उत्तर प्रदेश

एनआरएचएम कर्मचारियों को नियमित करे सरकार, मायावती ने उठाया मुद्दा

nidhi
15 Oct 2026 7:29 AM IST
एनआरएचएम कर्मचारियों को नियमित करे सरकार, मायावती ने उठाया मुद्दा
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संविदाकर्मियों के समर्थन में उतरीं मायावती
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आउटसोर्सिंग तथा संविदा नियुक्तियों के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकारी विभागों में वर्षों से अस्थायी तौर पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नौकरी की व्यवस्था में शामिल करने की मांग की। मायावती ने विशेष रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत लंबे समय से सेवा दे रहे संविदाकर्मियों का मामला उठाया। उनका कहना है कि इन कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग में नियमित किया जाना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने बुधवार, 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने प्रदेश सरकार की अगले छह महीने के भीतर एक लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा का उल्लेख किया। मायावती का कहना था कि सरकार को नई नियुक्तियों के साथ उन लोगों के बारे में भी विचार करना चाहिए, जो पहले से विभिन्न सरकारी विभागों में अस्थायी आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी रोजगार की व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया।
मायावती ने अपने बयान में सरकारी तंत्र में आउटसोर्सिंग और संविदा के जरिए नियुक्तियों का विरोध किया। उन्होंने इस व्यवस्था को शोषणकारी बताते हुए कहा कि बसपा इसके खिलाफ है। उनके बयान का केंद्र केवल नई नौकरी पाने वाले अभ्यर्थी नहीं, बल्कि सरकारी विभागों में पहले से काम कर रहे अस्थायी कर्मचारी भी हैं। बसपा प्रमुख ने सरकार से मांग की कि रोजगार संबंधी कदम उठाते समय इन कर्मचारियों की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के संविदाकर्मियों की मांगों का विशेष उल्लेख किया। मायावती के अनुसार, कई वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग में नियमित करना उचित होगा। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया के साथ लंबे समय से कार्यरत कर्मियों के स्थायीकरण के मुद्दे पर भी विचार होना चाहिए। इस मांग के जरिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में संविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों का पक्ष राज्य सरकार के सामने रखा है।
बसपा प्रमुख ने बताया कि संबंधित संविदाकर्मी अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में धरना दे रहे हैं। उन्होंने मान्यवर कांशीराम ईको गार्डन के पास चल रहे प्रदर्शन का जिक्र किया। उनके अनुसार, कर्मचारी पिछले कई दिनों से स्थायीकरण समेत अन्य मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। मायावती ने इन मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से नियमितीकरण की दिशा में कदम उठाने को कहा। हालांकि, उनके बयान में धरने में शामिल कर्मचारियों की कुल संख्या का उल्लेख नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा की है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने की बात कही गई है। इसी घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने अस्थायी कर्मचारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने नई भर्तियों की घोषणा के संदर्भ में कहा कि वर्षों से सेवाएं दे रहे लोगों को भी स्थायी नौकरी की व्यवस्था में स्थान मिलना चाहिए।
मायावती की मांग का दायरा स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है। उन्होंने शुरुआत में सभी सरकारी विभागों में वर्षों से अस्थायी तौर पर कार्यरत लोगों का उल्लेख किया। इसके बाद स्वास्थ्य मिशन के संविदाकर्मियों को नियमित करने की विशेष मांग रखी। उनके बयान में दो स्तरों पर बात सामने आई है—विभिन्न विभागों के अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी व्यवस्था में शामिल करना और लंबे समय से सेवा दे रहे स्वास्थ्य संविदाकर्मियों के नियमितीकरण पर विचार करना।
फिलहाल यह बसपा प्रमुख की ओर से राज्य सरकार के सामने रखी गई मांग है। उपलब्ध विवरण में इस मांग पर सरकार की स्वीकृति, नियमितीकरण का आदेश या लागू करने की कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है। कर्मचारियों के स्थायीकरण के लिए पात्रता और प्रक्रिया से जुड़ी कोई नई घोषणा भी इस बयान का हिस्सा नहीं है। इसलिए इसे कर्मचारियों के समर्थन में उठाई गई राजनीतिक मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए। बसपा प्रमुख ने नई सरकारी नौकरियों की घोषणा के बीच पहले से काम कर रहे कर्मचारियों की स्थिति पर ध्यान दिलाया है। उनका जोर इस बात पर है कि लंबे समय की सेवा के बाद भी अस्थायी व्यवस्था में बने कर्मचारियों के मामले पर सरकार विचार करे। अब नियमितीकरण की मांग पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और संबंधित विभागों के किसी निर्णय से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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