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Ghaziabad: मधुबन-बापूधाम के फ्लैटों की दीवारें पांच साल में ही होने लगीं जर्जर

गाजियाबाद: मधुबन-बापूधाम योजना में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से तैयार किए गए फ्लैट पांच साल में ही जवाब देने लगे हैं। योजना के तहत 2019 में मधुबन-बापूधाम में 3496 फ्लैट बनकर तैयार हुए थे। इसमें से लगभग 75 प्रतिशत फ्लैट बिक भी चुके हैं, लेकिन पांच साल में ही दीवारों से प्लास्टर टूटने लगा है। फर्श से रेत निकल रहा है और सोसायटी के बाहर की दीवारें भी खराब होने लगीं हैं।
फ्लैट में रहने वाले आकाश यादव ने बताया कि 2020 में उन्होंने योजना में 2 बीएचके फ्लैट लिया था। आने के बाद से ही फ्लैट के दरवाजों के पास से प्लास्टर टूटकर गिरने लगा। किचन में भी टाईल्स और प्लेटफार्म में भी दरारें आने लगीं। स्विच बोर्ड और तारों की भी गुणवत्ता से यहां के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार इसको दुरुस्त कराने के लिए जीडीए के कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद भी यहां की समस्याएं दूर नहीं हो सकीं।
वहीं प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि तीन साल में ही यहां फ्लैट के बाहरी दीवारों से पेंट और प्लास्टर टूटकर गिरने लगा। फ्लैट के अंदर भी समस्याओं का अंबार है। फ्लैटों को तैयार करते समय मानकों को ध्यान में नहीं रखा गया है और न ही गुणवत्ता वाले सामान लगाए गए। इसकी वजह से यहां फ्लैट खरीदने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। बिल्डर ने फ्लैट तैयार करके जैसे-तैसे बस हैंडओवर कर दिया है।
2024 में शुरू हुई थी योजना: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने 2004 में करीब 1234 एकड़ जमीन पर मधुबन-बापूधाम योजना शुरू की थी। करीब 10 साल तक इस योजना पर काम चलता रहा। 2012-13 में बसावट शुरू हुई। यहां 7311 ईडब्ल्यूएस और 1072 एलआईजी भवन बनाए गए। वहीं, एमआईजी, मिनी एमआईजी, 16 मंजिला 1122 टू-बीएचके, थ्री बीएचके और थ्री प्लस स्टडी मकान बनाए गए। 10 सालों में पांच से 10 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। जो फ्लैट 2011-12 में नौ लाख का था उसकी कीमत मौजूदा समय में 15 लाख तक पहुंच गई है।
आठ साल में 296 में से बिके केवल 50 प्लैट: मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में 2016 में 296 समाजवादी आवास बनाए गए। बहुमंजिला इमारतों में बने इन भवनों की शुरूआती कीमत 26 लाख 70 हजार रखी गई थी। आठ साल बाद मौजूदा समय में इन फ्लैटों की कीमत 33 लाख 79 हजार पहुंच चुकी है। आठ सालों में 50 ही फ्लैट बिक सके हैं। जीडीए हर बार रिक्त संपत्तियों की बिक्री के लिए नीलामी शिविर लगाता है लेकिन इस योजना में मकान के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि 119 लोगों ने आवेदन किया था। आवंटन भी हो गया था लेकिन नोटबंदी के बाद इन लोगों ने आवंटन निरस्त करा लिया था। कोरोना काल में भी इस योजना के मकानों की बिक्री की रफ्तार धीमी रही।
योजना पर एक नजर:
-2004 में 1234 एकड़ जमीन का अर्जन शुरू हुआ।
-पहले चरण में 800 एकड़ जमीन फिर 153 एकड़ जमीन किसानों से लेकर अधिग्रहण किया गया।
-उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद 201 एकड़ जमीन का फिर अधिग्रहण किया गया।
-योजना को ए, बी, सी, डी, ई, एफ पॉकेट में विभाजित कर निर्माण कराया गया।
-साल 2013-14 से बसावट शुरू हुई
योजना के तहत अभी पूरी तरह से फ्लैट नहीं बिके हैं। बचे हुए 25 प्रतिशत फ्लैटों की बिक्री के बाद फ्लैटों की दोबारा से मरम्मत कराकर आरडब्ल्यूए को देखरेख के लिए दे दिया जाएगा। -अतुल वत्स, जीडीए उपाध्यक्ष





