उत्तर प्रदेश

Ghaziabad: गाजियाबाद कोर्ट में पेश हुए राकेश टिकैत, आंदोलन से जुड़े मामले में जमानत मंजूर

Admindelhi1
18 April 2025 4:54 PM IST
Ghaziabad: गाजियाबाद कोर्ट में पेश हुए राकेश टिकैत, आंदोलन से जुड़े मामले में जमानत मंजूर
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"मुरादनगर आंदोलन से जुड़े मुकदमे में कराई जमानत"

गाजियाबाद: भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत गाजियाबाद स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए। हालांकि कोर्ट में आज उनकी व्यक्तिगत पेशी नहीं हो सकी, लेकिन उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अजयवीर सिंह चौधरी ने मामले में पैरवी की।

अजयवीर सिंह चौधरी ने बताया कि यह मामला वर्ष 2014 का है, जब दिल्ली में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह का सरकारी आवास खाली कराया गया था। इस कार्रवाई के विरोध में रालोद और भाकियू के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने मुरादनगर गंगनहर पर बड़ा प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे।

पुलिस ने इस प्रदर्शन के सिलसिले में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे। इन्हीं मामलों की सुनवाई के लिए आज गाजियाबाद के एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में राकेश टिकैत, विधायक योगेश धामा, पूर्व विधायक सुदेश शर्मा, पूर्व विधायक वीरपाल राठी, पूर्व विधायक भगवती प्रसाद और पूर्व मंत्री दलबीर सिंह समेत कुल 25 लोग पेश हुए।

आज की सुनवाई में चार्ज फ्रेमिंग (आरोप तय) को लेकर बहस हुई। वकील अजयवीर चौधरी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं, जिससे यह सिद्ध हो सके कि उन्होंने पुलिस पर हमला किया या किसी प्रकार की मारपीट की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने स्वयं प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था, और मामले में दर्ज एफआईआर में आरोपों का समर्थन करने वाले साक्ष्य नहीं हैं।

हालांकि सरकारी वकील ने आरोपियों की तरफ से पेश की गई दलीलों का विरोध किया, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मामले में आगे की कार्यवाही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी। कोर्ट ने आज सभी 25 आरोपियों पर चार्ज तय कर दिए हैं और अगली सुनवाई की तारीख 30 अप्रैल 2025 तय की गई है। उस दिन मामले में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

वकील अजयवीर सिंह चौधरी ने बताया कि कोर्ट में हमने स्पष्ट किया कि पुलिस के पास कोई ऐसा साक्ष्य नहीं है जिससे यह सिद्ध हो कि हमारे नेताओं ने किसी प्रकार की हिंसा की। यह पूरा मामला किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन का था। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आगे फैसला लेने की बात कही है।”

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