान यह दावा नहीं किया जा सकता कि उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।

याचिकाकर्ता मां की ओर से दलील दी गई थी कि उसके बेटे को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लिया है और उसे न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया जा रहा है। इसके आधार पर हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि पुलिस और अन्य पक्षों की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी फरार है और उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी है।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला अवैध हिरासत का नहीं है। इसलिए हैबियस कॉर्पस याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं बनता।

हाईकोर्ट का यह फैसला आपराधिक मामलों में फरार आरोपियों द्वारा हैबियस कॉर्पस याचिका के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कानून की प्रक्रिया से बचने के लिए नहीं किया जा सकता।

इस निर्णय के बाद यह साफ हो गया है कि यदि कोई आरोपी व्यक्ति गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार है तो उसके परिवार की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए उसे राहत नहीं मिल सकती। ऐसे मामलों में आरोपी को कानून के सामने उपस्थित होकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।

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