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Ghaziabad: स्टांप कमी केस में कोर्ट का आदेश, 4 करोड़+ की होगी रिकवरी

गाजियाबाद: जमीन की खरीद फरोख्त में स्टांप की कमी के मामले में जिलाधिकारी कोर्ट ने संबंधित फर्म पर चार करोड़ से अधिक की वसूली के आदेश दिए हैं। साथ ही न्यायालय ने फर्म पर 40 लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया है। आरोप है कि फर्म के स्वामी की ओर से 19,735 वर्गमीटर जमीन की खरीद पर सिर्फ एक हजार रुपये का ही स्टांप लगाया गया था।
उप निबंधक पंचम के कार्यालय में तीन जून 2019 को यह मामला पहुंचा था। कोफमो कोआॅपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड के मालिक विजय कुमार शर्मा एवं शैडबोल्ट बिल्डवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अमित कुमार सिंह के मध्य तीन जून 2019 को एक ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट हुआ था। यह सिद्धार्थ विहार में 19,735 वर्गमीटर भूमि के लिए हुआ था। इस भूमि के विक्रय पर कुल एक हजार रुपये का स्टांप अदा किया गया था। उप निबंधक ने 4,02,27,020 रुपये की धनराशि का कम स्टांप पाने पर वसूली की संस्तुति की थी।
जिलाधिकारी न्यायालय में मामले पर 16 दिसंबर 2024 को सुनवाई शुरू की। न्यायालय ने उपजिलाधिकारी, उप निबंधक की रिपोर्ट का अवलोकन किया तो पाया कि द्वितीय पक्ष शैडबोल्ट बिल्डवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अमित कुमार सिंह की ओर से इस भूमि पर निर्माण कराया जाएगा और बाद में निर्मित भाग के विक्रय से प्राप्त धनराशि द्वितीय पक्ष लेगा। यानी मामला बिल्डर एग्रीमेंट पाया गया। मामले में भूमि के विक्रय के बाद सिर्फ एक हजार रुपये की स्टांप अदायगी पाई गई, जबकि स्टांप कमी चार करोड़ से अधिक धनराशि की थी। जिलाधिकारी ने सभी पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अमित को नोटिस भेजा, इस पर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। न्यायालय ने पाया कि भूमि की कीमत 57,46,86,000 रुपये है, इसके एवज में 4,02,27,020 के स्टांप अदा करने चाहिए थे। लेकिन कुल एक हजार रुपये का स्टांप शुल्क अदा किया गया। कमी स्टांप पाते हुए जिलाधिकारी ने फर्म के मालिक पर राजस्व का चूना लगाने के मामले में 40 लाख रुपये का जुमार्ना लगाया और चार करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के भी आदेश दिए हैं।





