उत्तर प्रदेश

रायबरेली की बैठक में तीखी नोकझोंक राहुल गांधी के सवाल पर मंत्री का पलटवार

Ratna Netam
10 Sept 2026 7:11 PM IST
रायबरेली की बैठक में तीखी नोकझोंक राहुल गांधी के सवाल पर मंत्री का पलटवार
x
रायबरेली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी **दिशा की बैठक** सियासी नोकझोंक का केंद्र बन गई। बैठक में खराब सड़कों से लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं तक कई मुद्दों पर सवाल-जवाब हुए। इसी दौरान केंद्र की चर्चित **‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना** पर राहुल गांधी के सवाल को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने उन पर तीखा पलटवार किया। मंत्री ने दावा किया कि राहुल गांधी ने अधिकारी से पूछा कि इस योजना में आखिर होता क्या है और इसके बाद प्रचार पर होने वाले खर्च की जानकारी मांगी।
वहीं दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी का जोर योजना की जमीनी स्थिति और बजट के इस्तेमाल पर था। उन्होंने कहा कि योजना का प्रचार काफी दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर उसका प्रभाव अपेक्षा के मुताबिक नजर नहीं आता। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि जिले को योजना के तहत करीब **30 लाख रुपये** मिले हैं और इसमें प्रचार पर 10 प्रतिशत राशि खर्च करने का प्रावधान है। इसी जानकारी के बाद राहुल ने खर्च और योजना के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
दिशा की बैठक में आमने-सामने आए दोनों नेता
रायबरेली के कलेक्ट्रेट स्थित बचत भवन में बुधवार को दिशा की बैठक आयोजित की गई थी। राहुल गांधी इस समिति के अध्यक्ष के तौर पर बैठक में शामिल हुए। इसमें जिले के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
बैठक का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार से जुड़ी विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना था। लेकिन कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के बीच बहस की स्थिति बन गई।
सबसे ज्यादा चर्चा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना पर हुए सवाल-जवाब की रही।
रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने योजना की प्रगति और इसके लिए जिले को मिली राशि के बारे में जानकारी मांगी। अधिकारियों ने 30 लाख रुपये मिलने की बात कही। राहुल ने इसके बाद पूछा कि योजना का कितना पैसा प्रचार-प्रसार में खर्च किया जाता है।
अधिकारियों की ओर से बताया गया कि प्रचार पर करीब 10 प्रतिशत राशि खर्च करने का प्रावधान है।
दिनेश प्रताप सिंह ने किया पलटवार
राहुल गांधी के सवाल के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह ने आपत्ति जताई।
सिंह ने सवाल उठाया कि अगर सांसद को केंद्रीय योजना की जानकारी ही नहीं है तो वह उसके क्रियान्वयन की निगरानी और समीक्षा कैसे करेंगे। मंत्री का आरोप था कि दिशा की बैठक में राहुल गांधी योजनाओं की समीक्षा करने के बजाय उनकी कमियां तलाशने पर ज्यादा जोर दे रहे थे।
दिनेश प्रताप सिंह ने बाद में मीडिया के सामने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बैठक के दौरान राहुल को दिल्ली से आए लोग पर्चियां देकर जानकारी दे रहे थे और वह उसी आधार पर सवाल कर रहे थे। यह मंत्री का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं की गई है।
किशोरी लाल शर्मा ने जताई आपत्ति
दिनेश प्रताप सिंह की टिप्पणी पर बैठक में मौजूद अमेठी के कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा ने आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि सांसद को किसी भी योजना के बारे में सवाल पूछने का अधिकार है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ देर तक तीखी नोकझोंक हुई।
इस घटनाक्रम ने योजना की समीक्षा से ज्यादा राजनीतिक बहस को चर्चा में ला दिया।
एक तरफ भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के सवाल को योजना की जानकारी नहीं होने से जोड़कर उन पर हमला किया, वहीं कांग्रेस की तरफ से इसे सांसद का समीक्षा बैठक में अधिकारियों से जवाब मांगने का अधिकार बताया गया।
आखिर ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना है क्या?
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने **22 जनवरी 2015 को पानीपत** से की थी।
इसका मूल उद्देश्य बालिकाओं के प्रति सामाजिक सोच में बदलाव लाना, लिंग आधारित भेदभाव को कम करना, बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा को प्रोत्साहित करना तथा लड़कियों और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर काम करना है।
शुरुआत में योजना का खास फोकस उन जिलों पर था जहां बाल लिंग अनुपात चिंता का विषय था। बाद में इसका विस्तार किया गया।
सरकार के मुताबिक 15वें वित्त आयोग की अवधि में योजना का पुनर्गठन किया गया और इसे **मिशन शक्ति की ‘संबल’ उप-योजना** के एक घटक के रूप में शामिल किया गया। इसका विस्तार देश के सभी जिलों तक किया गया है।
सीधे खाते में पैसे देने वाली योजना नहीं
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ को लेकर लोगों में एक सामान्य भ्रम यह भी रहता है कि इसके तहत बेटी या उसके परिवार को सीधे कोई निश्चित रकम मिलती है।
दरअसल BBBP मुख्य रूप से **जागरूकता व्यवहार परिवर्तन और बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेप** वाली योजना है। इसका उद्देश्य समाज में बेटी के प्रति सोच बदलना, उसकी शिक्षा और अधिकारों को बढ़ावा देना तथा विभिन्न सरकारी विभागों और समुदायों को इस दिशा में सक्रिय करना है।
यानी यह किसी ऐसी व्यक्तिगत नकद लाभ योजना की तरह नहीं है जिसमें आवेदन करने पर हर परिवार को तय राशि सीधे मिल जाए।
इसके तहत जिला स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, समुदाय से संवाद, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन और विभिन्न विभागों के समन्वय से गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं।
राहुल ने प्रचार पर क्यों उठाया सवाल?
