उत्तर प्रदेश

सोसाइटी चुनावों में देरी पर हाईकोर्ट नाराज यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट

Ratna Netam
4 Sept 2026 9:12 PM IST
सोसाइटी चुनावों में देरी पर हाईकोर्ट नाराज यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट
x
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश की अपार्टमेंट सोसाइटियों में लंबे समय से पद पर बने रहने वाले पदाधिकारियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आवासीय सोसाइटियों में प्रबंध समितियों के अनिश्चितकालीन कार्यकाल और सदस्यों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने के मामलों पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी संस्था के पदाधिकारियों का लंबे समय तक बिना चुनाव के पद पर बने रहना और सदस्यों के अधिकारों को सीमित करना गंभीर विषय है। अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
एल्डिको आमंत्रण अपार्टमेंट एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई
मामला गाजियाबाद स्थित **एल्डिको आमंत्रण अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन** से जुड़ा है। एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि सोसाइटी में प्रबंधन बोर्ड और पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
याचिका में कहा गया कि नए प्रबंध बोर्ड के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने तक पुराने पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां देना और उनकी शक्तियों को सीमित या बढ़ाना नियमों के अनुरूप नहीं है।
पद पर बने रहने को लेकर उठे सवाल
अपार्टमेंट सोसाइटियों में अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ पदाधिकारी चुनाव प्रक्रिया में देरी के कारण लंबे समय तक अपनी कुर्सी पर बने रहते हैं।
निवासियों का आरोप रहता है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो जाती है और आम सदस्यों की भागीदारी कम हो जाती है।
हाईकोर्ट ने इसी मुद्दे पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या सोसाइटी प्रबंधन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन हो रहा है या नहीं।
मतदान अधिकार से वंचित करने पर भी नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि कई बार रखरखाव शुल्क या बिजली बिल बकाया होने के आधार पर सदस्यों को मतदान से रोक दिया जाता है।
अदालत ने कहा कि यदि किसी सदस्य को वोट देने के अधिकार से हटाया जाता है तो इससे प्रबंध बोर्ड अपनी पसंद के मतदाताओं के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
कोर्ट ने इस तरह की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सरकार से मांगा गया जवाब
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (संस्थागत वित्त) और रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स को मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत जानना चाहती है कि अपार्टमेंट सोसाइटियों में चुनाव, कार्यकाल और सदस्यों के अधिकारों को लेकर सरकार की क्या नीति है और मौजूदा नियमों का पालन किस तरह कराया जा रहा है।
विवादित आदेश पर लगाई रोक
मामले में गाजियाबाद के उप रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स द्वारा जारी एक आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में नए प्रबंध बोर्ड के गठन तक पुराने पदाधिकारियों की वित्तीय शक्तियों को सीमित किया गया था।
हाईकोर्ट ने इस आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर विचार के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।
अपार्टमेंट सोसाइटियों में बढ़ती शिकायतें
उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां हैं। यहां हजारों परिवार रहते हैं और सोसाइटी प्रबंधन को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहते हैं।
निवासी अक्सर चुनाव में देरी, खातों की पारदर्शिता, रखरखाव शुल्क और फैसलों में भागीदारी को लेकर सवाल उठाते हैं।
पारदर्शी चुनाव व्यवस्था की मांग
सोसाइटी सदस्यों का कहना है कि समय पर चुनाव होने से सभी निवासियों को अपनी पसंद के प्रतिनिधि चुनने का मौका मिलता है।
वहीं, लंबे समय तक एक ही समूह के नियंत्रण में रहने से प्रबंधन व्यवस्था में जवाबदेही की कमी आ सकती है।
कोर्ट के आदेश से बढ़ी उम्मीद
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अपार्टमेंट सोसाइटियों में रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि चुनाव प्रक्रिया और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आवासीय सोसाइटियों में भी लोकतांत्रिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
अगली सुनवाई पर नजर
अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। इस दौरान राज्य सरकार और संबंधित विभागों की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा।
Next Story