उत्तर प्रदेश

5वीं की किताब में शामिल होगा ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल का सफर

nidhi
24 Sept 2026 8:06 AM IST
5वीं की किताब में शामिल होगा ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल का सफर
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा पांच के विद्यार्थियों की पर्यावरण अध्ययन की किताब में बदलाव किया गया है। अब बच्चे भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल के अंतरिक्ष सफर और उपलब्धियों के बारे में पढ़ेंगे। विद्यार्थियों में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से उनके जीवन और अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी जानकारी को पाठ्य सामग्री में शामिल किया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचा। साथ ही वे अंतरिक्ष में जाने वाले राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय बने। उनकी इस उपलब्धि ने देशभर में खासकर युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर उत्सुकता बढ़ाई है।
कक्षा पांच की पर्यावरण अध्ययन की पुस्तक में शुभांशु शुक्ल से संबंधित पाठ के माध्यम से बच्चों को उनके बचपन, शिक्षा, भारतीय वायुसेना के सफर, अंतरिक्ष यात्री बनने की तैयारी और मिशन के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल उनकी उपलब्धि बताना नहीं बल्कि बच्चों को विज्ञान, मेहनत, अनुशासन और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करना भी है।
शुभांशु शुक्ल ने जून 2025 में एक्सिओम मिशन-4 के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी। वह स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान से मिशन पर रवाना हुए थे। उन्होंने मिशन में पायलट की जिम्मेदारी संभाली और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों एवं अनुसंधान गतिविधियों में हिस्सा लिया। लगभग 18 दिनों के अंतरिक्ष मिशन के बाद उनकी टीम जुलाई 2025 में पृथ्वी पर वापस लौटी। इस मिशन को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना गया। शुभांशु शुक्ल को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के गगनयान कार्यक्रम के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों में भी शामिल किया गया है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मिले अनुभव को भारत के भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के लिए शुभांशु शुक्ल की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनका जन्म लखनऊ में हुआ। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का रास्ता चुना और भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बने। इसके बाद कठिन प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया से गुजरते हुए अंतरिक्ष मिशन तक पहुंचे।
बेसिक शिक्षा की किताब में उनके सफर को शामिल करने से बच्चों को अपने आसपास और देश से जुड़े आधुनिक उदाहरण के जरिए विज्ञान समझने का अवसर मिलेगा। अभी तक पर्यावरण अध्ययन की पुस्तकों में प्रकृति, पर्यावरण, पृथ्वी, जीव-जंतु और दैनिक जीवन से संबंधित विषय प्रमुखता से शामिल किए जाते रहे हैं। अब अंतरिक्ष यात्रा जैसे समकालीन विषय को जोड़ने से पुस्तक का दायरा और व्यापक होगा। शिक्षा विभाग का प्रयास है कि पाठ्यक्रम में ऐसी उपलब्धियों को जगह दी जाए जिनसे बच्चे पढ़ाई को वास्तविक जीवन से जोड़ सकें। शुभांशु शुक्ल की कहानी के माध्यम से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी यह जान सकेंगे कि विज्ञान, प्रशिक्षण और लगातार मेहनत के जरिए अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना भी साकार किया जा सकता है।
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