उत्तर प्रदेश

मडुआ के आटे से बनी लिट्टी-रोटी खाने के बाद बिगड़ी तबीयत

Kavita2
2 Oct 2026 2:48 PM IST
मडुआ के आटे से बनी लिट्टी-रोटी खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
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बलिया। बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के आसचौरा गांव में जितिया पर्व के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई, जब मडुआ के आटे से बनी लिट्टी-रोटी खाने के बाद एक दर्जन से अधिक महिलाओं और बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। लोगों को उल्टी-दस्त और चक्कर आने लगे। एक के बाद एक कई लोगों की हालत खराब होने पर परिजन और ग्रामीण उन्हें आनन-फानन में बांसडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि घटना शुक्रवार सुबह की है। जितिया पर्व पर व्रत रखने वाली महिलाओं ने स्नान-ध्यान और पूजा-अर्चना के बाद भोजन तैयार करने के लिए मडुआ का आटा खरीदा था। ग्रामीणों के अनुसार यह आटा गांव में सोनू वर्मा की दुकान से खरीदा गया। इसी आटे से घरों में लिट्टी और रोटी बनाई गई। महिलाओं के साथ बच्चों ने भी इन खाद्य पदार्थों का सेवन किया।

खाना खाने के कुछ ही देर बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। सबसे पहले कुछ महिलाओं और बच्चों को उल्टी की शिकायत हुई। इसके बाद कई लोगों को दस्त और चक्कर आने लगे। एक साथ कई लोगों के बीमार पड़ने से गांव में हड़कंप मच गया। परिवार के लोग अपने-अपने स्तर पर प्रभावित लोगों को संभालने में जुट गए और जल्द ही उन्हें चिकित्सकीय सहायता दिलाने के लिए बांसडीह सीएचसी ले जाया गया।

सीएचसी पहुंचने के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों की जांच शुरू की। जिन लोगों में उल्टी-दस्त और कमजोरी के लक्षण अधिक पाए गए, उन्हें तत्काल उपचार दिया गया। कुछ मरीजों की स्थिति अपेक्षाकृत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया।

घटना की जानकारी फैलते ही अस्पताल में भी लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। ग्रामीण अपने परिचितों और परिवार के सदस्यों का हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचते रहे। चिकित्सकों ने मरीजों की निगरानी शुरू की और उनके स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार उपचार दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, सभी प्रभावित लोगों ने मडुआ के इसी आटे से बनी लिट्टी-रोटी का सेवन किया था। इसी कारण शुरुआती स्तर पर खाद्य पदार्थ से संबंधित समस्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि यह आटा खराब था, उसमें किसी तरह की मिलावट थी या भोजन तैयार करने के दौरान किसी अन्य कारण से समस्या हुई, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से खाद्य सामग्री के नमूने लिए जाने की आवश्यकता पड़ सकती है। नमूने की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीमारी की वजह क्या रही। यदि खाद्य पदार्थ दूषित पाया जाता है तो संबंधित स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

आसचौरा गांव में जितिया पर्व के कारण सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों का माहौल था। व्रतधारी महिलाओं ने स्नान-ध्यान के बाद पूजा की और इसके बाद भोजन तैयार किया। बताया गया कि मडुआ के आटे से तैयार लिट्टी-रोटी खाने के बाद अचानक तबीयत खराब होने लगी। इससे कुछ ही समय में पूरे गांव में चिंता का माहौल बन गया।

परिजनों के मुताबिक, शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे बीमार पड़ गए। जब एक के बाद एक महिलाओं और बच्चों में उल्टी-दस्त की शिकायत सामने आने लगी तो लोगों को किसी खाद्य पदार्थ के कारण समस्या होने की आशंका हुई। इसके बाद बीमार लोगों को बिना देर किए अस्पताल ले जाया गया।

जितिया पर्व पर महिलाएं कई जगहों पर पारंपरिक खाद्य पदार्थों का सेवन करती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस बार भी घर में मौजूद सामान से भोजन तैयार किया गया था। मडुआ के आटे का इस्तेमाल लिट्टी-रोटी बनाने में किया गया। भोजन के सेवन के कुछ ही देर बाद बीमारी के लक्षण सामने आने लगे।

स्वास्थ्य विभाग के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सभी मरीजों ने कितना भोजन किया था और भोजन बनने से पहले आटे को किस तरह रखा गया था। इसके अलावा खाने की अन्य सामग्री, पानी और खाना तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच की जा सकती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग एक साथ क्यों बीमार पड़े। यदि आटे की गुणवत्ता को लेकर कोई समस्या सामने आती है तो दुकान से संबंधित खाद्य सामग्री की भी जांच होनी चाहिए।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन को भी घटना की सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि फिलहाल प्राथमिक फोकस बीमार लोगों के उपचार पर है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

सीएचसी में भर्ती मरीजों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक बताई गई है। कुछ की हालत सामान्य होने के बाद उन्हें निगरानी में रखा गया है, जबकि अधिक गंभीर लक्षण वाले मरीजों को जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में भी चिकित्सकीय टीम को उनकी स्थिति के अनुसार इलाज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता है कि यदि खाद्य सामग्री से जुड़ी समस्या है तो कहीं और लोगों ने भी वही आटा तो नहीं खरीदा। ऐसे में संबंधित दुकान और उपलब्ध आटे की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि खाद्य सुरक्षा विभाग नमूने लेता है तो रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

घटना के बाद गांव में लोगों ने एक-दूसरे को सावधानी बरतने की सलाह दी। खासकर बच्चों को बाहर का या संदिग्ध भोजन न देने और खाने-पीने की सामग्री की गुणवत्ता जांचने की बात कही गई। हालांकि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने बीमारी का निश्चित कारण नहीं बताया है।

चिकित्सकों के अनुसार उल्टी, दस्त और चक्कर जैसे लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं। इनमें दूषित भोजन या पानी भी एक संभावित वजह हो सकती है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए चिकित्सकीय जांच और आवश्यक नमूना परीक्षण जरूरी है। इसलिए आटे से जुड़ी आशंका को फिलहाल जांच का विषय ही माना जा रहा है।

परिजनों ने बताया कि सुबह सब कुछ सामान्य था। पर्व की तैयारियों के बाद महिलाओं ने भोजन किया और फिर अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। इस कारण परिवारों को तत्काल अस्पताल की ओर दौड़ना पड़ा। अस्पताल में पहुंचने के बाद उपचार मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली।

मामले के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर अस्पतालों में भर्ती मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर बीमारी के संभावित स्रोत का पता लगाना भी जरूरी है। यदि खाद्य पदार्थ संदिग्ध पाया जाता है तो भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

फिलहाल बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के आसचौरा गांव में एक दर्जन से अधिक महिलाओं और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय है। बांसडीह सीएचसी में उपचार के बाद कुछ गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल भेजा गया है। ग्रामीणों के मुताबिक सभी ने सोनू वर्मा की दुकान से खरीदे मडुआ के आटे से बनी लिट्टी-रोटी खाई थी। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि बीमारी का वास्तविक कारण क्या था।

जितिया पर्व के दिन हुई इस घटना ने गांव में चिंता का माहौल बना दिया है। फिलहाल मरीजों का इलाज जारी है और परिजन उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। वहीं प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने के पीछे दूषित खाद्य पदार्थ, पानी या कोई अन्य कारण था।

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