रायबरेली की बैठक में राहुल गांधी का सवाल इसी पहलू पर केंद्रित बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि योजना का प्रचार काफी दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर इसका प्रभाव उतना नजर नहीं आता। इसके बाद उन्होंने पूछा कि प्रचार पर कितनी रकम खर्च की जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि जिले को 30 लाख रुपये मिले और प्रचार पर केवल 10 प्रतिशत राशि खर्च करने का प्रावधान है।
यहीं से राजनीतिक बहस तेज हुई।
दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल के शुरुआती सवाल को यह कहते हुए निशाने पर लिया कि सांसद को योजना की जानकारी होनी चाहिए। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने इसे योजना के वास्तविक क्रियान्वयन और खर्च का हिसाब मांगने वाला सवाल बताया।
खराब सड़कों पर भी राहुल ने अधिकारियों को घेरा
बैठक केवल ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना तक सीमित नहीं रही।
राहुल गांधी अपने साथ रायबरेली की कई खराब सड़कों की तस्वीरें भी लेकर पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को ये तस्वीरें दिखाईं और पूछा कि योजनाओं के तहत काम होने के बावजूद सड़कों की स्थिति इतनी खराब क्यों है।
रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कुचरिया-विश्वनाथगंज, भवानीगढ़-बहुधा, डलमऊ-जगतपुर, दरीबा-कठघर और सुल्तानपुर खेड़ा-सहजौरा समेत कई मार्गों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
ग्रामीण अभियंत्रण सेवा से जुड़े अधिकारियों से भी उन्होंने करीब 15 मिनट तक सवाल-जवाब किए।
राहुल का कहना था कि अगर योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो रहा है तो सड़कों की ऐसी हालत क्यों है।
मंत्री बोले कमियां खोजने पर रहा जोर
दिनेश प्रताप सिंह ने बैठक के बाद राहुल गांधी के पूरे रवैये पर सवाल उठाया।
उनका आरोप था कि राहुल रायबरेली के सांसद और दिशा समिति के अध्यक्ष के रूप में योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने के बजाय नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में ज्यादा नजर आए और सरकार की योजनाओं में कमियां खोजने की कोशिश करते रहे।
इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच सियासी बयानबाजी और तेज हो गई।
कांग्रेस की तरफ से तर्क दिया गया कि दिशा समिति का उद्देश्य ही योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और अधिकारियों से सवाल पूछना है।
योजना पर सरकार क्या कहती है?
केंद्र सरकार का कहना है कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ ने बालिकाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में लाने में भूमिका निभाई है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार योजना बाल लिंग अनुपात और लड़कियों-महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर काम करती है। इसका प्रयास अलग-अलग हितधारकों को जोड़कर बालिकाओं के प्रति मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाना है।
सरकार यह भी कहती है कि योजना अब सभी जिलों में विस्तारित है और इसमें ऐसी गतिविधियों पर अधिक खर्च को प्रोत्साहित किया जाता है जिनका जमीनी स्तर पर प्रभाव हो।
नीति आयोग के माध्यम से योजना का थर्ड-पार्टी मूल्यांकन भी कराया गया है। सरकार के मुताबिक 2020 और फिर 2025 में हुए मूल्यांकन में योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को संतोषजनक पाया गया।
एक सवाल से शुरू हुई राजनीतिक जंग
रायबरेली की दिशा बैठक का घटनाक्रम अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
राहुल गांधी ने योजना की राशि, प्रचार और जमीनी असर पर सवाल उठाए। दिनेश प्रताप सिंह ने उनके सवाल को ही निशाने पर लेते हुए कहा कि जब सांसद को योजना के बारे में जानकारी नहीं है तो वह उसकी निगरानी कैसे करेंगे।
दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि राहुल गांधी ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के बारे में अधिकारी से जानकारी मांगी और बाद में उसके बजट तथा प्रचार खर्च पर सवाल किए। वहीं मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने इसे राहुल की योजना संबंधी जानकारी की कमी के रूप में पेश किया।
इस विवाद के बीच मूल सवाल योजना के जमीनी असर का भी है। दिशा जैसी बैठकों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा करना है। ऐसे में रायबरेली की बैठक में शुरू हुई बहस अब योजना के प्रदर्शन से आगे बढ़कर राहुल गांधी और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गई है।
Next Story