उत्तर प्रदेश

UP के शिक्षकों के लिए खुशखबरी 30 सितंबर तक प्रमोशन पूरा

Ratna Netam
12 Aug 2026 7:13 PM IST
UP  के शिक्षकों के लिए खुशखबरी 30 सितंबर तक प्रमोशन पूरा
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। करीब 4350 शिक्षकों की पदोन्नति लंबे समय से अटकी हुई है, लेकिन अब उनका इंतजार जल्द खत्म होने की उम्मीद है। राजकीय शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बुधवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल से मुलाकात की। इस दौरान शिक्षकों की लंबित पदोन्नति समेत कई मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। निदेशक ने शिक्षकों को लिखित आश्वासन दिया कि 30 सितंबर तक हर हाल में प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
राजकीय शिक्षक संघ के संरक्षक रामेश्वर पांडेय के मुताबिक, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड से प्रवक्ता पद पर बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पुरुष संवर्ग में करीब 2200 शिक्षकों और महिला संवर्ग में लगभग 1800 शिक्षकों की प्रोन्नति लंबित है। पुरुष संवर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति पिछले करीब 15 वर्षों से नहीं हुई है, जबकि महिला संवर्ग में भी लगभग 10 वर्षों से पदोन्नति का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा प्रवक्ता पद से राजपत्रित अधिकारी के पद पर करीब 350 शिक्षकों की पदोन्नति पिछले दो वर्षों से लंबित बताई जा रही है।
लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण शिक्षकों में नाराजगी बनी हुई थी। राजकीय शिक्षक संघ की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा था। शिक्षकों का कहना है कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद पदोन्नति नहीं मिलने से न केवल उनके करियर पर असर पड़ रहा है, बल्कि उन्हें अपने हक के पद और जिम्मेदारियां भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
शिक्षकों के अनुसार एलटी ग्रेड से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए पांच वर्ष की सेवा पूरी करने का प्रावधान है। वहीं प्रवक्ता पद पर 12 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों को इंटर कॉलेज में उप प्रधानाचार्य अथवा हाईस्कूल में प्रधानाचार्य बनाए जाने का प्रावधान बताया गया है। प्रवक्ता पद पर सीधे भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए भी पदोन्नति से जुड़े अलग सेवा मानक निर्धारित हैं। तीन वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें इंटर कॉलेज में उप प्रधानाचार्य अथवा हाईस्कूल में प्रधानाचार्य बनाए जाने का प्रावधान है।
इसके अलावा संबंधित पद पर दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य या बेसिक शिक्षा अधिकारी यानी बीएसए के पद पर पदोन्नति का रास्ता खुलता है। ऐसे में लंबे समय से पदोन्नति प्रक्रिया रुकी होने के कारण इसका असर शिक्षकों के साथ-साथ विद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे पर भी पड़ रहा है। संघ का कहना है कि पदोन्नति की प्रक्रिया समय पर पूरी होने से शिक्षकों को उनके अनुभव और योग्यता के अनुरूप जिम्मेदारी मिल सकेगी।
बुधवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मुलाकात के दौरान शिक्षकों ने पदोन्नति के अलावा अन्य समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। संघ ने आकांक्षी जिलों में तैनात शिक्षकों के तबादले की मांग रखी। इसके साथ ही तदर्थ राजकीय शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के बाद तदर्थ सेवा का लाभ दिए जाने समेत कई मांगों पर भी चर्चा की गई।
निदेशक की ओर से 30 सितंबर तक पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद राजकीय शिक्षक संघ ने फिलहाल अपना प्रस्तावित आंदोलन आगे बढ़ा दिया है। हालांकि शिक्षक संगठन अब प्रक्रिया पर नजर रखेगा और तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आगे की रणनीति तय की जा सकती है।
इस बीच उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के नवाचारों को बढ़ावा देने की भी तैयारी की जा रही है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी की ओर से उद्गम पोर्टल तैयार किया गया है। इस पोर्टल पर शिक्षकों द्वारा किए जा रहे नवाचारों के वीडियो अपलोड किए जाएंगे, ताकि दूसरे शिक्षक भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने विद्यालयों में उन्हें लागू कर सकें।
बताया गया है कि प्रदेश के कई परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद रोचक और प्रभावी तरीके से पढ़ाई करा रहे हैं। कई शिक्षक छात्र संख्या बढ़ाने, बच्चों की उपस्थिति सुधारने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग प्रयोग कर रहे हैं। उद्गम पोर्टल के माध्यम से ऐसे सफल प्रयोगों को दूसरे विद्यालयों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
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