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सहारनपुर की हरजस कौर ने IIT BHU में रचा इतिहास, एक साथ हासिल किए 15 सम्मान

वाराणसी। समस्याओं से घबराने के बजाय उन्हें गहराई से समझना और समाधान खोजने की कोशिश करना। यह सोच अगर बचपन से ही पढ़ाई का हिस्सा बन जाए तो सफलता की राह आसान हो सकती है। इसी सोच और लगातार मेहनत के दम पर सहारनपुर की हरजस कौर ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT BHU), वाराणसी में अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की छात्रा हरजस को संस्थान के 15वें दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा। उनके नाम कुल 15 सम्मान दर्ज हैं, जिनमें 10 गोल्ड मेडल, एक सिल्वर मेडल और तीन अन्य पुरस्कार शामिल हैं।
आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह शनिवार, 31 अक्टूबर को वाराणसी स्थित स्वतंत्रता भवन में आयोजित किया जा रहा है। इस समारोह में हरजस को बीटेक की सभी शाखाओं में सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में भी उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने संस्थान के मेधावी विद्यार्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।
10 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल से हासिल की खास पहचान
हरजस कौर की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने केवल अपने विभाग में ही नहीं, बल्कि बीटेक की सभी शाखाओं के विद्यार्थियों के बीच सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक प्रदर्शन किया है। उनके खाते में 10 गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल हैं। इसके अलावा उन्हें तीन अन्य पुरस्कारों के लिए भी चुना गया है।
प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल संस्थान के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक सम्मानों में शामिल है। यह बीटेक, बीआर्क और इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री कार्यक्रमों के विद्यार्थियों में उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी को दिया जाता है।
हरजस की सफलता ने यह साबित किया है कि नियमित पढ़ाई, विषयों की गहरी समझ और कठिन परिस्थितियों में समाधान खोजने की क्षमता किसी भी विद्यार्थी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं।
मां की सीख बनी सफलता की सबसे मजबूत नींव
हरजस कौर अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और आईआईटी बीएचयू के शैक्षणिक माहौल को देती हैं। उनके पिता चरणजीत सिंह व्यवसायी हैं, जबकि मां सरबजीत कौर ने उनकी शुरुआती शिक्षा और बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हरजस के मुताबिक, उनकी मां ने बचपन से ही उन्हें पढ़ाई का एक अलग तरीका सिखाया। मां की सीख थी कि किसी भी समस्या को केवल रटकर याद करने के बजाय उसकी जड़ तक पहुंचना चाहिए। जब तक किसी विषय या समस्या की वास्तविक वजह समझ में न आए, तब तक उसका समाधान तलाशना मुश्किल होता है।
यही सीख धीरे-धीरे उनकी पढ़ाई का आधार बन गई। उन्होंने हर विषय को समझने, सवालों के पीछे के सिद्धांतों को जानने और कठिन समस्याओं को अलग-अलग तरीकों से हल करने की आदत विकसित की। इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी विषय में यह दृष्टिकोण काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ।
हरजस की सफलता में परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन लगातार बना रहा। उन्होंने अपने माता-पिता को अपनी उपलब्धियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
आईआईटी बीएचयू के शैक्षणिक माहौल ने निखारी प्रतिभा
हरजस ने अपनी सफलता का श्रेय आईआईटी बीएचयू के पढ़ाई और शोध के अनुकूल माहौल को भी दिया है। संस्थान में पढ़ाई के दौरान उन्हें अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, तकनीकी संसाधन और अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के अवसर मिले।
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक समझ भी जरूरी होती है। सर्किट डिजाइन, सेमीकंडक्टर, सिग्नल प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे विषयों में मजबूत पकड़ बनाने के लिए निरंतर अभ्यास करना पड़ता है।
हरजस ने अपनी पढ़ाई के दौरान इसी तरह विषयों को गहराई से समझने पर ध्यान दिया। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां बताती हैं कि उन्होंने पूरे बीटेक पाठ्यक्रम में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
आईआईटी बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन सभी इंजीनियरिंग शाखाओं के विद्यार्थियों के बीच सर्वोच्च शैक्षणिक स्थान हासिल करना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है।
नोएडा में क्वालकॉम के साथ शुरू किया पेशेवर सफर
हरजस कौर की उपलब्धि का एक और खास पहलू यह है कि उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पेशेवर करियर की शुरुआत भी कर दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वह नोएडा में क्वालकॉम में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के रूप में काम कर रही हैं।
क्वालकॉम दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर और वायरलेस टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल है। ऐसे संस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के रूप में काम करना उनके तकनीकी ज्ञान और करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
हरजस की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है, जो पढ़ाई के दौरान अच्छे अंक हासिल करने के साथ-साथ वास्तविक दुनिया की तकनीकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान करना चाहते हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, हरजस की भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा भी है। इस तरह वह तकनीकी क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ भविष्य में सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभाने की आकांक्षा रखती हैं।
31 अक्टूबर को 2048 विद्यार्थियों को मिलेगी डिग्री
आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह 31 अक्टूबर को आयोजित हो रहा है। इस समारोह में कुल 2,048 विद्यार्थियों को विभिन्न स्नातक, परास्नातक और शोध कार्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इनमें 1,106 बीटेक, 385 इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री, 322 एमटेक और एमफार्म, 182 पीएचडी, 39 एमएससी और 14 बीआर्क की डिग्रियां शामिल हैं।
समारोह में कुल 62 विद्यार्थियों को विभिन्न पदकों और पुरस्कारों के लिए चुना गया है। इनमें 97 गोल्ड मेडल, दो सिल्वर मेडल और 25 नकद पुरस्कार एवं अन्य सम्मान शामिल हैं। आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला इस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा के अनुसार, दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ शोध और नवाचार को सम्मानित करने का अवसर है।
हरजस की सफलता से युवाओं को मिलेगी प्रेरणा
हरजस कौर की उपलब्धि केवल 10 गोल्ड मेडल और प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं है। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि सफलता के लिए केवल अधिक घंटे पढ़ना ही जरूरी नहीं, बल्कि विषय को सही तरीके से समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बचपन में मां से मिली सीख, पिता का सहयोग, संस्थान का अनुकूल शैक्षणिक वातावरण और स्वयं की मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
आज जब तकनीकी शिक्षा और प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, ऐसे में हरजस की कहानी विद्यार्थियों को यह समझने की प्रेरणा देती है कि सवालों से बचने के बजाय उनके जवाब तलाशने चाहिए। समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने की यही आदत उन्हें आईआईटी बीएचयू की मेधावियों की सूची में सबसे आगे ले आई है।





