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Gorakhpur : विभागीय तालमेल की कमी से करोड़ों की जलापूर्ति पाइपलाइन खतरे में

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: शहर में सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें जनता के करोड़ों रुपये खर्च कर बिछाई गई जलापूर्ति पाइपलाइन अब सड़क निर्माण कार्य के कारण क्षतिग्रस्त हो रही है। इस घटना ने विकास कार्यों की योजना और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम की ओर से हड़हवा फाटक से गोरखनाथ थाना होते हुए एचएन सिंह चौराहे तक करीब सात करोड़ रुपये की लागत से पानी की पाइपलाइन बिछाई गई थी। इस पाइपलाइन का उद्देश्य क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना और लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना था।
हालांकि, अब लोक निर्माण विभाग द्वारा इसी मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य के दौरान पाइपलाइन जगह-जगह से टूट रही है, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर जहां सरकार विकास कार्यों पर भारी भरकम राशि खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण वही कार्य बार-बार नुकसान का कारण बन रहे हैं। लोगों ने इसे सार्वजनिक धन की बर्बादी बताया है।
सूत्रों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण के दौरान खुदाई और निर्माण कार्य से पाइपलाइन कई स्थानों पर प्रभावित हुई है। इससे न केवल पानी की आपूर्ति बाधित होने की संभावना है, बल्कि भविष्य में मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय होता, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था। पाइपलाइन बिछाने और सड़क निर्माण जैसी परियोजनाओं के बीच तालमेल बेहद जरूरी होता है, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पाइपलाइन की तुरंत मरम्मत की जाए और भविष्य में इस तरह की लापरवाही न दोहराई जाए। साथ ही उन्होंने दोनों विभागों से एक साझा योजना बनाकर काम करने की अपील की है।
नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा की संभावना जताई जा रही है, ताकि नुकसान की भरपाई और आगे की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
फिलहाल स्थिति यह है कि विकास कार्यों के बीच आपसी समन्वय की कमी के कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और करोड़ों रुपये की परियोजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।





