उत्तर प्रदेश

पीएम आवास योजना 2.0 पर सरकार का जोर, देरी पर होगी सख्ती

nidhi
7 Oct 2026 10:01 AM IST
पीएम आवास योजना 2.0 पर सरकार का जोर, देरी पर होगी सख्ती
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पीएम आवास योजना की समीक्षा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लाभार्थियों के चयन से लेकर मकानों के निर्माण तक पूरी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र और जरूरतमंद परिवार पक्के आवास की सुविधा से वंचित न रहे। योजना के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राज्य नगरीय विकास अभिकरण में आयोजित समीक्षा के दौरान मंत्री ने अधिकारियों से योजना की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों की पहचान पारदर्शी तरीके से की जाए और इसके बाद मकान निर्माण की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा कराया जाए। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आवेदन, सत्यापन, स्वीकृति और निर्माण के विभिन्न चरणों में आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। यदि किसी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन सामने आती है तो उसे लंबित रखने के बजाय संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर दूर किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर, निम्न आय और मध्यम आय वर्ग के पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने में सहायता करना है। केंद्र सरकार ने इस योजना को पांच वर्षों के दौरान एक करोड़ शहरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों तक सहायता पहुंचाने के लक्ष्य के साथ मंजूरी दी है। योजना के तहत ऐसे परिवार पात्र हो सकते हैं, जिनके पास देश में कहीं भी अपना पक्का मकान नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए वार्षिक आय सीमा तीन लाख रुपये तक, निम्न आय वर्ग के लिए तीन से छह लाख रुपये और मध्यम आय वर्ग के लिए छह से नौ लाख रुपये तक निर्धारित की गई है।
पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 को चार प्रमुख घटकों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इनमें लाभार्थी आधारित निर्माण, किफायती आवास भागीदारी, किफायती किराये के आवास और ब्याज सब्सिडी योजना शामिल हैं। अलग-अलग पात्रता और जरूरतों के आधार पर लाभार्थी इन घटकों का लाभ ले सकते हैं।
लाभार्थी आधारित निर्माण के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के ऐसे परिवारों को सहायता दी जाती है, जिनके पास अपनी जमीन है और वे उस पर घर बनाना चाहते हैं। वहीं किफायती आवास परियोजनाओं के जरिए समूह में आवास विकसित किए जाते हैं। योजना में किराये के आवास का विकल्प भी रखा गया है। यह व्यवस्था खासकर प्रवासी श्रमिकों, कामकाजी महिलाओं, छात्रों, औद्योगिक श्रमिकों और ऐसे लोगों के लिए है जो तत्काल मकान खरीदने या बनाने की स्थिति में नहीं हैं।
ब्याज सब्सिडी योजना के तहत पात्र परिवारों को गृह ऋण पर राहत देने का प्रावधान है। निर्धारित शर्तों के तहत पात्र लाभार्थियों को 1.80 लाख रुपये तक की केंद्रीय सहायता मिल सकती है। केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 तक पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत 18.77 लाख मकानों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी थी। इससे योजना के क्रियान्वयन को और गति मिलने की उम्मीद जताई गई थी। समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि लाभार्थियों को योजना की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो। पात्र परिवारों को आवेदन और दस्तावेजों की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी न हो तथा सभी जरूरी सूचनाएं स्पष्ट तरीके से दी जाएं।
एके शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवारों के अपने घर के सपने को पूरा करने में मदद की है। अब दूसरे चरण में भी अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि योजना केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार भी मिलता है। इसलिए निर्माण की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
बैठक में प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद, सचिव अनुज कुमार झा, सूडा निदेशक महेंद्र बहादुर सिंह और संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सरकार का जोर अब इस बात पर है कि स्वीकृत आवासों का निर्माण तेजी से पूरा हो और वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक योजना का फायदा पहुंचे। साथ ही पारदर्शिता और गुणवत्ता को बनाए रखते हुए किसी भी पात्र परिवार को आवास सुविधा से वंचित न रहने दिया जाए।
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