- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- Gyanchand Pasi सुसराल...
Gyanchand Pasi सुसराल से गिरोह चलाता था, एनकाउंटर में ढेर होते ही लोगों ने मनाया जश्न

Parsapur.परसापुर (गोंडा)। एसटीएफ द्वारा मुठभेड़ में मारे गए एक लाख रुपये के इनामी अपराधी ज्ञानचंद पासी ने जिले में हिस्ट्रीशीट खुलने और पुलिस की निगरानी बढ़ने के बाद बलिया जिले में अपनी ससुराल से गिरोह चलाना शुरू कर दिया था। पत्नी और बच्चों को ससुराल में छोड़ आया था। वह गोंडा और आसपास के जिलों में अपराध करता था। बुधवार की शाम ज्ञानचंद की मौत की खबर मिलने पर उसकी पत्नी और उसका भाई गुरुवार की दोपहर बच्चों के साथ नया पुरवा पहुंच गए। चरसड़ी के खालेपुरवा के गूंगीदीन गिरोह के कमजोर पड़ने पर ज्ञानचंद ने सिर उठाया था। अस्सी के दशक में गूंगीदीन गिरोह अपराध की दुनिया में चरम पर था।
गूंगीदीन के पांच भाई अपराध की दुनिया में पैर पसार चुके थे। गूंगीदीन और पाटनदीन पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। उसके भाई देवीदीन, भतीजे सुरेश और पिता भगवती सिंह को उनके साथियों ने घेरकर मार डाला। भतीजा रमेश सिंह भूमिगत हो गया। अपने भाई मातादीन और पटमेश्वरी सिंह के आत्मसमर्पण के बाद ज्ञानचंद पासी ने पड़ोसी गांव नयापुरवा में अपना गिरोह सक्रिय कर लिया।ज्ञानचंद के दादा हिरई और पिता शिवप्रसाद छोटी-मोटी चोरियां करते थे। ज्ञानचंद ने अपने दादा पंचू पासी, चाचा जंगू पासी, शिवबहादुर पासी और भाई नानकऊ पासी के साथ ही अपनी जाति के अन्य अपराधियों को मिलाकर पासी गिरोह बनाया। ज्ञानचंद पासी ने 1996 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था, लेकिन 2002 में अकेलेवीर गांव के लश्करी यादव की हत्या के बाद वह चर्चा में आया।इस गिरोह के चार सदस्यों की हत्या हो चुकी है





