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उत्तर प्रदेश
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए खुशखबरी सैलरी से लेकर छुट्टी तक नए नियम
Ratna Netam
2 Sept 2026 5:03 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों और संस्थानों में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को **उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS)** के पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ किया। इसके साथ ही निगम का लोगो भी जारी किया गया। नई व्यवस्था में कर्मचारियों को हर महीने की **1 से 5 तारीख के बीच सीधे बैंक खाते में पारिश्रमिक**, EPF और ESI का नियमित अंशदान, महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव और स्वास्थ्य व बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस व्यवस्था का लाभ प्रदेश के **3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों** को मिलेगा। उनके परिवारों को भी जोड़ लिया जाए तो सरकार के मुताबिक लगभग 17 से 20 लाख लोगों तक इसका सुरक्षा दायरा पहुंच सकता है। सरकार का दावा है कि नई प्रणाली से आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर वेतन, उपस्थिति, सामाजिक सुरक्षा और शिकायतों तक की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और डिजिटल होगी।
हर महीने 5 तारीख तक खाते में आएगी सैलरी
आउटसोर्स कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायतों में समय पर वेतन नहीं मिलना शामिल रहा है। कई मामलों में एजेंसी से भुगतान मिलने में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
नई व्यवस्था में इसे बदलने की कोशिश की गई है।
UPCOS की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को **हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक का समयबद्ध भुगतान** सुनिश्चित किया जाएगा। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में होगा।
मुख्यमंत्री ने भी लॉन्चिंग कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि अब कर्मचारियों का पारिश्रमिक महीने की पांच तारीख तक उनके बैंक खाते में पहुंचना चाहिए।
इससे एजेंसियों के स्तर पर वेतन रोकने या भुगतान में अनावश्यक देरी जैसी शिकायतों पर अंकुश लगाने की कोशिश होगी।
EPF और ESI का पैसा भी नियमित जमा होगा
नई व्यवस्था केवल समय पर सैलरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों के **EPF और ESIC** से जुड़े अंशदान की भी निगरानी की जाएगी।
UPCOS के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार कर्मचारियों के EPF और ESIC खाते खुलवाकर निर्धारित अंशदान समय पर जमा कराना सुनिश्चित करना निगम की जिम्मेदारियों में शामिल है।
योगी सरकार पहले भी कह चुकी है कि पुरानी आउटसोर्स व्यवस्था में कई बार एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों को पूरा पारिश्रमिक नहीं मिलने और EPF-ESI की रकम समय पर जमा नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आती थीं। जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में भी इन्हीं समस्याओं को निगम बनाने की प्रमुख वजह बताया गया था।
अब डिजिटल व्यवस्था में कर्मचारी अपने भुगतान और सेवा से जुड़ी जानकारी एक ही जगह देख सकेंगे।
महिला कर्मचारियों को मिलेगी मैटरनिटी लीव
आउटसोर्स व्यवस्था में काम करने वाली महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
सरकार ने महिला आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए **मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव सहित लागू वैधानिक सेवा लाभ सुनिश्चित करने** की बात कही है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से काम करने के कारण सेवा शर्तों और छुट्टियों को लेकर एकरूपता की कमी की शिकायतें रही हैं।
अब नई व्यवस्था में कर्मचारियों की छुट्टियों और अन्य सेवा संबंधी जानकारी भी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जा सकेगी।
इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक की सुरक्षा
स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ESI अंशदान के जरिए कर्मचारियों को ESI अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी। अगर वहां संबंधित इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है तो व्यवस्था को आयुष्मान भारत से जोड़कर कर्मचारी और उसके परिवार को **पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य सुरक्षा** उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों के परिवारों पर गंभीर बीमारी या इलाज की स्थिति में पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
हालांकि इन लाभों की व्यावहारिक पात्रता और इस्तेमाल संबंधित योजना तथा लागू नियमों के अनुसार होगा।
दुर्घटना होने पर 20 से 50 लाख तक बीमा कवर
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए दुर्घटना बीमा का दायरा भी बढ़ाया गया है।
बुधवार को अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक कर्मचारियों को **20 लाख से 50 लाख रुपये तक दुर्घटना बीमा कवर** जैसी सुविधाओं से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
लॉन्चिंग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को बढ़े हुए पारिश्रमिक के चेक सौंपने के साथ दुर्घटना बीमा से जुड़ी सुविधा भी प्रदान की।
इस तरह नई व्यवस्था में सरकार केवल मासिक पारिश्रमिक पर नहीं बल्कि कर्मचारी और उसके परिवार की सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर दे रही है।
एजेंसी अब कर्मचारी के पैसे से नहीं काट सकेगी सर्विस चार्ज
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आउटसोर्स एजेंसियों की जवाबदेही तय करना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार आउटसोर्स एजेंसी को अलग से सर्विस चार्ज देगी और एजेंसी कर्मचारियों के पैसे से इसकी कटौती नहीं कर सकेगी।
पुरानी व्यवस्था में वेतन से कथित कटौती और कर्मचारियों को स्वीकृत पारिश्रमिक से कम रकम मिलने जैसी शिकायतें आती रही थीं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2025 में भी कहा था कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों के विकेंद्रीकृत चयन के कारण समय पर वेतन नहीं मिलने, वेतन कटौती, EPF-ESI लाभों से वंचित रहने और उत्पीड़न जैसी शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्रीकृत निगम की व्यवस्था तैयार की गई।
