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Gujarat के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा- प्राकृतिक खेती ही भविष्य का समाधान

Muzaffarnagar मुजफ्फरनगर : जाट समाज महासभा, मुजफ्फरनगर के तत्वावधान में भोपा रोड स्थित पंजाबी धर्मशाला में जाट प्रतिभा अलंकरण समारोह एवं “प्राकृतिक खेती ही एकमात्र समाधान” विषय पर विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने समाज की मेधावी प्रतिभाओं का सम्मान किया और युवाओं को जीवन में सफलता के लिए मूल्यों, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभाएं होती हैं। मेधावी विद्यार्थी और युवा ही समाज, परिवार और राष्ट्र को विकास के रास्ते पर आगे ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार और जीवन मूल्यों को भी अपनाना चाहिए, क्योंकि यही उन्हें जीवन में सही दिशा प्रदान करते हैं।
राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने व्यवहार में सौम्यता रखें और जीवन में आने वाली परिस्थितियों का धैर्य के साथ सामना करें। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, ईमानदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। साथ ही युवाओं को यह भी समझना चाहिए कि कौन उनका वास्तविक मित्र है और कौन उनके हितों के खिलाफ है।
आचार्य देवव्रत ने जाट समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए समाज के महापुरुषों को याद किया। उन्होंने कहा कि चौधरी छोटूराम और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने अपने सिद्धांतों, संघर्ष और जनसेवा के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। उन्होंने किसानों और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए, जो आज भी प्रेरणादायक हैं।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में भी जाट समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समाज के अनेक लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर देश के लिए बलिदान दिया। उन्होंने युवाओं से अपने इतिहास और विरासत को समझने तथा महापुरुषों के आदर्शों पर चलने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान “प्राकृतिक खेती ही एकमात्र समाधान” विषय पर आयोजित गोष्ठी में भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक खेती के कारण मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है और किसानों को लंबे समय तक लाभ मिल सकता है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की ओर लौटना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन जरूरी है और इसमें प्राकृतिक खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग, किसान, युवा और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और समाज में शिक्षा एवं संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
समारोह का समापन समाज की एकता, शिक्षा के महत्व और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने राज्यपाल के विचारों को प्रेरणादायक बताते हुए समाज और युवाओं के लिए उपयोगी बताया।





