उत्तर प्रदेश

Gorakhpur: सशक्त बनकर टीबी मरीजों का सहयोग कर रहे दिव्यांग

Admindelhi1
31 Jan 2025 12:45 PM IST
Gorakhpur: सशक्त बनकर टीबी मरीजों का सहयोग कर रहे दिव्यांग
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गोरखपुर: जिले में रहने वाले दो दिव्यांग खुद को सशक्त बनाकर टीबी रोगियों का सहयोग कर रहे. मोरटा निवासी राजकुमार और कलछीना के जोगेश्वर ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर अब तक 1300 मरीजों को टीबी से मुक्ति दिलाने में भूमिका निभा चुके हैं.

मोरटा निवासी राजकुमार एक पैर से दिव्यांग हैं. दो-तीन साल की उम्र में दाएं पैर पर पोलियो का वार हुआ. इसके बाद 70 प्रतिशत दिव्यांग हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. इसके बाद 15 साल की उम्र में टीबी ने जकड़ लिया. नियमित उपचार और खानपान का ध्यान रखने पर वह छह माह में स्वस्थ हो गए. टीबी अधिकारियों के प्रेरित करने पर उन्होंने क्षय रोग से लड़ाई लड़ रहे अपने जैसे अन्य लोगों को भी बीमारी मुक्त करने का बीड़ा उठाया. बैसाखी के सहारे अपने जरूरी कामों को निपटाने के साथ ही खुद टीबी मरीजों को दवा खिलाते.

जानकारी के अनुसार, बीते 17 साल में वह 500 मरीजों को टीबी से मुक्ति दिला चुके हैं. उनके माध्यम से इलाज करा चुके मरीज अलका, मनीष, देवेंद्र, तब्बसुम, रेनू और आरती का कहना है कि क्षय रोग मुक्त होने के लिए राजकुमार का विशेष योगदान रहा. जिला क्षय रोग अधिकारी का कहना है कि ऐसे लोगों को टीबी चैंपियन के रूप में सम्मानित किया जाता है.

कई बार सम्मानित भी हो चुके: राजकुमार और जोगेश्वर को कई बार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सम्मानित किया जा चुका है. राजकुमार को पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी सम्मानित कर चुके हैं, जबकि जोगेश्वर को सीएमओ ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल यादव ने बताया कि क्षय रोग उन्मूलन में चैंपियन का सहयोग लिया जा रहा.

जोगेश्वर अब डॉक्टर के नाम से प्रसिद्ध: गांव कलछीना निवासी जोगेश्वर को 16 साल पहले टीबी संक्रमण हो गया था. नियमित दवा के सेवन से जोगेश्वर छह माह बाद ठीक हो गए. इसके बाद उन्होंने मुस्लिम बाहुल्य गांव में संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग कराकर इलाज शुरू कराया. दावा है कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर 800 मरीजों को ठीक करा चुके हैं. हाल ही में टीबी मुक्त हुए मरीज सन्नो, ओसामा, नन्ही, नब्बो, चांदनी और सायबा ने बताया कि जोगेश्वर हर दूसरे दिन दवा पूछने के लिए आते थे. अब वह डॉक्टर के नाम से प्रसिद्ध हैं.

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