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- हर्बल उत्पादों से बदली...

बुलंदशहर। बुलंदशहर जिले के डिबाई-दानपुर क्षेत्र की रहने वाली कृष्णा कुमारी ने अपनी मां के घरेलू नुस्खों को आधार बनाकर न केवल हर्बल उत्पादों का कारोबार खड़ा किया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए स्वरोजगार का रास्ता भी तैयार किया है। साधारण किसान परिवार से निकलकर कृष्णा आज महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं।
मां से मिले ज्ञान और अनुभव को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने हर्बल तेल, शैंपू और अन्य प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए। विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तैयार किए जा रहे इन उत्पादों को अब दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में भी पहचान मिल रही है।
मां के नुस्खों ने दिखाई नई राह
दानपुर ब्लॉक के भीमपुर गांव निवासी कृष्णा कुमारी ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने अपनी मां विजय को घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते देखा था। मां घर में प्राकृतिक सामग्री से तेल, शैंपू और अन्य चीजें तैयार करती थीं, जिनके इस्तेमाल से बालों की मजबूती और स्वास्थ्य बेहतर रहता था।
कृष्णा ने बताया कि मां के बनाए हुए इन उत्पादों का असर उन्होंने खुद भी देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए प्रेरणा बना और उन्होंने इसे एक व्यवसाय के रूप में विकसित करने का फैसला लिया।
करीब पांच वर्ष पहले हृदय रोग के कारण उनकी मां का निधन हो गया, लेकिन उनके दिए हुए ज्ञान और सीख को कृष्णा ने अपनी ताकत बना लिया।
किसान परिवार से निकलकर बनाई पहचान
कृष्णा कुमारी का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उन्होंने परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने का सपना देखा।
ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि प्राकृतिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी सोच के साथ उन्होंने मां के घरेलू नुस्खों को आधुनिक तरीके से तैयार कर बाजार तक पहुंचाने की योजना बनाई।
धीरे-धीरे उन्होंने हर्बल तेल, शैंपू और अन्य उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और प्राकृतिक सामग्री के कारण लोगों ने इन उत्पादों को पसंद किया।
विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह की शुरुआत
कृष्णा कुमारी ने अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह बनाया। इस समूह के माध्यम से हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
समूह का उद्देश्य केवल उत्पाद बनाकर बिक्री करना ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी है। कृष्णा ने कई महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें इस काम से जोड़ा है।
आज यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।
दिल्ली और एनसीआर तक पहुंची पहचान
भीमपुर दोराहा और डिबाई-दानपुर क्षेत्र से शुरू हुई यह छोटी सी पहल अब बड़े स्तर पर पहचान बना रही है। विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह के हर्बल उत्पाद दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में भी लोगों तक पहुंच रहे हैं।
प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए गए इन उत्पादों को लोग पसंद कर रहे हैं। खासतौर पर हर्बल तेल और शैंपू की मांग बढ़ रही है।
कृष्णा का कहना है कि उनका लक्ष्य अपने उत्पादों को और अधिक लोगों तक पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
कृष्णा कुमारी मानती हैं कि ग्रामीण महिलाओं में प्रतिभा और मेहनत की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन्हें सही अवसर और प्रशिक्षण देने की है।
इसी सोच के साथ उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को जोड़ना शुरू किया। महिलाएं अब उत्पाद तैयार करने, पैकिंग और अन्य कामों में सहयोग कर रही हैं।
इससे उन्हें आर्थिक मदद मिल रही है और परिवार की आय बढ़ाने में भी योगदान मिल रहा है।
प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग
आज के समय में लोग रसायनों से बचकर प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी कारण हर्बल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
कृष्णा कुमारी ने इसी अवसर को पहचाना और अपनी मां की सीख को व्यवसाय का रूप दिया। उनका प्रयास दिखाता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच को जोड़कर नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा
कृष्णा कुमारी की कहानी उन महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ नया करने का सपना देखते हैं।
एक किसान परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और मां की सीख के बल पर अलग पहचान बनाई। उनकी यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में योगदान दे रही है।
विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह की यह यात्रा दिखाती है कि अगर इच्छाशक्ति और मेहनत हो तो छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।





