उत्तर प्रदेश

खेतों की पगडंडियों से एशियन गेम्स तक पहुंचे गुलवीर, 10 हजार मीटर में जीता सिल्वर

Kavita2
26 Sept 2026 11:48 AM IST
खेतों की पगडंडियों से एशियन गेम्स तक पहुंचे गुलवीर, 10 हजार मीटर में जीता सिल्वर
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अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव से निकलकर भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीत लिया। नागोया में शुक्रवार को हुई फाइनल रेस में गुलवीर ने 28 मिनट 29.38 सेकंड का समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके इस प्रदर्शन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।

गुलवीर के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि यह एशियन गेम्स में उनका लगातार दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने हांगझोउ एशियन गेम्स में इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। चार साल बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए कांस्य को रजत में बदल दिया। इस तरह पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में उनके नाम अब दो एशियन गेम्स पदक हो गए हैं।

नागोया में हुई फाइनल रेस में बहरीन के बिरहानु बालेव ने 28:27.51 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। गुलवीर सिंह 28:29.38 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बहरीन के ही अल्बर्ट किप्टू ने 28:34.18 के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। गुलवीर और स्वर्ण पदक विजेता के बीच अंतर करीब 1.87 सेकंड का रहा।

गुलवीर ने रेस के अधिकांश हिस्से में अग्रणी समूह के साथ बने रहने की रणनीति अपनाई। उन्होंने शुरुआत से ही समय के पीछे भागने के बजाय अपनी गति और स्थिति पर ध्यान दिया। आखिरी चरण में उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ाई और दूसरे स्थान पर रहते हुए रेस पूरी की। गुलवीर ने बाद में बताया कि चैंपियनशिप रेस में रणनीति और धैर्य महत्वपूर्ण होता है और उन्होंने अपने कोच के साथ बनाई योजना के मुताबिक दौड़ने पर ध्यान दिया।

सेना में भर्ती होने की चाहत से शुरू हुई दौड़

गुलवीर सिंह की कहानी किसी बड़े एथलेटिक्स मैदान से शुरू नहीं हुई थी। अलीगढ़ के अतरौली क्षेत्र के सिरसा गांव में पले-बढ़े गुलवीर गांव की सड़कों और खेतों की पगडंडियों पर दौड़ा करते थे। उनका शुरुआती लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय एथलीट बनना नहीं, बल्कि भारतीय सेना में भर्ती होना था। सेना में भर्ती की तैयारी के दौरान दौड़ने की उनकी आदत ने आगे चलकर उनके करियर की दिशा बदल दी।

गुलवीर वर्ष 2018 में भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल हुए। सेना में शामिल होने के बाद उनकी दौड़ने की प्रतिभा पर ध्यान गया। अरुणाचल प्रदेश में उनकी पहली पोस्टिंग के दौरान उन्होंने 12 किलोमीटर की एक दौड़ में हिस्सा लिया और 60 से ज्यादा धावकों के बीच पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद सेना के अधिकारियों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण का अवसर मिला।

इसके बाद गुलवीर को आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में दूरी की दौड़ के प्रशिक्षण से जोड़ा गया। यहीं से उनकी एथलेटिक्स यात्रा ने नया मोड़ लिया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया। जूनियर स्तर पर बड़े मुकाबलों का अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्होंने सीनियर स्तर पर तेजी से अपनी पहचान बनाई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ा प्रदर्शन

गुलवीर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक 2023 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में आया, जहां उन्होंने 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता। इसके बाद हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव था।

2025 में गुलवीर ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते। इससे लंबी दूरी की दौड़ में उनका कद और मजबूत हुआ। इसके बाद उन्होंने 2026 में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता।

गुलवीर के नाम लंबी दूरी की कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड उपलब्धियां भी दर्ज हैं। वह 5,000 मीटर, 10,000 मीटर, एक मील और हाफ मैराथन में भारतीय रिकॉर्ड बना चुके हैं। 2025 में उन्होंने चार मिनट से कम समय में एक मील दौड़ने वाले पहले भारतीय का रिकॉर्ड भी बनाया। इसी वर्ष उन्होंने हाफ मैराथन में एक घंटे से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय के रूप में भी पहचान बनाई।

किसान परिवार से निकला देश का धावक

गुलवीर सिंह एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता पप्पू सिंह किसान हैं, जबकि मां लक्ष्मी देवी गृहिणी हैं। गांव के सीमित संसाधनों के बीच दौड़ने से शुरू हुआ उनका सफर अब एशिया के बड़े खेल मंच तक पहुंच चुका है। सिरसा गांव में उनकी सफलता के बाद खुशी का माहौल है और स्थानीय लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र की उपलब्धि बताया है।

गुलवीर की एशियन गेम्स में रजत पदक की यह उपलब्धि उनके 2026 के सफल सत्र में एक और बड़ी उपलब्धि है। हांगझोउ में कांस्य के बाद नागोया में रजत जीतकर उन्होंने 10,000 मीटर में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है। गांव की पगडंडियों से शुरू हुई उनकी दौड़ अब लगातार अंतरराष्ट्रीय पदकों और रिकॉर्डों तक पहुंच रही है।

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