उत्तर प्रदेश

यूपी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी LTC में छुट्टी नकदीकरण की सुविधा मंजूर

Ratna Netam
10 Aug 2026 9:58 PM IST
यूपी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी LTC में छुट्टी नकदीकरण की सुविधा मंजूर
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अवकाश यात्रा सुविधा यानी LTC के नियमों में बदलाव कर बड़ी राहत दी है। अब सरकारी कर्मचारियों को LTC का लाभ लेने के लिए कम से कम 15 दिन का अर्जित अवकाश लेना अनिवार्य नहीं होगा। सरकार ने इस बाध्यता को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही LTC के दौरान स्वीकृत अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा को भी मंजूरी दी गई है। वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।
यह फैसला वेतन समिति की सिफारिशों पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के निर्णय के बाद लिया गया है। नए प्रावधान के लागू होने के बाद कर्मचारियों को अवकाश यात्रा सुविधा का लाभ लेने के लिए पहले की तरह 15 दिन का अर्जित अवकाश लेना जरूरी नहीं होगा। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो LTC के दौरान लंबी अवधि की छुट्टी लेने के बजाय सीमित अवधि का अवकाश लेकर यात्रा करना चाहते हैं।
नए नियमों के तहत LTC के दौरान स्वीकृत अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। यानी पात्र कर्मचारी यात्रा सुविधा का लाभ लेते समय निर्धारित सीमा तक अर्जित अवकाश का नकदीकरण करा सकेंगे। इससे कर्मचारियों को यात्रा के साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा। सरकार के इस फैसले को लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों की ओर से की जा रही मांगों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों कामगारों और सेवायोजकों के लिए भी बड़ा फैसला लिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 4 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र कर्मचारियों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा। यह प्रावधान क्षेत्र, प्रतिष्ठान या नियोजन की प्रकृति से अलग लागू होगा।
नई मजदूरी संहिता में कुल वेतन में मूल वेतन की हिस्सेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। इसके तहत कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूल वेतन रखने का प्रावधान है। इससे कर्मचारियों की वेतन संरचना में बदलाव आने की संभावना है। मूल वेतन के आधार पर निर्धारित होने वाले कई लाभों और अंशदानों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
नई व्यवस्था में न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने के लिए कर्मचारी के कौशल, काम की प्रकृति और भौगोलिक क्षेत्र को आधार बनाया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी केंद्र सरकार की ओर से तय फ्लोर वेज से कम नहीं हो सकेगी। श्रमिकों के वेतन से की जाने वाली वैधानिक कटौती की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है।
संविदा श्रमिकों को लेकर भी नियमों में स्पष्टता लाई गई है। संविदा श्रमिकों की मजदूरी और बोनस के भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता पर होगी। इसके अलावा किसी कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसके बकाया भुगतान को नामित व्यक्ति और उसके अभाव में कानूनी उत्तराधिकारी को देने का प्रावधान किया गया है।
नई मजदूरी संहिता में नियोक्ताओं के लिए भी अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है। पहली बार नियमों के उल्लंघन के कुछ मामलों में उपशमन यानी निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले का निपटारा करने का प्रावधान होगा। इसके अलावा रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को सरल करते हुए अब केवल तीन रजिस्टर और दस प्रपत्र रखने की व्यवस्था की गई है। वार्षिक विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा किए जा सकेंगे।
श्रम निरीक्षण व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। नई प्रणाली के तहत ऑनलाइन और जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी। श्रम निरीक्षक की भूमिका को बदलकर 'निरीक्षक-सह-सुविधा प्रदाता' की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि नियोक्ताओं और कर्मचारियों को नियमों के संबंध में आवश्यक सलाह और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना भी है।
विवादों की स्थिति में विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार से संबंधित उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक 2020 को भारत सरकार से वापस लेने के श्रम विभाग के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। नई श्रम संहिताओं के प्रभावी होने के कारण पुरानी नियमावली के स्वतः निष्प्रभावी होने को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है।
कुल मिलाकर योगी सरकार के हालिया फैसलों से जहां एक ओर सरकारी कर्मचारियों को LTC के नियमों में राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर नई मजदूरी संहिता के जरिए कर्मचारियों और श्रमिकों की वेतन व्यवस्था को लेकर भी कई बदलाव किए गए हैं। LTC में 15 दिन की छुट्टी की बाध्यता खत्म होने और 10 दिन तक अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा से सरकारी कर्मचारियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
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