उत्तर प्रदेश

Ghaziabad: निवेश के नाम पर 58.38 लाख रुपये की ठगी, आरोपी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

Admindelhi1
10 April 2025 4:02 PM IST
Ghaziabad: निवेश के नाम पर 58.38 लाख रुपये की ठगी, आरोपी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
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पीड़ित ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया

गाजियाबाद: कविनगर क्षेत्र की महागुनपुरम के सरस्वती टॉवर निवासी सचिन कुमार से साइबर ठगों ने शेयर ट्रेडिंग में निवेश कराकर 58 लाख 38 हजार 878 रुपये ठग लिए। साइबर ठगों ने अपनी कंपनी को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) पंजीकृत होने का दावा किया और निसंकोच निवेश करने का झांसा दिया। जांच में साइबर ठगों ने वेबसाइट, मोबाइल एप सेबी का पंजीकरण फर्जी निकला। पीड़ित ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

एडीसीपी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि महागुन निवासी सचिन कुमार के अनुसार 28 दिसंबर को उनके मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया, जिसमें शेयर बाजार में लाभ कमाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप वीआईपी-83 जीनियस इनोवेशन कैपिटल पर जुड़ने को कहा गया। ग्रुप में विजय ठाकुर नाम के व्यक्ति ने खुद को वित्तीय विशेषज्ञ बताया और शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने का प्रशिक्षण दिया। सचिन कुमार का डी-मैट पर खाता खोला गया और गूगल प्ले स्टोर से मोबाइल एप डाउनलोड कराकर शेयर ट्रेडिंग में निवेश कराया गया। इन्होंने मोबाइल एप और वेबसाइट की सत्यता जानने के लिए सेबी में होने वाले पंजीकरण संख्या भी मांगी। साइबर ठगों ने पंजीकरण संख्या और फर्जी लेटर भी सचिन कुमार को मुहैया कराया।

इसके बाद उन्होंने 12 लाख रुपये निवेश कर खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए। रुपये निकलने पर उन्हें मोबाइल एप और वेबसाइट पर विश्वास हो गया। इसके बाद अलग-अलग एक दर्जन से अधिक बैंक खातों में 58 लाख 38 हजार 878 रुपये ट्रांसफर किए। सचिन के डी-मैट खाते में निवेश और लाभ सहित कुल एक करोड़ 73 लाख 67 हजार 665 रुपये दर्शाए जा रहे थे। पीड़ित ने इस धनराशि को निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाए। साइबर ठगों ने इस धनराशि का 40 प्रतिशत कंपनी में जमा करने का झांसा दिया। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पीड़ित का कहना है कि अभी भी उनके डी-मैट खाते में 1.73 लाख रुपये की धनराशि दर्शाई जा रही है। पीड़ित की तहरीर पर बीएनएस के अंतर्गत धोखाधड़ी से संपत्ति हड़पने की धारा 318(4), जालसाजी की धारा 336(3), जाली दस्तावेज की धारा 340(2), आघात पहुंचाने की धारा 338 और कम्प्यूटर संसाधनों से धनराशि ट्रांसफर करने की धारा 66डी में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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