उत्तर प्रदेश

Muzaffarnagar में हरे पेड़ पर चली आरी, सरकारी जमीन की जांच शुरू

Ratna Netam
16 July 2026 9:15 PM IST
Muzaffarnagar  में हरे पेड़ पर चली आरी, सरकारी जमीन की जांच शुरू
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Morna मोरना : मोरना (मुजफ्फरनगर)। भोपा थाना क्षेत्र के गांव छछरौली में सरकारी और वन विभाग की भूमि पर खड़े हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि वन विभाग की जमीन पर लगे कई दशक पुराने विशालकाय तुन के पेड़ को बिना अनुमति काटकर गायब कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। शिकायत के बाद उपजिलाधिकारी (SDM) जानसठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए वन विभाग और राजस्व विभाग को संयुक्त जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, गांव छछरौली निवासी निशांत कुमार ने बुधवार को एसडीएम जानसठ को लिखित शिकायत देकर मामले की जानकारी दी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके खेत के पास वन विभाग की सरकारी भूमि स्थित है। इसी क्षेत्र के नजदीक गांव का कब्रिस्तान भी मौजूद है। वन भूमि पर वर्षों पुराना एक विशाल तुन का पेड़ खड़ा था, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए छाया का प्रमुख स्रोत था।

निशांत कुमार का आरोप है कि गांव के ही एक प्रभावशाली व्यक्ति ने निजी स्वार्थ के चलते इस पेड़ को अवैध रूप से कटवा दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पेड़ काटे जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना पर उप-निरीक्षक पिंटू चौधरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन मामला वन विभाग की भूमि से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने कार्रवाई का अधिकार वन विभाग का बताया।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने एसडीएम जानसठ के सामने पहुंचकर न्याय की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि पर खड़े पेड़ को बिना किसी अनुमति के काटना कानून का उल्लंघन है और इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम जानसठ ने वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर पेड़ काटने की स्थिति, भूमि के रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने को कहा गया है।

वन विभाग की टीम अब मामले में जांच कर यह पता लगाएगी कि पेड़ काटने के लिए कोई अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि पेड़ कटवाने में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके पीछे क्या कारण था।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी और वन भूमि पर लगे पेड़ों की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि बिना अनुमति के इस तरह पेड़ों की कटाई होती रही तो पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

फिलहाल एसडीएम के निर्देश के बाद वन विभाग और राजस्व विभाग की जांच शुरू होने की उम्मीद है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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