मनमर्जी से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी कंपनी
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा से जुड़ा भी बड़ा प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक कोई आउटसोर्स कंपनी अपने स्तर पर सीधे किसी कर्मचारी को सेवा से नहीं हटा सकेगी। कर्मचारी को हटाने से पहले संबंधित विभाग और सरकार की प्रक्रिया का पालन करना होगा। शिकायत की जांच की जाएगी और अगर रिपोर्ट गलत पाई जाती है तो कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा।
इस व्यवस्था की बुनियाद सरकार ने पहले ही रख दी थी। जुलाई 2025 के आधिकारिक निर्देश में मुख्यमंत्री ने कहा था कि चयन के बाद किसी आउटसोर्स कर्मचारी को संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी की सहमति के बिना सेवा से मुक्त न किया जाए।
इससे निजी एजेंसियों की मनमानी पर नियंत्रण और कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल होगी भर्ती से लेकर सैलरी तक की व्यवस्था
UPCOS को एक तरह के **सिंगल विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म** के रूप में विकसित किया गया है।
इसके जरिए कर्मचारी की प्रोफाइल, नियुक्ति, भुगतान और सेवा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। कर्मचारी अपने अकाउंट, उपस्थिति, वेतन और कटौती से जुड़ी जानकारी देख सकेगा।
अगर कर्मचारी को वेतन, EPF, ESI या किसी दूसरी सेवा से संबंधित शिकायत है तो ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति ट्रैक करने की सुविधा भी व्यवस्था का हिस्सा है।
इससे सरकार के पास विभागवार, जिलेवार और श्रेणीवार कर्मचारियों का डिजिटल डेटा उपलब्ध होगा और मानव संसाधन की जरूरत का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
भर्ती में लागू होगा आरक्षण
नई आउटसोर्स व्यवस्था में भर्ती प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है।
UPCOS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार **SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांगजन, महिलाओं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और भूतपूर्व सैनिकों** के लिए नियमानुसार आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
आउटसोर्स एजेंसियों का चयन भी विभागों के स्तर पर सीधे करने के बजाय GeM के माध्यम से अधिकृत एजेंसियों के जरिए किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य इससे भर्ती में पारदर्शिता बढ़ाना और अलग-अलग विभागों में चल रही अलग-अलग प्रणालियों को एक समान व्यवस्था के तहत लाना है।
श्रेणी और योग्यता के आधार पर तय होगा पारिश्रमिक
नई व्यवस्था में कर्मचारियों का पारिश्रमिक उनकी श्रेणी और शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप निर्धारित करने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, मानदेय, ग्रेच्युटी, बीमा और सेवा लाभ की डिजिटल निगरानी की जाएगी। कर्मचारी अपने सेवा विवरण और भुगतान की जानकारी ऑनलाइन देख सकेगा।
इससे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अलग-अलग एजेंसियों द्वारा अलग-अलग तरीके से भुगतान किए जाने की समस्या को कम करने की कोशिश की जाएगी।
मौजूदा कर्मचारियों की सेवा जारी रखने पर जोर
UPCOS व्यवस्था लागू होने के बाद पहले से काम कर रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई एजेंसियां आने के कारण मौजूदा कर्मचारियों की सेवाएं बाधित न हों। UPCOS के आधिकारिक पोर्टल में भी **रोजगार की निरंतरता** को निगम के प्रमुख कार्यों में शामिल किया गया है।
जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था कि वर्तमान कर्मचारियों की सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए और चयन प्रक्रिया में उनके अनुभव को वेटेज दिया जाए।
यह उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो कई वर्षों से अलग-अलग सरकारी विभागों में आउटसोर्स आधार पर काम कर रहे हैं।
3.5 लाख कर्मचारियों को सीधे फायदा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉन्चिंग कार्यक्रम में कहा कि नई व्यवस्था से प्रदेश के **3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों** को फायदा मिलेगा। परिवार के सदस्यों को शामिल करने पर इसका प्रभाव लगभग 17 से 20 लाख लोगों तक पहुंचने का अनुमान सरकार ने जताया है।
उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि नगर निकायों, अस्पतालों, सचिवालयों, पंप संचालन और शासन व्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें केवल रोजगार देना नहीं बल्कि काम के अनुरूप सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और समय पर अधिकार उपलब्ध कराना है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की शुरुआत के बाद सबसे बड़ा बदलाव कर्मचारियों और एजेंसियों के बीच व्यवस्था की निगरानी में दिखाई देगा।
अब वेतन पांच तारीख तक सीधे बैंक खाते में पहुंचाने, EPF और ESI समय पर जमा कराने, महिलाओं को मैटरनिटी लीव, आरक्षण व्यवस्था लागू करने, डिजिटल सेवा रिकॉर्ड बनाने, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और मनमाने तरीके से सेवा समाप्त करने पर रोक जैसे प्रावधानों को एक केंद्रीकृत सिस्टम के तहत लागू करने का लक्ष्य है।
UPCOS का गठन पहले ही किया जा चुका था और इसे 2 जनवरी 2026 को गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया था। अब पोर्टल और वेबसाइट के शुभारंभ के साथ इसकी व्यवस्था कर्मचारियों तक पहुंचाने का चरण शुरू हुआ है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए इसका वास्तविक असर आने वाले महीनों में साफ होगा, जब अलग-अलग सरकारी विभाग और एजेंसियां इस डिजिटल व्यवस्था से पूरी तरह जुड़ेंगी। फिलहाल **5 तारीख तक सैलरी, नियमित EPF-ESI, मैटरनिटी लीव, स्वास्थ्य सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और नौकरी से हटाने के लिए तय प्रक्रिया** जैसे प्रावधान लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में सामने आए हैं।
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