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Fake firm से GST चोरी का खुलासा, मेरठ पहुंची प्रयागराज पुलिस

Prayagraj प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सामने आए 2.50 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में अब मेरठ कनेक्शन सामने आया है। मामले की जांच कर रही प्रयागराज क्राइम ब्रांच की टीम ने मेरठ में दबिश देकर जांच आगे बढ़ाई। टीम ने लिसाड़ी गेट क्षेत्र के अहमदनगर गली नंबर-3 और कोतवाली क्षेत्र में पहुंचकर कार्रवाई की। हालांकि, इस दौरान मुख्य आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लग सका। पुलिस ने आरोपी के परिजनों से पूछताछ कर मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला प्रयागराज के सिविल लाइन थाना क्षेत्र से जुड़ा है। सिविल लाइन थाने में 11 अक्टूबर 2025 को सहायक आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा राज्य कर की ओर से मुकदमा संख्या 419/2025 दर्ज कराया गया था। मुकदमे में प्रयागराज के मिर्जापुर नैनी रोड यमुनानगर निवासी विशाल कुमार को आरोपी बनाया गया था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने 10 मई 2025 को ‘विशाल ट्रेडर्स’ नाम से एक फर्म का पंजीकरण कराया था। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस फर्म के माध्यम से करीब 13.93 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दिखाई गई। इसी आधार पर करीब 2.50 करोड़ रुपये का जीएसटी क्लेम किया गया।
जब संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू की तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में पता चला कि जिस फर्म के नाम पर कारोबार दिखाया गया था, वह वास्तव में अस्तित्व में नहीं थी। अधिकारियों को संदेह हुआ कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण कराया गया और टैक्स लाभ लेने का प्रयास किया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फर्म के दस्तावेजों में हरियाणा के फरीदाबाद स्थित शिव-दुर्गा विहार सूरजकुंड का आधार कार्ड पता लगाया गया था, जबकि व्यापार स्थल प्रयागराज का दर्शाया गया था। इस अंतर के बाद जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपी की तलाश शुरू की।
प्रयागराज क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान आरोपी के मेरठ कनेक्शन की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने मेरठ पहुंचकर संभावित ठिकानों पर दबिश दी। पुलिस टीम ने लिसाड़ी गेट और कोतवाली क्षेत्र में कार्रवाई की, लेकिन आरोपी वहां नहीं मिला।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस अब फर्जी फर्म, दस्तावेजों और जीएसटी क्लेम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जीएसटी चोरी के मामलों में फर्जी फर्मों के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक खातों और व्यापारिक लेनदेन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करती हैं।
फिलहाल प्रयागराज क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरे फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, विभागीय स्तर पर भी जीएसटी चोरी से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है।





