उत्तर प्रदेश

डॉग ओनर्स के लिए अच्छी खबर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई आसान

Ratna Netam
13 Sept 2026 7:15 PM IST
डॉग ओनर्स के लिए अच्छी खबर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई आसान
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बरेलीशहरों में कुत्ता पालने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। नगर निगम ने पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाया है। अब लोगों को अपने पालतू कुत्ते का पंजीकरण कराने के लिए बार-बार नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑनलाइन सुविधा के जरिए घर बैठे आवेदन किया जा सकेगा। इससे जहां पालतू पशु मालिकों का समय बचेगा, वहीं नगर निगम के पास शहर में पाले जा रहे कुत्तों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाना है। इसके जरिए आवेदन से लेकर जरूरी दस्तावेज जमा करने और निर्धारित शुल्क के भुगतान जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन पूरी की जा सकेंगी। हालांकि अलग-अलग नगर निगमों में नियम, शुल्क और आवश्यक दस्तावेज अलग हो सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित निगम के आधिकारिक निर्देश देखना जरूरी होगा।
घर बैठे ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन
ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद पालतू कुत्ते के मालिक को नगर निगम के निर्धारित पोर्टल या ऑनलाइन सेवा पर जाना होगा। वहां पेट डॉग रजिस्ट्रेशन से संबंधित विकल्प चुनकर आवेदन फॉर्म भरना होगा।
आवेदन में मालिक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और पालतू कुत्ते से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है। इसके साथ कुत्ते की फोटो और जरूरी स्वास्थ्य दस्तावेज भी अपलोड करने पड़ सकते हैं।
सभी जानकारी भरने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद आवेदन संबंधित विभाग के पास पहुंच जाएगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा किया जा सकेगा।
किन दस्तावेजों की पड़ सकती है जरूरत?
पालतू कुत्ते के रजिस्ट्रेशन में आमतौर पर मालिक की पहचान और पते से जुड़े दस्तावेजों के साथ कुत्ते का वैक्सीनेशन रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है। खासतौर पर रेबीज से बचाव का टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से जरूरी माना जाता है।
इसके अलावा कुत्ते की हाल की तस्वीर, मालिक का मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी मांगी जा सकती है। नगर निगम की स्थानीय व्यवस्था के मुताबिक दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है।
इसलिए लोगों को आवेदन करने से पहले संबंधित नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
ऑनलाइन फीस जमा करने की सुविधा
डिजिटल प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन फीस भी ऑनलाइन जमा करने की सुविधा मिल सकती है। इससे लोगों को भुगतान के लिए अलग से कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी।
भुगतान पूरा होने के बाद उसकी रसीद ऑनलाइन प्राप्त की जा सकेगी। आवेदन मंजूर होने पर पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र भी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जा सकता है।
इस व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवेदन की स्थिति को ट्रैक करना भी आसान होगा।
क्यों जरूरी है पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन?
शहरी क्षेत्रों में पालतू कुत्तों की संख्या बढ़ने के साथ उनके व्यवस्थित रिकॉर्ड की जरूरत भी बढ़ी है। रजिस्ट्रेशन के जरिए नगर निगम को पता रहता है कि उसके क्षेत्र में कितने पालतू कुत्ते हैं और उनके मालिक कौन हैं।
किसी पालतू कुत्ते के खो जाने की स्थिति में भी रजिस्ट्रेशन से पहचान में मदद मिल सकती है। इसके अलावा टीकाकरण रिकॉर्ड होने से पशु और इंसानों दोनों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम कम करने में सहायता मिलती है।
रजिस्ट्रेशन व्यवस्था जिम्मेदार पेट ओनरशिप को भी बढ़ावा देती है।
रेबीज वैक्सीनेशन पर खास जोर
कुत्ता पालने वाले लोगों के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। खासकर एंटी-रेबीज वैक्सीन को समय पर लगवाना चाहिए।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र मांगे जाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पालतू कुत्तों का जरूरी टीकाकरण कराया गया है।
मालिकों को अपने पालतू जानवर के वैक्सीनेशन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक टीके समय पर लगवाने चाहिए।
कार्यालय के चक्कर से मिलेगी राहत
ऑफलाइन व्यवस्था में लोगों को फॉर्म लेने, दस्तावेज जमा करने और शुल्क भुगतान जैसी प्रक्रियाओं के लिए निगम कार्यालय जाना पड़ सकता था। ऑनलाइन सुविधा से इन परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है।
खासकर नौकरीपेशा और बुजुर्ग पेट ओनर्स के लिए यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है। मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए आवेदन करने से समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
निगम के पास तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फायदा केवल पालतू कुत्ते के मालिकों को ही नहीं, बल्कि नगर निगम को भी मिलेगा। डिजिटल डेटाबेस बनने से रिकॉर्ड का प्रबंधन आसान होगा।
निगम के पास पंजीकृत कुत्तों और उनके टीकाकरण से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रह सकेगी। इससे भविष्य में पेट डॉग से संबंधित नीतियां और जागरूकता अभियान तैयार करने में भी सहायता मिल सकती है।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
जिन शहरों में पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, वहां बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर संबंधित नगर निकाय के नियमों के तहत कार्रवाई या जुर्माने का प्रावधान हो सकता है।
इसीलिए पेट ओनर्स को अपने शहर के स्थानीय नियमों की जानकारी रखना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन की वैधता समाप्त होने पर समय से उसका नवीनीकरण भी कराया जाना चाहिए।
सोसायटी में रहने वालों की भी जिम्मेदारी
अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले कुत्ता मालिकों को रजिस्ट्रेशन के साथ साफ-सफाई और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।
कुत्ते को बाहर ले जाते समय स्थानीय नियमों का पालन करना और आसपास के लोगों की सुविधा का ध्यान रखना जिम्मेदार पेट ओनरशिप का हिस्सा है।
पेट ओनर्स के लिए बड़ी राहत
नगर निगम की ऑनलाइन व्यवस्था से पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने में मदद मिलेगी। लोगों को घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से ज्यादा पेट ओनर्स को अपने कुत्तों का पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड, वैक्सीनेशन की जानकारी और मालिक की पहचान उपलब्ध होने से प्रशासन को भी बेहतर व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि आवेदन करने से पहले अपने नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर शुल्क, दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन से जुड़े मौजूदा नियम जरूर जांच लेने चाहिए।
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